बंगाल यात्रा के दूसरे दिन अमित शाह ने कहां किया भोजन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी पश्चिम बंगाल यात्रा के दूसरे दिन कोलकाता के उत्तर में स्थित बागुईहाटी में भोजन किया. यहां सबसे पहले अमित शाह मतुआ समुदाय के एक मंदिर में गये और वहां कुछ समय बिताया. इसके बाद वह मतुआ समुदाय के एक सदस्य के घर गये और वहीं पर दोपहर का भोजन किया. जिसके घर में श्री शाह ने भोजन किया, उसका नाम नवीन विश्वास है.

कोलकाता : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी पश्चिम बंगाल यात्रा के दूसरे दिन कोलकाता के उत्तर में स्थित बागुईहाटी में भोजन किया. यहां सबसे पहले अमित शाह मतुआ समुदाय के एक मंदिर में गये और वहां कुछ समय बिताया. इसके बाद वह मतुआ समुदाय के एक सदस्य के घर गये और वहीं पर दोपहर का भोजन किया. जिसके घर में श्री शाह ने भोजन किया, उसका नाम नवीन विश्वास है.

इस समय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी अमित शाह के साथ थे. ये सभी लोग बागुईहाटी स्थित गौरांगनगर क्षेत्र में नवीन विश्वास के दो मंजिला मकान में फर्श पर बैठकर दोपहर का भोजन किया. भाजपा के वरिष्ठ नेता को एक थाली में केले के पत्ते पर शाकाहारी बंगाली भोजन परोसा गया.

पार्टी सूत्रों ने बताया कि रोटी, छोलार (चना) दाल, चावल, शुक्तो (प्रसिद्ध बंगाली व्यंजन), मूंग दाल, तले हुए बैंगन एवं चटनी परोसे गये. नवीन विश्वास के परिवार के सभी 6 लोगों ने श्री शाह के साथ खाना खाया. शाह के दौरे के पहले एहतियाती तौर पर नवीन विश्वास ने अपने परिवार के पांच अन्य सदस्यों के साथ कोविड-19 की जांच करायी थी. नवीन ने कहा, ‘अपने घर में केंद्रीय गृह मंत्री की मेजबानी कर मैं बहुत खुश हूं.’

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भाजपा नेता के दौरे के मद्देनजर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी और उनके पहुंचने के पहले सारी दुकानों को बंद करा दिया गया. पार्टी सूत्रों ने बताया कि भोजन के बाद शाह ने परिवार के सदस्यों तथा इलाके में रह रहे मतुआ समुदाय के दूसरे सदस्यों के साथ बातचीत की. अगले साल अप्रैल-मई में राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी के संगठनात्मक कार्यों का जायजा लेने के लिए शाह प्रदेश के दो दिनों के दौरे पर हैं.

राज्य में शुक्रवार को उनके दौरे का अंतिम दिन था. कृषि से जुड़े मतुआ समुदाय की आबादी पश्चिम बंगाल में तीन करोड़ से अधिक है और राज्य की ध्रुवीकृत राजनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है. समुदाय का इतिहास पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) से जुड़ा है.

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पूर्वी बंगाल के बंटवारे और बांग्लादेश बनने के बाद समुदाय के कई लोग आये और पश्चिम बंगाल के उत्तरी और दक्षिण 24 परगना, नदिया, मालदा और कूचबिहार जिलों में बस गये. राजनीतिक रूप से समुदाय के अधिकतर सदस्यों को तृणमूल कांग्रेस के समर्थक के तौर पर देखा जाता है.

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Posted By : Mithilesh Jha

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