ऐनी फ्रैंक की सौतेली बहन ईवा श्लॉस का निधन, यातना शिविर में बंद हुआ था पूरा परिवार, अंत में केवल मां-बेटी बचीं

Anne Frank’s stepsister Eva Schloss passed away: ईवा श्लॉस किशोरावस्था में डायरी लिखने वाली ऐनी फ्रैंक की वह सौतेली बहन थीं. यातना शिविर की जीवित बची पीड़िता और होलोकॉस्ट की सशक्त गवाह ईवा का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है.

Anne Frank’s stepsister Eva Schloss passed away: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी द्वारा किए गए होलोकॉस्ट की त्रासदी ने मानवता को गहरे जख्म दिए, जिनकी गूंज आज भी दुनिया सुनती है. इस अमानवीय दौर की भयावहता को शब्दों में ढालने और आने वाली पीढ़ियों को चेतावनी देने का काम उन लोगों ने किया, जो खुद उस नरक से जीवित लौटे. ऐसी ही एक सशक्त आवाज थीं ईवा श्लॉस ऑशविट्ज यातना शिविर की पीड़िता और ऐनी फ्रैंक की सौतेली बहन, जिनका जीवन स्मृति, संघर्ष और मानवीय मूल्यों की रक्षा की मिसाल बन गया. उसी ऑशविट्ज यातना शिविर की जीवित बची पीड़िता और होलोकॉस्ट की सशक्त गवाह ईवा श्लॉस का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. 

ईवा श्लॉस किशोरावस्था में डायरी लिखने वाली ऐनी फ्रैंक की वह सौतेली बहन थीं. उनके निधन की पुष्टि ‘ऐनी फ्रैंक ट्रस्ट यूके’ ने की है. ट्रस्ट के अनुसार, ईवा श्लॉस का शनिवार को लंदन में निधन हुआ, जहां वह लंबे समय से रह रही थीं. ईवा श्लॉस ने अपना पूरा जीवन होलोकॉस्ट की भयावह सच्चाइयों के बारे में लोगों, खासकर युवा पीढ़ी, को जागरूक करने में समर्पित कर दिया. वह ‘ऐनी फ्रैंक ट्रस्ट यूके’ की मानद अध्यक्ष भी थीं. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी द्वारा किए गए होलोकॉस्ट में करीब 60 लाख यहूदियों के साथ-साथ रोमा समुदाय, दिव्यांग, समलैंगिक, राजनीतिक विरोधियों और अन्य अल्पसंख्यकों को यातना शिविरों और गैस चैंबरों में मौत के घाट उतार दिया गया था.

एनी फ्रैंक ने अपनी डायरी से दी दुनिया को बड़ी सीख

ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय ने ईवा श्लॉस के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उन्हें जानने का अवसर मिलना उनके लिए “सौभाग्य और गर्व” की बात थी. उन्होंने कहा कि कम उम्र में जिन अमानवीय अत्याचारों से श्लॉस को गुजरना पड़ा, उनकी कल्पना करना भी कठिन है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना शेष जीवन नफरत और भेदभाव के खिलाफ लड़ने में लगा दिया. उनके अनुसार, ईवा दयालुता, साहस, समझ और मानसिक मजबूती की मिसाल थीं.

ईवा श्लॉस का जन्म 1929 में वियना में ईवा गाइरिंगर के रूप में हुआ था. नाजी जर्मनी द्वारा ऑस्ट्रिया पर कब्जा किए जाने के बाद वह अपने परिवार के साथ एम्सटर्डम चली गईं. वहीं उनकी दोस्ती अपनी ही उम्र की यहूदी लड़की ऐनी फ्रैंक से हुई, जिसकी डायरी आगे चलकर होलोकॉस्ट का सबसे प्रसिद्ध दस्तावेज बनी. फ्रैंक परिवार की तरह ही ईवा का परिवार भी नाजियों से बचने के लिए करीब दो साल तक छिपकर रहा, लेकिन अंततः उन्हें धोखा दिया गया और गिरफ्तार कर ऑशविट्ज मृत्यु शिविर भेज दिया गया.

ऑशविट्ज में ईवा श्लॉस और उनकी मां फ्रिट्जी 1945 में सोवियत सैनिकों द्वारा शिविर मुक्त किए जाने तक जीवित रहीं, लेकिन उनके पिता एरिख और भाई हाइंज की वहीं मौत हो गई. युद्ध समाप्त होने के बाद ईवा ब्रिटेन चली गईं, जहां उन्होंने जर्मन यहूदी शरणार्थी ज्वी श्लॉस से विवाह किया और लंदन में बस गईं. वर्ष 1953 में उनकी मां ने ऐनी फ्रैंक के पिता ओटो फ्रैंक से शादी की, जो अपने निकट परिवार में होलोकॉस्ट से बचने वाले इकलौते व्यक्ति थे. ऐनी फ्रैंक की मृत्यु युद्ध खत्म होने से कुछ महीने पहले, 15 वर्ष की उम्र में, बर्गेन-बेल्सन यातना शिविर में टाइफस से हो गई थी.

ईवा श्लॉस ने कई दशकों तक अपने अनुभवों के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा. बाद में उन्होंने बताया कि युद्ध के गहरे मानसिक आघात के कारण वह अंतर्मुखी हो गई थीं और लोगों से जुड़ नहीं पाती थीं. 2004 में एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा था कि वह वर्षों तक चुप रहीं, पहले इसलिए क्योंकि बोलने की इजाजत नहीं थी और बाद में इसलिए क्योंकि उन्होंने सब कुछ अपने भीतर दबा लिया था. वह दुनिया से नाराज थीं.

हालांकि, 1986 में लंदन में ऐनी फ्रैंक प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान भाषण देने के बाद उनका नजरिया बदला. इसके बाद उन्होंने नाजी नरसंहार के बारे में जागरूकता फैलाना अपना जीवन-लक्ष्य बना लिया. आने वाले वर्षों में उन्होंने स्कूलों, जेलों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने अनुभव साझा किए और ‘ईवाज स्टोरी: ए सर्वाइवर्स टेल बाय द स्टेपसिस्टर ऑफ ऐनी फ्रैंक’ सहित कई पुस्तकों के जरिए अपनी आपबीती दुनिया के सामने रखी.

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