ईरान में जनता का उग्र प्रदर्शन, देश के कोने-कोने में फैला आंदोलन, 7 लोगों की हुई मौत, महंगाई और करेंसी बड़ा कारण

Iran Protest Over Economy Inflation Rise: ईरान में जनता का गुस्सा अब बढ़ता जा रहा है. अर्थव्यवस्था में बढ़ती महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियों की वजह से देश के कोने-कोने में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इनमें गुरुवार तक लगभग 7 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है.

By Anant Narayan Shukla | January 2, 2026 8:32 AM

Iran Protest Over Economy Inflation Rise: ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान से निकलकर ग्रामीण और प्रांतीय इलाकों तक फैल गए हैं. गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. यह मौजूदा आंदोलन में पहली बार है जब जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि हुई है. इन मौतों को ईरान की धार्मिक सत्ता की ओर से आंदोलन को दबाने के लिए सख्त रुख अपनाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. जहां तेहरान में प्रदर्शन कुछ हद तक शांत हुए हैं, वहीं अन्य प्रांतों में इनकी तीव्रता बढ़ती दिख रही है. अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों में से दो की मौत बुधवार को और पांच की मौत गुरुवार को हुई. ये घटनाएं चार अलग-अलग शहरों में सामने आईं, जो मुख्य रूप से ईरान के लुर जातीय समुदाय के बहुल क्षेत्र हैं.

सबसे ज्यादा हिंसा लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में दर्ज की गई, जो तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सड़कों पर आगजनी, गोलियों की आवाजें और “शर्म करो” जैसे नारे सुनाई देते हैं. अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक यहां तीन लोगों की मौत हुई. हालांकि सरकारी मीडिया ने हिंसा की घटनाओं को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. 2022 के आंदोलनों के दौरान रिपोर्टिंग करने वाले कई पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद से मीडिया कवरेज सीमित मानी जा रही है.

अलग-अलग इलाकों में लोगों की हुई मौत

चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान शहर में भी प्रदर्शन हुए, जहां गोलियों की आवाजों के बीच भीड़ सड़कों पर नजर आई. यह तेहरान से लगभग 470 किलोमीटर दक्षिण में हैं. फार्स एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यहां दो लोगों की मौत हुई, जबकि मानवाधिकार संगठन ‘अब्दोर्रहमान बोरोमंद सेंटर’ ने दावा किया कि दोनों मृतक प्रदर्शनकारी थे. इस्फहान प्रांत के फुलादशहर में भी एक व्यक्ति की मौत की खबर आई है. सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की, लेकिन कार्यकर्ता समूहों का आरोप है कि यह मौत पुलिस फायरिंग का नतीजा थी. इसके अलावा, एक अलग घटना में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की बासिज फोर्स के 21 वर्षीय स्वयंसेवक की भी जान चली गई. सरकार समर्थक मीडिया ने इसके लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया.

2022 में हुआ था बड़ा प्रदर्शन

इन प्रदर्शनों को 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है. उस समय 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में व्यापक विरोध हुआ था. हालांकि मौजूदा प्रदर्शन अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं और न ही पूरे देश में समान रूप से फैले हैं, लेकिन इनकी पृष्ठभूमि भी गंभीर आर्थिक संकट से जुड़ी है. अमीनी को कथित तौर पर हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था.

महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियों की वजह से हो रहा प्रदर्शन

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, ये प्रदर्शन मुख्य रूप से महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियों से उपजे हैं. लोरेस्तान के उप-राज्यपाल ने कहा कि लोगों की आवाज सुनी जानी चाहिए, लेकिन आंदोलनों को “स्वार्थी तत्वों” द्वारा भटकने नहीं देना चाहिए. कोहदश्त शहर में प्रदर्शनों के बाद करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया और स्थिति के सामान्य होने का दावा किया गया है. सरकारी टीवी ने अलग से बताया कि सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पांच कथित तौर पर राजशाही समर्थक और दो यूरोप स्थित समूहों से जुड़े बताए गए हैं. राज्य टीवी ने यह भी दावा किया कि एक अन्य कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 100 तस्करी किए गए पिस्तौल जब्त किए हैं, हालांकि इस पर ज्यादा विवरण नहीं दिया गया.

मुद्रा में गिरावट बनी चिंगारी

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली असैन्य सरकार बातचीत के संकेत दे रही है, लेकिन उन्होंने खुद माना है कि उनके पास सीमित विकल्प हैं. ईरानी रियाल की कीमत तेजी से गिरकर एक डॉलर के मुकाबले लगभग 14 लाख रियाल तक पहुंच गई है. इसी के बाद आर्थिक मांगों से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब धार्मिक सत्ता के खिलाफ नारों में बदलते जा रहे हैं. इजरायल के साथ हालिया तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों से जारी टकराव के बीच यह आंदोलन ईरानी नेतृत्व के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है.

ईरान ने दावा किया है कि वह देश में किसी भी स्थान पर यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है और पश्चिमी देशों को यह संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत को तैयार है. हालांकि अब तक ऐसी कोई वार्ता शुरू नहीं हो पाई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही तेहरान को चेतावनी दे चुके हैं कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने से बचे.

आंदोलन को दबाने के लिए छुट्टी भी की

ईरानी सरकार ने ठंड के मौसम का हवाला देते हुए बुधवार को देश के बड़े हिस्से में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था. माना जा रहा है कि यह कदम लोगों को लंबे सप्ताहांत में राजधानी से बाहर जाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया. ईरान में साप्ताहिक अवकाश गुरुवार और शुक्रवार को होता है, जबकि शनिवार को इमाम अली की जयंती के अवसर पर भी छुट्टी रहती है.

पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ.

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