स्टार्टअप के लिए इस्राइल से बहुत कुछ सीख सकता है भारत

यरुशलम: अगर भारत देश को ‘स्टार्टअप’ देश के रुप में स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को पूरा करना चाहता है तो वह इस्राइल से बहुत कुछ सीख सकता है. इस्राइल को ही मूल रुप से ‘ स्टार्टअप’ यानी नई कंपनियों का देश कहा जाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस […]

यरुशलम: अगर भारत देश को ‘स्टार्टअप’ देश के रुप में स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को पूरा करना चाहता है तो वह इस्राइल से बहुत कुछ सीख सकता है. इस्राइल को ही मूल रुप से ‘ स्टार्टअप’ यानी नई कंपनियों का देश कहा जाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में भारत को ‘स्टार्टअप’ देश बनाने का आह्वान किया था.

क्या भारत इस आह्वान को अमली जामा पहना पाएगा, यह पूछे जाने पर इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने कहा,‘ जहां तक ‘स्टार्टअप देश’ का सवाल है तो मेरी राय में यह बहुत कुछ उद्यमिता भावना पर निर्भर करता है. मैंने देखा कि सिलिकन वैली (अमेरिका) में आपको भारतीय भाषा सुनाई देगी, आपको हिब्रू सुनाई देगी और कभी कभी अंग्रेजी सुनाई देगी, इसका मतलब है कि बहुत कुछ घटित हो रहा है. दोनों ही देशों में उद्यमों के लिए काफी भावना है.’ नेतनयाहू ने कहा कि उन्हें भारत-इस्राइल संबंधों से ‘काफी’ उम्मीदे हैं और वे ‘ प्रधानमंत्री मोदी से एक बार फिर सितंबर में संयुक्त राष्ट्र में मिलने को आतुर हैं.’
उल्लेखनीय है कि आकार में अपेक्षाकृत छोटा इस्राइल ‘स्टार्टअप’ कंपनियों का घर माना जाता है. यहां औसतन हर दिन दो नई यानी स्टार्टअप कंपनियां शुरु होती हैं. इस समय यहां लगभग 5000 स्टार्टअप हैं.

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