Fazal chief Rahman : पाकिस्तान की प्रमुख धार्मिक-राजनीतिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. इंडिया टुडे के मुताबिक, मौलाना रहमान 12 जुलाई को एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि यदि असीम मुनीर राजनीति करना चाहते हैं तो उन्हें सेना की वर्दी छोड़कर राजनीतिक दल बनाना चाहिए और चुनाव मैदान में उतरना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिर पता चल जाएगा कि वर्दी के बिना उन्हें (असीम मुनीर) कितने वोट मिलते हैं.
सरकार बनाना या गिराना सेना का काम नहीं
फजल प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में सेना लगातार राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी सरकार को बनाना या हटाना सेना का अधिकार नहीं है. उनके मुताबिक लोकतंत्र में जनता तय करती है कि देश पर कौन शासन करेगा, न कि सेना. उन्होंने कहा कि सेना का दायरा केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित रहना चाहिए.
जनसंख्या समिति में असीम मुनीर की नियुक्ति पर भी सवाल
फजल प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान सरकार ने बढ़ती आबादी से जुड़े मुद्दों पर गठित एक उच्चस्तरीय समिति में सेना प्रमुख असीम मुनीर को शामिल किया है. फजलुर रहमान ने इस फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय में सेना की बढ़ती भूमिका लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है.
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आतंकवाद से लड़ना सेना की जिम्मेदारी, जनता की नहीं
अपने संबोधन में रहमान ने आम नागरिकों से हथियार उठाकर आतंकवाद से लड़ने की अपीलों का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सेना और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है, क्योंकि उन्हें इसी काम के लिए वेतन मिलता है। उन्होंने कहा कि करदाताओं के पैसे से सेना चलती है, इसलिए आम लोगों पर हथियार उठाने का बोझ डालना उचित नहीं है.
नागरिकों को हथियार देने से बढ़ेगी हिंसा
फजलुर रहमान ने चेतावनी दी कि यदि आम लोगों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया गया तो इससे आने वाली पीढ़ियों तक निजी दुश्मनी और हिंसा का दौर चलता रहेगा. उन्होंने कहा कि ऐसी नीति देश को स्थायी अस्थिरता और खून-खराबे की ओर धकेल सकती है.
बलूचिस्तान की स्थिति पर भी सरकार को घेरा
रहमान ने बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई बलूच बहुल इलाकों में आज भी पाकिस्तान सरकार की प्रभावी पकड़ नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले अशांति केवल बलूच क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब खैबर पख्तूनख्वा और पश्तून इलाकों में भी हिंसा तेजी से फैल रही है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार और सेना ने अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव नहीं किया तो पाकिस्तान को आंतरिक सुरक्षा के और बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है.
