नकाब-बुर्का पहन स्कूल जाने पर रोक! PM मेलोनी ने कहा-धर्म के नाम पर चेहरा छिपाने की इजाजत नहीं मिलेगी!

Italy Burqa Ban : इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ऐलान किया है कि स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे पूरे चेहरे को ढकने वाले कपड़ों पहन कर नहीं जाने पर रोक लगाई जा सकती है. साथ ही, हर कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या तय किया जा सकता है.

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों को लेकर एक साथ कई बड़े प्रस्तावों का ऐलान किया है. इनमें बुर्का और नकाब जैसे पूरे चेहरे को ढकने वाले कपड़ों पर रोक, हर कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या तय करना और जरूरत पड़ने पर उनके माता-पिता को इतालवी भाषा सीखना शामिल है.

स्कूलों में बुर्का-नकाब को लेकर क्या फैसला लिया जा रहा

  • 20 सितंबर को अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली की युवा शाखा के कार्यक्रम में PM मेलोनी ने इसकी जानकारी दी.
  • उन्होंने कहा कि जल्द कैबिनेट में ऐसा प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक के साथ हर कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करने का प्रावधान होगा.
प्रस्ताव में उन कपड़ों पर रोक की बात है जो चेहरे को पूरी तरह ढकते हैं. इसमें नकाब और बुर्का आते हैं. जबकि हिजाब में सिर और बाल ढके रहते हैं, लेकिन चेहरा खुला रहता है.

मेलोनी ने स्कूल में चेहरा खुला रखने को जरूरी बताया है.

दुनिया के किन देशों में है बुर्का और नकाब पर बैन?

  • दुनिया भर के 24 देशों में बुर्का और नकाब पर पाबंदी है. हालांकि इन 24 देशों बुर्का और नकाब पर पाबंदी का मतलब हर देश में पूरी तरह एक जैसा बैन नहीं है.
  • ज्यादातर नियमों का फोकस चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर है, ताकि जरूरत पड़ने पर व्यक्ति की पहचान की जा सके. वहीं हिजाब, जिसमें चेहरा खुला रहता है, इन प्रतिबंधों से अलग है.
  • कुछ देशों में पूरे देश में नियम लागू हैं, तो कुछ जगह यह रोक खास इलाकों, सरकारी संस्थानों या विशेष परिस्थितियों तक सीमित है. जैसे चीन के मामले में यह नियम खास तौर पर शिनजियांग क्षेत्र से जुड़ा है.
महाद्वीपदेशसंख्या
अफ्रीकाकैमरून, चाड, कांगो गणराज्य, गैबॉन, सेनेगल, ट्यूनिशिया, जाम्बिया7
एशियाचीन (शिनजियांग), कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान7
यूरोपऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ्रांस, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्विट्ज़रलैंड10

विदेशी छात्रों की संख्या को क्या है प्लान?

  • मेलोनी का दूसरा प्रस्ताव कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या से जुड़ा है. उनका तर्क है कि अगर किसी कक्षा में एक-दो बच्चे इतालवी भाषा नहीं समझते, तो शिक्षक और दूसरे बच्चे उनकी मदद कर सकते हैं. लेकिन अगर भाषा नहीं समझने वाले छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाए, तो पढ़ाई और भाषा सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
  • विदेशी छात्र का मतलब यह नहीं है कि वह इतालवी नहीं जानता. मेलोनी जिस समस्या की बात कर रही हैं, उसमें भाषा और स्कूल में एकीकरण की दिक्कत अहम है, जबकि प्रस्ताव में विदेशी छात्रों की संख्या की सीमा की बात कही गई है. इसलिए अंतिम कानून में इसकी परिभाषा क्या होगी, यह महत्वपूर्ण होगा.

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इटली के स्कूलों में विदेशी नागरिकता वाले कितने छात्र हैं?

  • फोंदाजिओने आईएसएमयू के आंकड़ों के मुताबिक, इतालवी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 11.6 फीसदी छात्र इतालवी नागरिक नहीं हैं. यानी मोटे तौर पर हर 100 छात्रों में लगभग 12 छात्र ऐसे हैं जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है.
  • जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरे देश का आंकड़ा है, किसी एक स्कूल या कक्षा का नहीं. इसलिए राष्ट्रीय औसत को सीधे हर कक्षा की स्थिति मान लेना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग इलाकों और स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या अलग हो सकती है.

माता-पिता के लिए भी इतालवी सीखने की शर्त

  • सरकार के प्रस्ताव का एक और हिस्सा परिवारों से जुड़ा है. जिन विदेशी छात्रों को स्कूल व्यवस्था में एकीकरण में गंभीर परेशानी होगी, उनके माता-पिता को इतालवी भाषा सीखने की शर्त का सामना करना पड़ सकता है.
  • सरकार इसे बच्चों को स्कूल और समाज में बेहतर तरीके से जोड़ने के उपाय के तौर पर देख रही है. फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि भाषा सीखने की शर्त किस तरह लागू होगी, किन परिवारों पर लागू होगी और इसके लिए क्या नियम बनाए जाएंगे?

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अब आगे क्या होगा?

मेलोनी के ऐलान के बाद अगला बड़ा कदम कैबिनेट में प्रस्ताव पेश करना है.इसके बाद ही पता चलेगा कि चेहरे को ढकने पर रोक का दायरा क्या होगा, विदेशी छात्रों की सीमा कैसे तय होगी और माता-पिता के लिए भाषा सीखने का नियम किस रूप में आएगा.

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By गौतम कुमार

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