Brazil LGBTQ community celebrates Jair Bolsonaro Imprisonment: ब्राजील के रियो डी जेनेरियो की विश्व प्रसिद्ध ‘प्राइड परेड’ इस वर्ष एक अलग ही ऊर्जा और राजनीतिक स्वर लिए हुए दिखाई दी. रविवार को कोपाकबाना बीच के बोर्डवॉक पर हजारों की संख्या में एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्य और समर्थक एकत्र हुए. यह इस देश में 30वां प्राइड परेड है. इस बार परेड केवल अधिकारों और समानता की मांग का प्रतीक भर नहीं थी, बल्कि इसमें ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को एक दिन पहले एहतियाती तौर पर जेल भेजे जाने का खुला जश्न भी शामिल था. परेड स्थल पर लोग रंग-बिरंगे परिधानों में नाचते, गाते, और नारे लगाते हुए नजर आए, जिससे वातावरण राजनीतिक और उत्सवी दोनों तरह की भावनाओं से भरा हुआ था.
परेड में कई बड़े ट्रक लगाए गए थे जिन पर प्रदर्शनकारी सवार होकर भीड़ को संबोधित कर रहे थे. हवा में गूंजते नारे “वह जेल में हैं!” और “बोल्सोनारो बाहर जाओ!” स्पष्ट संकेत दे रहे थे कि समुदाय का एक बड़ा हिस्सा बोल्सोनारो की गिरफ्तारी को नफरत और भेदभाव के खिलाफ जीत मान रहा है. बोल्सोनारो अपने राजनीतिक करियर के दौरान अक्सर समलैंगिक-विरोधी टिप्पणियों के लिए आलोचना के घेरे में रहे हैं. एक समय उन्होंने खुद को प्राउड होमोफोब कहा था और यहां तक कह दिया था कि “एक समलैंगिक बेटा होने से बेहतर है कि उनका बेटा न हो.” ऐसी टिप्पणियों ने ब्राजील के एलजीबीटीक्यू समुदाय में गहरी चोट पहुंचाई, जिसकी झलक वर्षों से विरोध प्रदर्शनों में दिखती रही है.
लोगों ने जताई खुशी
कोपाकबाना परेड में शामिल कला, थिएटर और नृत्य की युवा प्रोफेसर एमी माटेयस सैंटोस (25) ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यह बहुत बड़ी राहत और खुशी की बात है. इससे यह साबित होता है कि नफरत के खिलाफ लड़ाई बेकार नहीं जाती. हम जैसे लोगों के लिए भी एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य संभव है.” एमी जैसे कई लोग मानते हैं कि बोल्सोनारो की गिरफ्तारी केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक जीत है, एक ऐसा संदेश जो भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करता है.
बोल्सोनारो को क्यों हुई सजा?
बोल्सोनारो को पिछले महीने 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. आरोप था कि उन्होंने 2022 के चुनाव में हार के बाद सत्ता पर काबिज रहने के लिए तख्तापलट की कोशिश की. वह अब तक घर में नजरबंद थे. लेकिन शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एलेक्जांद्रे दे मोराइस ने उन्हें एहतियाती हिरासत में भेजने का आदेश दिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि 70 वर्षीय नेता देश छोड़कर भागने की कोशिश कर सकते हैं. इस आदेश ने ब्राजील की राजनीति में हलचल तेज कर दी.
परेड में शामिल कई प्रतिभागियों ने ‘नो एमनेस्टी!’ (कोई माफी नहीं) लिखे हुए स्टिकर लगाए थे. यह संदेश उस विवादित विधेयक के विरोध में था जिसे बोल्सोनारो के समर्थक कांग्रेस में लाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि तख्तापलट में शामिल अपराधियों की सजा में कमी लाई जा सके. एलजीबीटीक्यू समुदाय और कई मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे लोकतंत्र के लिए खतरा मानते हैं.
भाषा के इनपुट के साथ.
ये भी पढ़ें:-
खुद की मौत नहीं मांग सकते, इस देश की जनता ने खारिज की इच्छामृत्यु, रेफरेंडम में हुई ‘करुणा की जीत’
