बिना भारत के साथ बिजनेस किए, कनाडा एनर्जी सुपरपावर नहीं बन पाएगा, कनाडाई मंत्री किस ओर कर रहे इशारा?

India Canada Energy Trade: भारत और कनाडा के बीच ट्रेड आने वाले समय में बढ़ सकता है. विशेषकर एनर्जी सेक्टर में. कनाडा के ऊर्जा मंत्री ने हाल ही में भारत के एनर्जी वीक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अगर कनाडा को एनर्जी सुपरपावर बनना है तो उसे भारत के साथ व्यापार करना ही होगा. दोनों देशों के बीच व्यापार की बहुत संभावनाएं हैं.

India Canada Energy Trade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाकर कई देशों के बीच नजदीकी को पुश कर रहे हैं. उनका इरादा मेक अमेरिका ग्रेट अगेन पर है, लेकिन इसके उलट बाकी देशों के बीच ट्रेड डील बढ़ रही हैं. भारत-ईयू ट्रेड डील के बाद कनाडा के पीएम भारत आने वाले हैं. वह मार्च में इंडिया की यात्रा कर सकते हैं. हाल ही में वह चीन भी गए थे. इसी बीच, गोवा में हो रहे इंडिया एनर्जी वीक में पहुंचे कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन पहुंचे. उन्होंने इस दौरान कहा कि भारत तेजी से दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा बाजारों में शामिल होता जा रहा है. उनके मुताबिक, जब पूरी दुनिया में ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, तब कनाडा के लिए भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाना बेहद जरूरी है.

हॉजसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह दौरा कई मायनों में खास है. पहली बार कोई कनाडाई संघीय मंत्री इंडिया एनर्जी वीक में शामिल हुआ है और करीब आठ साल बाद कनाडा और भारत के बीच ऊर्जा क्षेत्र को लेकर औपचारिक बातचीत फिर से शुरू हुई है. उन्होंने साफ कहा कि अगर कनाडा खुद को ऊर्जा महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है, तो उसे भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ अपने प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा का व्यापार बढ़ाना ही होगा.

कनाडा की भारत के बाजार पर है नजर

कनाडाई मंत्री ने बताया कि आने वाले दस वर्षों में भारत में पारंपरिक ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत बहुत तेजी से बढ़ने वाली है. उनका अनुमान है कि यह बढ़ोतरी चीन और पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की कुल मांग से भी ज्यादा हो सकती है. उनके अनुसार, यह कनाडा के लिए बड़ा मौका है, खासकर तब जब वह अमेरिका के अलावा दूसरे देशों में भी अपना निर्यात बढ़ाना चाहता है.

उन्होंने कहा कि बढ़ती वैश्विक मांग और कनाडा की ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने की योजना, दोनों बातें इस ओर इशारा करती हैं कि भारत के साथ अभी से मजबूत साझेदारी बनानी चाहिए. यह दौरा कनाडा के प्रधानमंत्री की उस योजना से भी जुड़ा है, जिसमें अमेरिका के अलावा अन्य देशों को निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया है.

हॉजसन ने बताया कि कनाडा भारत को एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस), स्वच्छ ऊर्जा, यूरेनियम और अहम खनिज मुहैया कराने की दिशा में तैयारी कर रहा है. इसके लिए समुद्र में तैरते स्टोरेज टैंकों जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल भी एक विकल्प हो सकता है.

उन्होंने एक तरह से जोर देकर कहा कि असली मौका एलएनजी सप्लाई से जुड़ा है, खासकर जब गैस को सीधे स्टोरेज सुविधाओं तक पहुंचाया जा सके. उनके मुताबिक, इससे पारंपरिक ऊर्जा और साफ ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा और भारत की ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया को मदद मिलेगी.

अपने भारत दौरे के दौरान वह गोवा और दिल्ली में भारतीय सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के लोगों और कनाडाई कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे. मकसद है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोले जा सकें. 

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भारत-कनाडा के बीच व्यापार की कितनी संभावना है?

भारत और कनाडा के बीच दोतरफा वस्तु व्यापार 2024 में बढ़कर 13.3 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 9.7 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया. फिलहाल कनाडा के महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) निर्यात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1 प्रतिशत है, जिसे कनाडाई सरकार बड़े अवसर के संकेत के रूप में देखती है.

कनाडा के पास दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑयल सैंड्स भंडार हैं, फिर भी भारत को उसकी औसत आपूर्ति आम तौर पर 8,000 से 12,000 बैरल प्रतिदिन के बीच रहती है. भारत कनाडा से कच्चा तेल बहुत बड़ी मात्रा में नहीं, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ती मात्रा में खरीद रहा है. 

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत ने कनाडा से करीब 97.78 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल तेल आयात का छोटा हिस्सा है. कुछ समय ऐसे भी रहे जब आपूर्ति बढ़कर लगभग 1.42 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई.

इसके बावजूद, रूस और मध्य-पूर्वी देशों की तुलना में कनाडा अभी भारत के लिए छोटा ऊर्जा साझेदार बना हुआ है. 2024 में ही भारत ने कनाडा से खनिज ईंधन (जिसमें कोयला भी शामिल है) का कुल आयात लगभग 6.26 अरब डॉलर दर्ज किया गया. 

कनाडा एशिया, खासकर भारत, में अपना ऊर्जा निर्यात बढ़ाना चाहता है, जबकि भारत अपनी बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सप्लाई के नए और भरोसेमंद स्रोतों की तलाश में है. कनाडा ने जून 2025 से एशिया को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का निर्यात शुरू किया है. 

इसके अलावा, उसके एलपीजी टर्मिनल्स से भारत तक समुद्री मार्ग अपेक्षाकृत छोटे हैं, जिससे आपूर्ति आसान हो सकती है. ट्रांस माउंटेन पाइपलाइन के विस्तार से कनाडाई कच्चे तेल को भारत भेजने का सीधा रास्ता भी खुला है. हालांकि अभी भी भारत जाने वाला अधिकांश कनाडाई तेल अमेरिकी गल्फ कोस्ट के रास्ते ही भेजा जाता है.

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कार्नी की यात्रा के बाद भड़के ट्रंप

इस साल कार्नी की भारत यात्रा उनके हालिया चीन दौरे के बाद होगी. बीजिंग में उन्होंने और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आपसी टैरिफ बाधाओं को कम करने पर सहमति जताई थी. इस कदम के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा चीन के साथ कोई समझौता करता है तो वह कनाडाई सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार कर सकते हैं. हालांकि, कार्नी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा चीन के साथ किसी मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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