Mossad Agent M: इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ डेविड बार्निया ने पहली बार अपने एक सीनियर जासूस ‘M’ (मेम) की मौत पर बड़ा खुलासा किया है. बार्निया ने बताया कि ‘M’ ने ईरान के खिलाफ चल रहे इजरायल के गुप्त मिशन ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) की नींव रखी थी. मोसाद चीफ के मुताबिक, इस जासूस ने देश के बाहर एक मिशन के दौरान अपनी जान गंवाई. उन्होंने ‘M’ की तारीफ करते हुए कहा कि उसके द्वारा लीड किए गए मिशन चालाकी और एडवांस टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उदाहरण थे, जिन्होंने ईरान के खिलाफ इजरायल की जंग को बड़ी सफलता दिलाई.
इटली की झील में नाव पलटने से गई थी जान
इजरायल के चैनल 12 न्यूज और ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘M’ की पहचान 50 वर्षीय एरेज शिमोनी (Erez Shimoni) के रूप में हुई है. हालांकि, शिमोनी उनका एक छद्म नाम (alias) माना जाता है. उनकी मौत 28 मई 2023 को उत्तरी इटली की मैगिओर झील (Lake Maggiore) में एक टूरिस्ट नाव पलटने से हुई थी. इस हादसे में उनके साथ इटली के दो खुफिया अधिकारी और नाव के कैप्टन की पत्नी की भी मौत हो गई थी. शिमोनी ने मोसाद में करीब 30 साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. उन्हें अश्केलॉन के मिलिट्री कब्रिस्तान में दफनाया गया, जहां मोसाद के बड़े अधिकारी नकाब पहनकर शामिल हुए थे.
ईरान के खिलाफ मोसाद का सबसे ‘स्मार्ट’ जासूस
मोसाद चीफ डेविड बार्निया ने ‘M’ को एक ऐसा इंसान बताया जो शांत स्वभाव का था और लोगों से उनकी भाषा में बात करना जानता था. ‘M’ ने ऐसे जटिल मिशनों को अंजाम दिया जिन्होंने ईरान के परमाणु और रणनीतिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया. इजरायली पीएम ऑफिस ने उनके काम की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा था कि सुरक्षा कारणों से उनकी एक्टिविटीज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती. बार्निया ने मेमोरियल डे के मौके पर कहा कि ‘M’ के काम ने इजरायल की सुरक्षा में ऐतिहासिक योगदान दिया है.
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क्या है ऑपरेशन ‘रोअरिंग लायन’
इजरायल और अमेरिका ने मिलकर 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इजरायल इसे ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ कहता है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (DoD) इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के नाम से चला रहा है. ‘द जेरूसलम पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन का मुख्य मकसद ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य ताकत को कमजोर करना है. यह अभियान तब शुरू हुआ जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर था और वहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचला जा रहा था.
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