हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में फैला चीन का इंफ्लूएंस, जांच में विदेशी फंडिंग से लेकर PLA कनेक्शन तक पर उठे सवाल

अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चीन से कथित संबंधों और विदेशी प्रभाव के आरोपों में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की जांच के दायरे में आ गई है. इस जांच में विदेशी फंडिंग, चीनी संस्थानों के साथ सहयोग और अमेरिकी रिसर्च की सुरक्षा जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं.

अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चीन से कथित संबंधों और विदेशी प्रभाव को लेकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की जांच के घेरे में है. हाउस सेलेक्ट कमेटी ऑन द चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) और हाउस एजुकेशन एंड द वर्कफोर्स कमेटी ने मिलकर यह जांच की है. दोनों समितियों ने अपनी जांच में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की विदेशी फंडिंग, चीनी संस्थानों के साथ सहयोग और अमेरिकी रिसर्च की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. इसकी रिपोर्ट का शीर्षक Compromised Independence: CCP Influence at Harvard University यानी समझौते वाली स्वतंत्रता: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीसीपी का प्रभाव रखा गया है.

समितियों के मुताबिक, यह जांच किसी एक घटना तक सीमित नहीं थी. इसके लिए हार्वर्ड से हासिल किए गए हजारों पन्नों के दस्तावेज, चीनी सरकार के रिकॉर्ड, विश्वविद्यालय कर्मचारियों के ट्रांसक्राइब किए गए इंटरव्यू और गवाहों की गवाही की समीक्षा की गई. जांच में खास तौर पर चीन से जुड़े संस्थानों के साथ हार्वर्ड के संबंध, विदेशी फंडिंग और संवेदनशील रिसर्च की सुरक्षा व्यवस्था को परखा गया.

चीन विरोधी प्रदर्शनकारियों को नहीं दी पर्याप्त सुरक्षा

हाउस सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन जॉन मोलिनार ने आरोप लगाया कि हार्वर्ड ने कई गंभीर गलतियां की हैं. उनके मुताबिक अमेरिकी जनता की अपेक्षा है कि देश की शीर्ष यूनिवर्सिटियां अमेरिकी रिसर्च और इनोवेशन की सुरक्षा करें, न कि विदेशी विरोधियों के हितों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का हिस्सा बनें. उन्होंने हार्वर्ड पर चीन विरोधी प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त सुरक्षा न देने और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से कथित रूप से जुड़े संस्थानों के साथ सहयोग को लेकर सवाल उठाए.

विदेशी फंडिंग पर हार्वर्ड कर सकता था नियमों का उल्लंघन

जांच में विदेशी फंडिंग का मुद्दा भी प्रमुख रहा. हाउस एजुकेशन एंड द वर्कफोर्स कमेटी के चेयरमैन टिम वालबर्ग ने हार्वर्ड ग्लोबल नाम की इकाई को लेकर सवाल उठाए. समिति के मुताबिक, इसकी व्यवस्था विदेशी फंडिंग के खुलासे से जुड़े संघीय नियमों को दरकिनार करने में इस्तेमाल की जा सकती थी. जांचकर्ताओं ने दावा किया कि रिपोर्ट आने से पहले हार्वर्ड ने अपनी वेबसाइट से इससे जुड़ी कुछ भाषा हटा दी.

हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की गतिविधियां भी जांच के दायरे में आईं. समितियों ने एक ऐसे सेमिनार का उल्लेख किया जिसमें चीन के एक अर्धसैनिक संगठन की संभावित भागीदारी पर सवाल उठे, जिस पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने प्रतिबंध लगाए हैं.

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चीन की सेना और उइगरों को लेकर भी सवाल

इसके अलावा, हार्वर्ड अधिकारियों से शिनजियांग में उइगरों के साथ चीन के व्यवहार और कथित नरसंहार पर भी पूछताछ हुई. समिति के अनुसार, एक वरिष्ठ कंप्लायंस अधिकारी ने शुरुआत में जवाब देने में हिचक दिखाई, लेकिन कानूनी सलाह के बाद उन्होंने चीन पर उइगरों के खिलाफ नरसंहार के आरोप से असहमति नहीं जताई.

चीनी सेना से जुड़े संस्थानों के साथ रिसर्च सहयोग को लेकर भी अधिकारियों से सवाल किए गए. समिति के मुताबिक, एक अधिकारी ऐसे सहयोग की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर सके.

हार्वर्ड में रिसर्च सिक्योरिटी व्यवस्था बदलने की मांग

समितियों का निष्कर्ष है कि इन मामलों ने हार्वर्ड की रिसर्च सिक्योरिटी, विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और विदेशी संस्थानों की जांच-पड़ताल यानी ड्यू-डिलिजेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि विदेशी सहयोग से मिलने वाले अकादमिक या आर्थिक लाभ के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि ऐसे संबंध अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील रिसर्च के हितों को नुकसान न पहुंचाएं.

समितियों ने क्या मांग की?

रिपोर्ट में हार्वर्ड से रिसर्च सिक्योरिटी व्यवस्था को मजबूत करने, विदेशी संस्थाओं की जांच और ड्यू-डिलिजेंस प्रक्रिया सुधारने तथा विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने को कहा गया है. कांग्रेस से DETERRENT Act और Securing Innovation and Research from Adversaries (SIRA) Act पारित करने की सिफारिश की गई है. समितियों का कहना है कि इन कदमों से विदेशी फंडिंग की जानकारी ज्यादा पारदर्शी होगी और चीन जैसे विदेशी विरोधियों से अमेरिकी रिसर्च और इनोवेशन की बेहतर सुरक्षा की जा सकेगी.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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