VIDEO: ये आम है आमों का राजा, भारत में कुछ ही लोगों में है खरीदने की क्षमता, कीमत सुनकर रह जायेंगे दंग

अगर आपको लगता है कि हापुस आम बहुत महंगा होता है, तो आपको आज हम जिस आम के बारे में बताने जा रहे हैं, वो उसका भी बाप है. हापुस सैकड़ों रुपये में बिकता है, तो ये आम लाखों रुपये में बिकता है.

आम को फलों का राजा कहा जाता है. लेकिन, एक आम ऐसा है, जिसे आमों का राजा कह सकते हैं. इस आम को कोई आम आदमी नहीं खरीद सकता. मिडिल क्लास फैमिली के लोग भी नहीं खरीद सकते. अगर आपको लगता है कि हापुस आम बहुत महंगा होता है, तो आपको आज हम जिस आम के बारे में बताने जा रहे हैं, वो उसका भी बाप है. हापुस सैकड़ों रुपये में बिकता है, तो ये आम लाखों रुपये में बिकता है. ओडिशा के कालाहांडी जिले के एक शिक्षक ने भी अपने बगीचे में इस बेशकीमती आम को लगाया है. इस आम की कीमत 2 से 3 लाख रुपये प्रति किलो है. जी हां. सही सुना आपने. हम मियांजाकी आम की ही बात कर रहे हैं. यह आम जापानी ब्रीड का है. कालाहांडी में पेशे से शिक्षक भोई ने इसका पौधा लगाया और उससे अब उन्हें आम मिलने लगे हैं. हालांकि, अभी तक भोई ने किसी को यह नहीं बताया है कि उनके बगीचे में कितने आम फले हैं और उसकी कीमत कितनी है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने मियांजाकी आम के पेड़ का वीडियो माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर शेयर किया है. इसमें दिख रहा है कि कई आम फले हैं. इस वीडियो में भोई कहीं नजर नहीं आ रहे. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि दो आम की कीमत साढ़े आठ हजार रुपये से ढाई लाख रुपये तक होती है. यह स्वाद में तो विशिष्ट है ही, इसका इस्तेमाल औषधि के रूप में भी किया जाता है. भोई के बगीचे में आम की कई और किस्में भी हैं. लेकिन, मियांजाकी ने उन्हें ओडिशा में प्रसिद्ध कर दिया है. मियांजाकी आम की जापानी किस्म है. विदेशों में इसकी जबर्दस्त मांग है, क्योंकि इसका स्वाद लाजवाब है. इसमें कई औषधीय गुण पाये जाते हैं. जापानियों की मानें, तो विश्व के इस सबसे महंगे आम का नाम ‘टायो नो टोमागो’ है. इसका अर्थ होता है – सूरज का अंडा. मियांजाकी इलाके में इसकी खेती होती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >