‘मुस्लिम-विरोधी’ परिभाषा तय करने पर मचा बवाल, हिंदू-सिख संगठनों की ब्रिटिश सरकार को चेतावनी, मामला क्या है

Hindu Sikh Concerns UK Anti-Muslim Definition: ब्रिटिश सरकार ‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’ को परिभाषित करने के लिए विचार कर रही है. इसके कुछ हिस्से मीडिया में लीक हो गए हैं. ब्रिटेन के हिंदू और सिख संगठनों ने ब्रिटेन के प्रस्तावित मसौदा परिभाषा को लेकर सावधानी बरतने की चेतावनी दी है. ‘हिंदू काउंसिल यूके’ ने समुदाय मामलों के सचिव स्टीव रीड को पत्र लिखकर दावा किया है कि यह मसौदा न केवल गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण है, बल्कि यदि इसे औपचारिक रूप से अपनाया गया तो इसके गंभीर और अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं.

Hindu Sikh Concerns UK Anti-Muslim Definition: ब्रिटेन में सरकार द्वारा ‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’ की एक नई परिभाषा तय करने की कोशिश को लेकर बहस तेज हो गई है. हाल ही में इस परिभाषा का एक मसौदा मीडिया में लीक हुआ, जिसके बाद हिंदू और सिख संगठनों ने इसे लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं. उनका कहना है कि अगर यह परिभाषा मौजूदा रूप में लागू की गई, तो इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य धार्मिक समुदायों के अधिकारों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

ब्रिटेन के हिंदू और सिख संगठनों ने सरकार को आगाह किया है कि वह ‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’ की प्रस्तावित परिभाषा को अपनाने से पहले बेहद सावधानी बरते. ‘हिंदू काउंसिल यूके’ ने इस सप्ताह समुदाय मामलों के सचिव स्टीव रीड को पत्र लिखकर दावा किया है कि यह मसौदा न केवल “गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण” है, बल्कि यदि इसे औपचारिक रूप से अपनाया गया तो इसके गंभीर और अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं.

क्या है मसौदे में?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने फरवरी 2024 में मुस्लिम विरोधी घृणा (जिसे आम तौर पर इस्लामोफोबिया कहा जाता है) पर काम करने के लिए एक कार्य समूह बनाया था. इस समूह ने जो मसौदा पेश किया, उसमें ‘इस्लामोफोबिया’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया और उसकी जगह ‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’ शब्द रखा गया. मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, कार्य समूह ‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’ को ऐसे कृत्यों में शामिल होने या उन्हें बढ़ावा देने के रूप में परिभाषित करना चाहता है. मसौदे में ‘मुस्लिम-विरोधी शत्रुता’ को ऐसे आपराधिक कृत्यों से जोड़ा गया है, जिनमें हिंसा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, उत्पीड़न या धमकी देना शामिल है. यह सब शारीरिक, मौखिक, लिखित या ऑनलाइन किसी भी माध्यम से हो सकता है और इसका निशाना वे लोग हो सकते हैं जिन्हें उनके धर्म, जातीयता या पहनावे के कारण मुसलमान माना जाता है.

हिंदू संगठन की चिंता क्या है?

हिंदू काउंसिल यूके ने आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मंत्रालय (MHCLG) के तहत राज्य सचिव को पत्र लिखा. इसमें कहा गया है कि हिंदू, सिख, ईसाई, धर्मनिरपेक्ष और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों द्वारा साझा की गई एक केंद्रीय चिंता यह है कि यह परिभाषा मुसलमानों के प्रति शत्रुता और इस्लाम को एक विश्वास प्रणाली के रूप में आलोचना करने के बीच स्पष्ट अंतर करने में विफल रहती है. ‘हिंदू काउंसिल, ब्रिटेन’ ने समुदाय मामलों के मंत्री स्टीव रीड को पत्र लिखकर कहा है कि यह मसौदा कई मायनों में खामियों से भरा हुआ है और इसके लागू होने से अनचाहे व गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

मसौदे में आगे कहा गया है, “यह मुसलमानों को एक सामूहिक समूह के रूप में, तयशुदा विशेषताओं के साथ, पूर्वाग्रहपूर्ण रूढ़िबद्धता और नस्लीकरण (racialisation) के जरिए उनके खिलाफ नफरत भड़काने से भी जुड़ा है, चाहे व्यक्तियों के रूप में उनके वास्तविक विचार, विश्वास या आचरण कुछ भी हों. इसके अलावा, यह उन प्रतिबंधित भेदभावपूर्ण प्रथाओं में शामिल है, जहां संस्थानों के भीतर नीतियों और पूर्वाग्रहों का निर्माण या उपयोग मुसलमानों को सार्वजनिक और आर्थिक जीवन में नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया जाता है.”

हिंसा और आलोचना के बीच अंतर साफ नहीं

हिंदू काउंसिल यूके ने कहा कि उसने मसौदे की भाषा पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और वह मुसलमानों के खिलाफ नफरत, हिंसा, डराने-धमकाने, उत्पीड़न और गैरकानूनी भेदभाव की बिना किसी शर्त निंदा करता है, लेकिन प्रस्तावित परिभाषा में प्रयुक्त कुछ शब्दावली में “खतरनाक” अस्पष्टता है. हिंदू काउंसिल का कहना है कि इस परिभाषा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें मुसलमानों के प्रति नफरत या हिंसा और इस्लाम को एक विचारधारा या विश्वास प्रणाली के रूप में आलोचना करने के बीच साफ अंतर नहीं किया गया है.

केवल हिंदू नहीं सभी की चिंता यही

परिषद के अनुसार, यह चिंता सिर्फ हिंदुओं की नहीं, बल्कि सिख, ईसाई, धर्मनिरपेक्ष समूहों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों की भी है. पत्र में यह भी बताया गया है कि ऐसी परिभाषाएं अक्सर अदालतों के बजाय विश्वविद्यालयों, स्थानीय परिषदों, एनएचएस, नियोक्ताओं और नियामक संस्थाओं की आंतरिक नीतियों के जरिए लागू होती हैं. इन जगहों पर प्रतिबंध लगाने की सीमा कई बार कानून से भी सख्त हो जाती है, जिससे अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों के लिए खतरा पैदा हो सकता है.

हिंदू धर्म बौद्धिक बहस को प्रोत्साहित करता है

काउंसिल ने कहा कि ‘नस्लीकरण’ और ‘सामूहिक विशेषताओं’ जैसे शब्दों का उपयोग करके यह परिभाषा इस जोखिम को जन्म देती है कि किसी धर्म और उससे जुड़े विचारों, सिद्धांतों और प्रथाओं को आलोचना से परे मान लिया जाए. जबकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में आहत करने, चुनौती देने और विचारों की आलोचना करने का अधिकार शामिल है. वास्तव में, हिंदू धर्म बौद्धिक बहस को प्रोत्साहित करता है, जिसने उसे मजबूत बनाया है.

सिख और सेक्युलर सोसाइटी भी इसके खिलाफ

नेटवर्क ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशन्स (एनएसओ) के प्रतिनिधि हरदीप सिंह ने भी इस मसौदे को “बेहद अस्पष्ट” बताते हुए चिंता जताई है. उन्होंने आगे कहा,“एक और समस्या यह है कि ‘नस्लीकरण’ शब्द को चुपचाप इसमें शामिल कर दिया गया है.” वहीं ब्रिटेन की नेशनल सेक्युलर सोसाइटी (NSS) भी धार्मिक आधार पर होने वाले घृणा अपराधों से निपटने के लिए अपनाए जा रहे इस तरह के “परिभाषा-आधारित दृष्टिकोण” पर चिंता जताने वाले संगठनों में शामिल है. संस्था ने भी मंत्री स्टीव रीड को पत्र लिखकर मांग की है कि किसी भी प्रस्तावित परिभाषा को अपनाने या लागू करने से पहले “पूर्ण, खुली और पारदर्शी सार्वजनिक परामर्श” कराया जाए.

सरकार का बचाव: प्रस्ताव एक संतुलित दृष्टिकोण

वहीं, सरकार के कार्य समूह की सदस्य बैरोनेस शाइस्ता गोहिर का कहना है कि यह प्रस्ताव एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें लोगों की सुरक्षा भी होती है और जरूरत से ज्यादा दायरा भी नहीं बढ़ता. सरकार ने लीक हुए मसौदे पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया है. मंत्रालय के प्रवक्ता ने सिर्फ इतना कहा कि सरकार हर तरह की नफरत और चरमपंथ से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है.

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अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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