Bangladesh News: क्या बदलेगा बांग्लादेश का राष्ट्रगान? भारत पर ठीकरा फोड़ते हुए उठी ये मांग

Bangladesh News: धार्मिक मामलों के सलाहकार ने कहा कि बांग्लादेश के राष्ट्रगान को बदलने की कोई योजना नहीं है. जानें क्यों उठा ये विवाद

Bangladesh News: बांग्लादेश के राष्ट्रगान को लेकर विवाद छिड़ गया है. 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में अब राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ को बदलने की मांग की जा रही है. कट्टरपंथी इसे मुद्दा बना रहे हैं. जमात-ए-इस्लामी के पूर्व अमीर गुलाम आजम के बेटे अब्दुल्लाहिल अमान आजमी ने राष्ट्रगान और संविधान में बदलाव की मांग की जिसपर अंतरिम सरकार की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है.

देश के राष्ट्रगान को बदलने का कोई प्लान नहीं : खालिद हुसैन

बांग्लादेश के धार्मिक मामलों के सलाहकार ए.एफ.एम. खालिद हुसैन ने कहा है कि देश के राष्ट्रगान को बदलने का कोई प्लान नहीं है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार कुछ भी ऐसा नहीं करेगी, जिससे किसी भी तरह का विवाद पैदा हो. उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ मदरसे के छात्र भी दुर्गा पूजा के दौरान किसी भी हमले या तोड़फोड़ से मंदिरों की सुरक्षा करेंगे.

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किसने लिखा राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’?

बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ प्रसिद्ध बंगाली रचनाकार रवीन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा लिखा गया था. अमान आजमी ने इसी हफ्ते की शुरूआत में कहा था कि हमारा वर्तमान राष्ट्रगान हमारे स्वतंत्र बांग्लादेश के अस्तित्व से मैच नहीं खाता है. यह बंगाल विभाजन और दो बंगालों के विलय के वक्त को दर्शाता है. दो बंगालों को एकजुट करने के लिए बनाया गया राष्ट्रगान एक स्वतंत्र बांग्लादेश का राष्ट्रगान कैसे हो सकता है. राष्ट्रगान को 1971 में भारत द्वारा थोप दिया गया था.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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