Journalist Helle Lyng: नार्वे के पूर्व पर्यावरण मंत्री एरिक सोल्हेम ने नॉर्वेजियन पत्रकार को टारगेट करते हुए और भारत के पक्ष में लंबा सोशल मीडिया पोस्ट डाला है. जिसमें उन्होंने न केवल हेले लिंग को आईना दिखाया है, बल्कि उन लोगों को भी आड़े हाथ लिया, जो भारत में पत्रकारी की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में थोड़ी जिज्ञासा रखने का समय आ गया : एरिक सोल्हेम
एरिक सोल्हेम ने अपने एक्स पोस्ट पर लिखा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे की अत्यंत सफल यात्रा के दौरान एक छोटी-सी घटना घटी. एक नॉर्वेजियाई पत्रकार ने मांग की कि प्रधानमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस करना शुरू करें. उन्होंने दावा किया कि भारतीय लोकतंत्र की हालत खराब है. शायद अब रुकने का समय आ गया है? शायद अब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में थोड़ी जिज्ञासा रखने का समय आ गया है?
नार्वे के पूर्व मंत्री ने पश्चिम बंगाल सहित विधानसभा चुनाव का किया जिक्र
नार्वे के पूर्व मंत्री ने हाल ही में 4 राज्यों और एक केंद्र शासित राज्य में हुए चुनाव का जिक्र करते हुए कहा- दो हफ्ते पहले भारत में चुनाव हुए. पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी रणक्षेत्र वाले राज्य में मतदान 94% रहा. नॉर्वे में पिछले स्थानीय चुनावों में यह 62% था, और यूरोप के कई स्थानीय चुनावों में मतदान 50% से भी कम रहता है. क्या इतनी बड़ी संख्या में मतदान करना इस बात का संकेत हो सकता है कि भारतीय अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं? इन्हीं चुनावों में, BJP ने असम और पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत हासिल की. वहीं, केरल और तमिलनाडु में उसे और भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा. क्या यह विविधता इस बात का संकेत हो सकती है कि भारतीय लोकतंत्र वास्तव में जनता की इच्छा को ही दर्शाता है?
साल्वाटोर बैबोन्स की किताब धर्म डेमोक्रेसी पढ़ने की दी सलाह
नार्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोल्हेम ने नॉर्वेजियन पत्रकार को बैबोन्स की किताब धर्म डेमोक्रेसी पढ़ने की सलाह दे डाली. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- पत्रकार ने लोकतंत्र की एक ऐसी रैंकिंग का जिक्र किया, जिसमें भारत को दुनिया में 157वें स्थान पर रखा गया है, जो कई तानाशाही और बेहद संकटग्रस्त देशों से भी पीछे है. जब कोई रैंकिंग इतनी साफ तौर पर सामान्य बुद्धि के विपरीत हो, तो उन लोगों से ही तीखे सवाल क्यों न पूछे जाएं जिन्होंने यह रैंकिंग बनाई है, बजाय इसके कि नेताओं से इस बेतुकी बात पर टिप्पणी करने की मांग की जाए? मैं साल्वाटोर बैबोन्स की किताब धर्म डेमोक्रेसी पढ़ने की सलाह देता हूं. यह किताब इन रैंकिंग्स की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली का बड़े ही तर्कसंगत ढंग से खंडन करती है.
अमेरिका में पत्रकार होना ज्यादा खतरनाक : एरिक सोल्हेम
एरिक सोल्हेम ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- एक रैंकिंग का हवाला दिया गया था जिसमें दावा किया गया था कि भारत में पत्रकार होना बहुत खतरनाक है. असलियत यह है कि अमेरिका में पत्रकार होना ज्यादा खतरनाक है, और दुनिया के ज्यादातर दूसरे देशों में तो यह कहीं ज्यादा खतरनाक है.
भारत, यूरोप या अमेरिका के मुकाबले कहीं ज्यादा शांतिपूर्ण है : नार्वे के पूर्व मंत्री
नार्वे के पूर्व मंत्री ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- भारत एकदम परफेक्ट नहीं है. जाहिर है, यहां घटनां होती रहती हैं. भारत की आबादी उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और यूरोप की कुल आबादी के बराबर है. लेकिन भारत, यूरोप या अमेरिका के मुकाबले कहीं ज्यादा शांतिपूर्ण है. यह बात वाकई काबिले-तारीफ है, खासकर भारत की जातीय, भाषाई और धार्मिक विविधता और विकास से जुड़ी कई चुनौतियों को देखते हुए.
भारतीय लोकतंत्र पूरी तरह से स्वदेशी
भारत ही एकमात्र ऐसा प्रमुख पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश है जो एक लोकतंत्र बना और आज भी बना हुआ है. कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि अंग्रेजों ने भारत को लोकतंत्र सिखाया. अगर ऐसा होता, तो म्यांमार, पाकिस्तान या खाड़ी के राजतंत्र लोकतंत्र क्यों नहीं बन पाए? असलियत तो यह है कि भारतीय लोकतंत्र पूरी तरह से स्वदेशी है और असाधारण रूप से सफल भी.
क्या है मामला?
ओस्लो के एक अखबार की पत्रकार हेले लिंग ने नॉर्वे दौरे के दौरान पीएम मोदी से एक सवाल पूछा था. संयुक्त बयान के दौरान हेले लिंग ने जोर से आवाज लगाकार पीएम मोदी से पूछा- आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से सवाल क्यों नहीं लेते? उस सवाल का पीएम मोदी ने अनदेखी कर दिया और वहां से चल गए. उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
