Iran US Conflict: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने रविवार को अमेरिका की जमकर बुराई की. उन्होंने यूएस राष्ट्रपति ट्रंप पर इस्लामी गणराज्य को कमजोर करने और देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. गालिबफ ने कहा कि वाशिंगटन आर्थिक दबाव और मीडिया हेरफेर के जरिए ईरान की राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाना चाहता है, लेकिन तेहरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का उसका सपना कभी पूरा नहीं होगा. उन्होंने इसे अमेरिका का कोरा सपना करार दिया है.
गालिबफ ने कहा- सैन्य पराजय की भरपाई के लिए अमेरिका रच रहा साजिश
ईरानी सरकारी मीडिया आईआरआईबी (IRIB) की और से जारी बयान के अनुसार, गालिबफ ने कहा कि दुश्मन अपनी सैन्य विफलताओं की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों और प्रचार तंत्र के जरिए करना चाहता है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान में फूट डालकर देश को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. गालिबफ ने कहा- युद्ध के नए चरण में दुश्मन आर्थिक दबाव और मीडिया हेरफेर के जरिए देश की एकता को नष्ट करने और हमें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहा है. यह उनका एक झूठा सपना है.
बोले गालिबफ- ईरान और इस्लाम को मिटाने की कोशिश कर रहा दुश्मन
ईरानी संसद के अध्यक्ष ने कहा कि देश एक ऐतिहासिक और संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. उन्होंने दावा किया कि ईरानी जनता उस दुश्मन का डटकर मुकाबला कर रही है, जो ईरान और इस्लाम को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. गालिबफ ने अमेरिका और ईरान को जल्लाद और हत्यारा दुश्मन करार दिया है. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां मौजूदा संघर्ष को इतिहास के सबसे अहम मोड़ के रूप में हमेशा याद रखेंगी और इस बात पर गर्व करेंगी कि उनके पूर्वजों ने देश की संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा की.
संघर्ष के चार मोर्चों का किया उल्लेख
गालिबफ ने वर्तमान परिस्थितियों को पूर्ण संघर्ष बताते हुए इसके चार प्रमुख क्षेत्रों का जिक्र किया. उन्होंने कहा- सैन्य मोर्चा, जन मोर्चा, कूटनीतिक और जनसेवा… इन चारों क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों के जरिए ही देश अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकता है. गालिबफ ने कहा कि ईरान की सैन्य उपलब्धियां, विशेषकर मिसाइल कार्यक्रम में हुई प्रगति, जनता के सहयोग और समर्थन की बदौलत संभव हुई हैं. उन्होंने कहा कि अब कूटनीति की जिम्मेदारी है कि इन सैन्य सफलताओं को राजनीतिक और कानूनी उपलब्धियों में बदला जाए.
जनता के अधिकारों से समझौता नहीं करेगा ईरान
ईरानी संसद अध्यक्ष ने साफ किया कि विदेशी शक्तियों के साथ किसी भी समझौते को तभी स्वीकार किया जाएगा, जब उससे ईरानी जनता के अधिकार सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा कि ईरान केवल ठोस परिणामों और व्यावहारिक उपलब्धियों को महत्व देता है. दुश्मन के वादों और बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इसलिए ऐसा कोई भी समझौता मंजूर नहीं किया जाएगा, जिससे देश के हितों और जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचे.
संसद के नए सत्र में दिया संबोधन
गालिबफ ने ये टिप्पणियां ईरान की 12वीं संसद के तीसरे साल के पहले सत्र के दौरान कहीं. यह कार्यक्रम आभासी रूप से आयोजित किया गया था, जिसमें 187 सांसद ऑनलाइन शामिल हुए, जबकि 14 सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति दर्ज कराई.
