ईरान में जिनके इशारे पर भड़क रहे प्रदर्शन, ट्रंप क्यों नहीं करना चाहते रजा पहलवी से मुलाकात?

Iran Protests: ईरान इस समय 2022 के बाद सबसे बड़े जनआंदोलन से गुजर रहा है. महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और रियाल की कमजोरी ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है. 12 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच इंटरनेट बंद है, दर्जनों लोगों की मौत हुई है और हजारों गिरफ्तार हुए हैं. अमेरिका, जर्मनी और ईरान के बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी गरमा गई है, जबकि रजा पहलवी की अमेरिका यात्रा ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है.

By Govind Jee | January 9, 2026 1:31 PM

Iran Protests: ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. साल 2022 के बाद यह सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है. देश के अलग-अलग शहरों में लोग लगातार 12 दिनों से सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था ने आम लोगों का सब्र तोड़ दिया है. हालात ऐसे हैं कि सरकार ने इंटरनेट तक बंद कर दिया है, दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है और दुनिया भर की नजरें अब ईरान पर टिकी हैं. इसी बीच, ईरान के निर्वासित युवराज रज़ा पहलवी की अमेरिका यात्रा की खबर सामने आई है और यहां से सियासत गरमा गई है.

महंगाई से भड़का आंदोलन, रियाल की हालत ने बढ़ाया गुस्सा

इन प्रदर्शनों की शुरुआत दिसंबर के आखिर में हुई. वजह साफ थी कि महंगाई आसमान छू रही है और ईरान की मुद्रा रियाल लगातार कमजोर हो रही है. सबसे पहले तेहरान के ग्रैंड बाजार के व्यापारियों ने दुकानें बंद कर विरोध जताया. इसके बाद यह गुस्सा बाजार से निकलकर सड़कों पर आ गया और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया, खासकर पश्चिमी ईरान में. ऑनलाइन निगरानी संस्था नेटबॉल्कस ने बताया कि गुरुवार को ईरान में देशभर में इंटरनेट बंद कर दिया गया. संस्था के मुताबिक, लाइव नेटवर्क डेटा से साफ है कि सरकार ने डिजिटल पाबंदियां और सख्त कर दी हैं. नेटबॉल्कस ने कहा कि इस कदम से लोग एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और सही जानकारी बाहर नहीं जा पा रही. ऐसे समय में इंटरनेट बंद होना हालात को और खतरनाक बना देता है.

Iran Protests in Hindi: रजा पहलवी ने प्रदर्शनों का खुलकर किया समर्थन

रजा पहलवी, जो ईरान के पिछले शाह के बेटे और निर्वासित राजकुमार हैं, वर्तमान में ईरान में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों का स्पष्ट रूप से समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे सीधे राजतंत्र तुरंत वापस लाना चाहते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों में कहा है कि ईरानी जनता अपने देश के भविष्य को खुद चुनने का अधिकार रखती है, और वह चाहते हैं कि लोग गणतंत्र या अन्य लोकतांत्रिक विकल्प चुन सकें, न कि किसी एक व्यक्ति का शासन थोपना. उन्होंने दिखाया है कि वह इस आंदोलन में डेमोक्रेटिक बदलाव के लिए जनता के साथ खड़े हैं और हिंसा की बजाय शांतिपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं. 

पहलवी ने हाल के विरोधों के दौरान ईरानियों से देशभर में सड़कों पर आने और विरोध जारी रखने का आह्वान किया है और कहा है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शन करना यह दिखाता है कि लोग राजनीति में बदलाव चाहते हैं और अविश्वास का संकेत दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा इंटरनेट काटना और संचार बंद करना केवल जनता को और ज्यादा सक्रिय करेगा और यह आंदोलन और मजबूत करेगा. अल जजीरा के अनुसार, साथ ही उन्होंने विदेशी नेताओं से समर्थन की अपील भी की है, जैसे कि उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया है कि उन्होंने ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट किया.

अब तक 45 लोगों की मौत, 8 बच्चे भी शामिल 

नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स ने बड़ा दावा किया है. संगठन के मुताबिक, अब तक कम से कम 45 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. इनमें 8 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं. संगठन ने बताया कि बुधवार अब तक का सबसे खूनखराबे वाला दिन रहा, जब 13 लोगों की मौत हुई. इसके अलावा सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ईरान ह्यूमन राइट्स के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दम ने कहा कि सबूत दिखाते हैं कि सरकार की कार्रवाई हर दिन ज्यादा हिंसक और ज्यादा फैलती जा रही है.

राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले- हिंसा नहीं, बात से हल निकले

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सुरक्षा बलों से संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने साफ कहा कि प्रदर्शनकारियों से निपटने में जोर-जबरदस्ती और हिंसा से बचना चाहिए. पेजेश्कियन ने कहा कि सरकार को लोगों की बातें सुननी चाहिए, उनसे बातचीत करनी चाहिए और महंगाई जैसे मुद्दों पर समाधान निकालना चाहिए. वहीं जर्मनी ने ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. जर्मन विदेश मंत्री योहान वेडफुल ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्वक अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर जिंदा गोलियां और आंसू गैस का इस्तेमाल किया.

अमेरिका और इजरायल को ईरान की दो टूक चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अमेरिका या इजरायल से जंग नहीं चाहता, लेकिन अगर हमला हुआ तो कड़ा जवाब दिया जाएगा. बेरूत में पत्रकारों से बात करते हुए अराघची ने कहा कि ईरान अब भी अमेरिका से परमाणु समझौते पर बातचीत को तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि बातचीत सम्मान के साथ हो, दबाव के साथ नहीं.

रजा पहलवी की अमेरिका यात्रा से सियासत गरमाई

इसी बीच, ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी की अमेरिका यात्रा की खबर सामने आई है. पत्रकार लॉरा लूमर के मुताबिक, पहलवी अगले मंगलवार को अमेरिका के मार-ए-लागो में होने वाले जेरूसलम प्रार्थना नाश्ते में शामिल होंगे. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस दौरान उनकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होगी या नहीं, लेकिन विरोध प्रदर्शनों के बीच इस दौरे पर खूब चर्चा हो रही है.

ट्रंप ने साफ कहा- पहलवी से मुलाकात नहीं होगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे रजा पहलवी से मुलाकात नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका अभी ईरान में किसी नए नेता को समर्थन देने के मूड में नहीं है. The Hugh Hewitt Show (ह्यू हेविट शो) पॉडकास्ट में ट्रंप ने कहा कि वह अच्छे इंसान हैं, लेकिन राष्ट्रपति रहते हुए उनसे मिलना ठीक नहीं होगा. हमें देखने देना चाहिए कि ईरान में आगे कौन उभरता है. ट्रंप ने ईरानी सरकार को कड़ी चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा. ट्रंप बोले कि अगर वे लोगों को मारने लगे, जैसा वे अक्सर करते हैं, तो हम बहुत कड़ी कार्रवाई करेंगे. (Why Trump Refused To Meet Reza Pahlavi in Hindi)

विशेषज्ञ बोले- सरकार और जनता के बीच गहरी दूरी

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के रिसर्च फेलो निकोलस कार्ल का कहना है कि ये प्रदर्शन सरकार और जनता के बीच गहरी दूरी को दिखाते हैं. उन्होंने बताया कि 2017 के बाद यह चौथा बड़ा सरकार विरोधी आंदोलन है. भ्रष्टाचार, खराब अर्थव्यवस्था और सख्त नियम इसकी बड़ी वजह हैं. कार्ल ने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं बदले, तो विरोध आगे भी जारी रहेगा. ईरान इस वक्त सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक नहीं, बल्कि पर्यावरण संकट से भी जूझ रहा है.

देश में पानी की भारी कमी है. वहीं विदेश नीति के मोर्चे पर भी झटके लगे हैं. सीरिया में बशर अल-असद की सत्ता गिरी, हिज्जबुल्लाह को इजरायल से नुकसान हुआ, और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने अगवा कर लिया. वहीं इन सबके बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सख्त रुख दिखाया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि  हम दुश्मन के सामने नहीं झुकेंगे. हम दुश्मन को घुटनों पर ला देंगे.

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