अगर विदेश में चहते हैं एडमिशन लेना, तो पहले जुटाएं ये जानकारियां

देश में बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का सपना देखते हैं. विदेशी संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया, कोर्सेज और तैयारी को लेकर छात्रों के जेहन में कई प्रकार के सवाल होते हैं. दरअसल, विदेशी संस्थानों में प्रवेश से पहले हमें कई चरणों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है. इस बार […]

देश में बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का सपना देखते हैं. विदेशी संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया, कोर्सेज और तैयारी को लेकर छात्रों के जेहन में कई प्रकार के सवाल होते हैं. दरअसल, विदेशी संस्थानों में प्रवेश से पहले हमें कई चरणों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है. इस बार जानते हैं उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने से जुड़ी खास जानकारियों के बारे में…
विनीत उत्पल
विदेशी संस्थानों में पढ़ने और डिग्री पाने की ललक रखनेवाले छात्रों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. ऐसे में सवाल यह है कि विदेश में एडमिशन पाने की प्रक्रिया क्या है, आर्थिक मदद कहां से मिलेगी.
चूंकि, विदेश में रहकर पढ़ाई के दौरान छात्रों को आर्थिक और मानसिक तौर पर कई बड़े फैसले लेने पड़ते हैं, इसलिए इस मामले में सही समय पर सही फैसला लेना जरूरी होता है. आमतौर पर विदेशी संस्थानों में प्रवेश की प्रक्रिया सत्र शुरू होने के कम-से-कम दस महीने पहले शुरू कर देनी चाहिए, जिससे विश्वविद्यालयों में प्रवेश की आखिरी तिथि से पहले प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो सके. वैसे व्यक्तिगत स्तर पर तमाम प्रक्रिया 18 महीने पहले शुरू कर देनी चाहिए, जिससे विदेश में पढ़ने जाने की प्लानिंग सही तरीके से की जा सके. कोर्स में प्रवेश पाने से पहले छात्रों का पर्सनल स्टेटमेंट और शिक्षकों के रिकमेंडेशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होती है. संस्थान या विश्वविद्यालय की वेबसाइट को लगातार चेक करते रहना चाहिए, जिससे आवश्यक जानकारियों से आप अपडेट हो सकें.
देश, कोर्स और संस्थान का करें चुनाव
पढ़ाई करने के लिए विदेश जाना कोई बड़ी बात नहीं है, चूंकि पूरी प्रक्रिया में समय लगता है, इसलिए यह काम थोड़ा चुनौतीपूर्ण है. आज के समय में छात्रों को यूके, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, अमेरिका और चीन के कई प्रतिष्ठित संस्थान आकर्षित करते हैं. सबसे पहले इस बात का फैसला करें कि आप किस देश में पढ़ाई करना चाहते हैं और वहां किस तरह के कोर्स में आप प्रवेश लेंगे. इसके बाद संबंधित कोर्स संचालित करनेवाले संस्थान कि लिस्ट बनायें और चुनाव करें कि कौन-सा संस्थान किस स्तर का है, फीस के तुलना करें और देखें कि कहां प्रवेश लेना सही रहेगा. इसके लिए व्यक्तिगत, अकादमिक और फाइनेंशियल स्तर से सभी मामलों को देखें.
अंग्रेजी टेस्ट की तैयारी करें
विदेश में पढ़ने जाने से पहले अंग्रेजी भाषा की पात्रता परीक्षा देनी होती है. इसी के आधार पर कई विदेशी संस्थान छात्रों को प्रवेश देते हैं. विभिन्न संस्थान छह तरह के टेस्ट को मान्यता देते हैं. इनमें से इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आईईएलटीएस), टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज (टॉफेल), ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (जी-मैट), ग्रेजुएट रिकॉर्ड एडमिशन (जीआरई), स्कॉलैस्टिक एडमिशन टेस्ट (सैट) के अलावा पीटीई नामक टेस्ट है.
इन टेस्टों में आईईएलटीएस को ब्रिटिश काउंसिल, आईडीपी-ऑस्ट्रेलिया और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी मिलकर आयोजित करता है. पीटीई को ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका जैसे देशों के करीब तीन हजार से अधिक संस्थानों ने मान्यता प्रदान की है. जी-मैट के स्कोर के आधार पर दुनियाभर के करीब तीन हजार ग्रेजुएट मैनेजमेंट संस्थाओं में प्रवेश मिल सकता है.
कहां से मिलेगी आर्थिक मदद
जो छात्र विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं, उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि वहां पढ़ाई के साथ-साथ रहने-खाने में भी आपको या आपके परिवार को ही खर्च करना होगा. वहां आपके साथ न तो परिवार का कोई सदस्य होगा और न ही परिचित. ऐसे में आपको अपना खर्च सीमित रखना होगा.
इस स्थिति में इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपको कोई स्कॉलरशिप या वीजा और फाइनेंस असिस्टेंस मिल जाये, जिससे वहां आर्थिंक संकट का सामना न करना पड़े. जिन छात्रों का अकादमिक बैकग्राउंड अच्छा होता है, उन्हें आर्थिक मदद के लिए कई संस्थाएं सामने आती हैं. शेवनिंग यूके गवर्नमेंट स्कालरशिप, टाटा स्कॉलरशिप, फुलब्राइट-नेहरू मास्टर्स फेलोशिप, रॉयल सोसाइटी ग्रांट, कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप, ब्रिटिश काउंसिल स्कॉलरशिप के अलावा भी भारत सरकार विदेश में पढ़ने और रिसर्च करने के लिए फंड मुहैया कराती है.
महत्वूर्ण बातों का ध्यान रखें
किसी भी देश के कम-से-कम तीन विश्वविद्यालयों में आवेदन करें, भले ही उनके लोकेशन अलग-अलग हों. वहां योग्यता के लिए किन-किन अकादमिक कागजातों की जरूरत है, उनकी जानकारी रखें.
यदि कहीं किसी मामले को समझने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा हो, तो संबंधित विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल स्टूडेंट डिपार्टमेंट से संपर्क करें. छात्र खुद भी संबंधित विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर जाकर संबंधित डॉक्यूमेंट जमा कर सकते हैं.
आपको खुद मोटिवेशनल लेटर लिखना होगा, जिसमें यह बताना होगा कि आप क्यों यह कोर्स करना चाहते हैं, और उस संस्थान में क्यों पढ़ाई करना चाहते हैं. अपने पेपरवर्क में सावधानी बरतें और उसे ऑफिशियली भाषा में अनुवाद कर जमा करें. कई संस्थाएं या काउंसलर अपने यहां मुफ्त में काउंसिलिंग की व्यवस्था आयोजित करते है. वहां जाकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
ये हैं महत्वपूर्ण देश
बेल्जियम, इटली, पोलैंड, यूके, फिनलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, डेनमार्क, नीदरलैंड, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, कनाडा, यूएस, चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >