नकाबपोश ईरानी सैनिकों का एक्शन: होर्मुज में IRGC द्वारा कमर्शियल जहाजों को जब्त करने का फुटेज जारी

होर्मुज में जहाज को कब्जा करते नकाबपोश ईरानी सैनिक.

IRGC: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को कब्जे में लिया है. पनामा ने ईरान की इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बताया. वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत की पेशकश पर ईरान ने फिलहाल सस्पेंस बना रखा है.

IRGC: अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की सरकार ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें उनकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में एक कमर्शियल कंटेनर शिप पर कब्जा करती दिख रही है. वीडियो में नकाबपोश ईरानी सैनिक जहाजों की दीवारों पर चढ़कर डेक को अपने कंट्रोल में लेते नजर आ रहे हैं.

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उनके जवानों ने बुधवार को इस इलाके से दो जहाजों को पकड़ा है. कब्जे के बाद सेना ने कन्फर्म किया कि दोनों जहाजों को ईरानी तट की ओर मोड़ दिया गया है और अब वे पूरी तरह उनके कंट्रोल में हैं.

पनामा ने जताई कड़ी आपत्ति

पनामा ने अपने झंडे वाले जहाज ‘एमएससी फ्रांसिस्का’ (MSC Francesca) को पकड़े जाने पर नाराजगी जताई है. पनामा के विदेश मंत्रालय ने इसे गैर-कानूनी बताते हुए कहा कि यह जहाज इटली के मालिक का है लेकिन पनामा में रजिस्टर्ड है.

मंत्रालय के अनुसार, जब जहाज को जबरन ईरानी समुद्री सीमा में ले जाया गया, तब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था. पनामा ने चेतावनी दी है कि ईरान की यह हरकत समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और ऐसे समय में तनाव बढ़ाने वाली है जब दुनिया इस समुद्री रास्ते को बिना किसी डर या धमकी के खुला रखना चाहती है.

आईआईआरबी और आईआरजीसी के आरोप

ईरानी स्टेट मीडिया ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) ने आईआरजीसी के हवाले से बताया कि पकड़े गए जहाजों के नाम ‘एमएससी फ्रांसिस्का’ और ‘एपेमिनोड्स’ (EPAMINODES) हैं. सेना का आरोप है कि इन जहाजों ने नियमों को तोड़ा और नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करके समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाला. आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि ‘एमएससी फ्रांसिस्का’ का संबंध इजराइल से है और दोनों जहाज बिना परमिशन के सीक्रेट तरीके से वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे.

ट्रंप ने ईरान को दिया ऑफर  

यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुई जिसमें उन्होंने युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाने की बात कही थी. सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान समझौता करता है, तो वह बहुत अच्छी स्थिति में पहुंच सकता है और एक महान देश बन सकता है. हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इसे दिखावा बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान हमेशा बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका की पाबंदियां और धमकियां ही बातचीत के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट हैं.

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आगे क्या होगा?

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को लगता है कि अगले 36 से 72 घंटों में बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है. दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने साफ किया है कि तेहरान ने अभी तक मध्यस्थता वाली इन चर्चाओं में शामिल होने पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है. ऐसे में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

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लेखक के बारे में

By Govind jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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