भारतीय मूल के वैज्ञानिक को मिलेगा ‘जियो साइंस का नोबेल’, 1975 में की थी ऐसी खोज, जिससे आज जूझ रही दुनिया

Indian Origin Scientist wins Crafoord Prize: भारतीय मूल के फेमस क्लाइमेट साइंटिस्ट डॉ. वीरभद्रन रामनाथन को जियो साइंस के क्षेत्र में 50 साल पहले की गई खोज के लिए क्रैफोर्ड पुरस्कार देने की घोषणा की गई है.

Indian Origin Scientist wins Crafoord Prize: भारतीय मूल के प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक डॉ. वीरभद्रन रामनाथन (Veerabhadran Ramanathan) को भू-विज्ञान (Geo Science) के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार देने की घोषणा की गई है. यह सम्मान रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा दिया जाता है और इसे अक्सर ‘भू-विज्ञान का नोबेल’ (Nobel Prize in Geosciences) भी कहा जाता है. 82 वर्षीय रामनाथन को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वायुमंडल में मौजूद ‘सुपर-प्रदूषकों’ और ‘ब्राउन क्लाउड्स’ पर उनके दशकों लंबे शोध के लिए प्रदान किया गया. इसने वैश्विक ताप वृद्धि को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है.

डॉ. रामनाथन ने 1975 में नासा में कार्य करते हुए एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक खोज की थी. उन्होंने पाया कि उस समय एरोसोल स्प्रे और रेफ्रिजरेशन में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) कार्बन डाई ऑक्साइड की तुलना में ज्यादा खतरनाक है. उन्होंने पाया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 10,000 गुना अधिक प्रभावी ढंग से गर्मी को खींचते हैं. इस खोज ने यह स्पष्ट किया कि मानव निर्मित गैसें पृथ्वी की जलवायु पर पहले सोचे गए अनुमान से कहीं अधिक गंभीर प्रभाव डाल रही हैं.

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज से बातचीत में उन्होंने कहा कि 1975 तक वैज्ञानिक समुदाय मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड को ही ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण मानता था. उन्होंने कहा, ‘मैं यह देखकर स्तब्ध रह गया कि तकनीक और मानव गतिविधियां पर्यावरण को किस हद तक बदल सकती हैं.’ लेकिन उनके शोध ने दिखाया कि औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाली अन्य गैसें भी अत्यंत खतरनाक भूमिका निभा रही हैं.

क्रैफोर्ड पुरस्कार के तहत रामनाथन को लगभग 9 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि और एक स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा. यह सम्मान मई 2026 में स्टॉकहोम में आयोजित ‘क्रैफोर्ड डेज’ समारोह के दौरान दिया जाएगा. उनका शोध मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय समझौतों की नींव बना, जिसने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले लाखों टन हानिकारक उत्सर्जन में भारी कमी लाने में मदद की.

तमिलनाडु के मदुरै में जन्मे और चेन्नई में पले-बढ़े रामनाथन ने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद की एक रेफ्रिजरेटर फैक्टरी में इंजीनियर के रूप में की थी. बाद में उन्होंने अन्नामलाई विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त कर जलवायु विज्ञान की दुनिया में वैश्विक पहचान बनाई.

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By Anant narayan shukla

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