Global Warming: यूरोप के 2 प्रमुख देश फ्रांस और स्पेन अब तक के इतिहास की सबसे भयानक दावानल (Wildfires) की चपेट में हैं. वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) के जलवायु वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह के अध्ययन में यह बात सामने आयी है. रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आपदा महज एक कुदरती संयोग नहीं, इंसानों द्वारा बढ़ाये जा रहे ग्लोबल वार्मिंग का सीधा परिणाम है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक सर्दियों के बाद आयी भीषण गर्मी और शुष्क वसंत ने जंगलों में वनस्पतियों की वृद्धि तो की, लेकिन बाद में लगातार आयी हीटवेव (Heatwaves) ने उन्हें पूरी तरह सुखाकर ‘बारूद का ढेर’ (Tinderbox) बना दिया. जैसे ही चिंगारी लगी, इन सूखे जंगलों में लगी आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया.
कितना बढ़ा जोखिम? रिसर्च के चौंकाने वाले आंकड़े
वैज्ञानिकों ने आग की तीव्रता और मौसम की परिस्थितियों को मापने के लिए ‘डेली सेवेरिटी रेटिंग’ (DSR) मीट्रिक का उपयोग किया. इस आधार पर पाया गया कि मध्य स्पेन में जलवायु परिवर्तन के कारण भीषण आग भड़कने की आशंका कम से कम 20 गुणा बढ़ गयी है. वर्तमान जलवायु में ऐसी घटना हर 6 साल में एक बार होने की आशंका है. दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में आग के अनुकूल चरम मौसम की स्थिति कम से कम दोगुणा अधिक संभावित हो गयी है. ऐसी स्थिति अब हर 20 साल में एक बार देखी जा सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये आंकड़े बेहद सतर्क और न्यूनतम अनुमान हैं, वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर हो सकती है.
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आबादी के करीब आग, 400 किमी दूर तक जहरीला धुआं
इंपीरियल कॉलेज लंदन की शोधकर्ता डॉ क्लेयर बार्न्स ने कहा कि ये आग किसी दूर-दराज के निर्जन जंगलों में नहीं, उन इलाकों के बेहद करीब लग रही है, जहां बड़ी आबादी रहती है.
‘फ्रेंच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल एनवायरमेंट एंड रिस्क’ के अगस्टिन कोलेट ने बताया कि इस आग ने वायुमंडल में खतरनाक प्रदूषक तत्वों का अंबार लगा दिया है. धुआं के कारण सूक्ष्म कणों (PM2.5) का स्तर यूरोप के स्वच्छ वायु मानकों से 20 गुणा ऊपर चला गया. 400 किलोमीटर दूर तक फैले इस जहरीले धुआं ने उन लोगों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है, जो पहले से ही हफ्तों की भीषण गर्मी झेल रहे थे.
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एक साथ कई मोर्चों पर आग से निपटने में नाकाम हो रहे देश
जर्मनी के हेल्महॉल्ट्ज सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल रिसर्च की जलवायु वैज्ञानिक एंड्रिया रिबेरो ने बताया कि जब एक साथ कई क्षेत्रों में भयंकर आग लगती है, तो देशों के लिए एक-दूसरे के साथ अग्निशमन संसाधन (Firefighting Resources) साझा करना असंभव हो जाता है.
संयुक्त राष्ट्र (UN) जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील्स ने इस तबाही पर कहा- जीवाश्म ईंधन का अंधाधुंध इस्तेमाल हमारी पृथ्वी को भट्टी की तरह तपा रहा है. अगर हमें ऐसी भयावह आपदाओं, महा-तूफानों और सूखे से बचना है, तो सभी देशों को कोयले, तेल और गैस से दूरी बनाकर नवीकरणीय ऊर्जा (Renewables) की ओर तेजी से बढ़ना होगा.
