Virtual RAM क्या है और क्या यह सच में किसी काम आता है? यहां समझें पूरी बात

What Is Virtual RAM - बहुत सारे ऐप्स को ओपन करने की वजह से स्मार्टफोन की रैम कम होने लगती है और फिर नये ऐप्स तेजी से खुल नहीं पाते. इस परेशानी को दूर करने के लिए वर्चुअल रैम का कंसेप्ट आया.

Virtual RAM Use: स्मार्टफोन बनाने और बेचनेवाली कई कंपनियां अपने हैंडसेट्स में वर्चुअल रैम (Virtual RAM) होने का दावा करती हैं. आजकल इसका इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है, लेकिन क्या आपको पता है कि वर्चुअल रैम क्या है और यह कैसे काम करता है? मोटे तौर पर कहें कि वर्चुअल रैम कंप्यूटर सिस्टम के प्रदर्शन को बढ़ाने में मदद करता है.

जब हम किसी प्रोग्राम या ऐप्लिकेशन का उपयोग करते हैं, तो उसे RAM (रैंडम ऐक्सेस मेमोरी) में स्थान देना आवश्यक होता है. लेकिन जब कभी रैंडम ऐक्सेस मेमोरी फुल हो जाती है, तो कंप्यूटर वर्चुअल रैम का इस्तेमाल किया जाता है.

Virtual RAM क्या होता है?

वर्चुअल रैम एक ऐसी तकनीक है, जो कंप्यूटर के लिए अतिरिक्त मेमोरी प्रदान करती है. यह वर्चुअल मेमोरी के लिए जगह बनाने के लिए, डिवाइस के हार्ड डिस्क में एक भाग को रिजर्व रखती है और जरूरत पड़ने पर उस भाग को रैंडम ऐक्सेस मेमोरी के रूप में इस्तेमाल करता है. किसी प्रोग्राम को और ज्यादा मेमोरी की जरूरत होती है, तो वर्चुअल रैम डिवाइस में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होती है और इसका इस्तेमाल कर प्रोग्राम को जगह दी जाती है.

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वर्चुअल रैम कैसे काम करता है?

वर्चुअल रैम का काम डिवाइस द्वारा किया जाता है. जब कंप्यूटर पर कोई प्रोग्राम चलता है और ज्यादा रैम की जरूरत पड़ती है, तो डिवाइस सिस्टम की स्पेसिफाइड क्वॉलिटी को सर्टिफाई करने के लिए वर्चुअल मेमोरी का इस्तेमाल करता है. जब रैम में पर्याप्त जगह नहीं होती है, तो पेज फाइल का इस्तेमाल कर एक्स्ट्रा डेटा को वर्चुअल रैम हार्ड डिस्क पर ट्रांसफर करती है. इस प्रॉसेस के जरिये कंप्यूटर अधिक डेटा और प्रोग्राम्स को ऑपरेशन करने में सक्षम होता है.

वर्चुअल रैम को आसान भाषा में समझें

आसान भाषा में कहें, तो बहुत सारे ऐप्स को ओपन करने की वजह से स्मार्टफोन की रैम कम होने लगती है और फिर नये ऐप्स तेजी से खुल नहीं पाते. इस परेशानी को दूर करने के लिए वर्चुअल रैम का कंसेप्ट आया. वर्चुअल रैम स्मार्टफोन का एक फीचर है, जिसमें फोन के इंटरनल स्टोरेज का कुछ हिस्सा, रैम के तौर पर रिजर्व कर दिया जाता है. मान लीजिए कि आपके फोन की स्टोरेज 64GB है, तो 4GB वर्चुअल रैम लेने के बाद यह 60GB हो जाएगी.

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अब जब स्मार्टफोन की फिजिकल रैम फुल हो जाएगी, तो वर्चुअल रैम नये ऐप के लिए जगह बनाएगा. इससे होगा यह कि जो ऐप पहले से डिवाइस में मौजूद हैं, उनमें से एक ऐप फिजिकल रैम से वर्चुअल रैम में शिफ्ट हो जाएगा और आप नया ऐप तेजी से खोल पाएंगे. फिजिकल रैम से कौन-सा ऐप वर्चुअल रैम में शिफ्ट होगा, यह तय करने का काम मोबाइल फोन का है.

क्या फोन को फास्ट बनाता है वर्चुअल रैम?

वर्चुअल रैम का कंसेप्ट कंपनियां बजट स्मार्टफोन के लिए लायी है और इनमें वे कुछ हद तक कामयाब है. लेकिन यह बात साफ तौर पर समझ ली जानी चाहिए कि वर्चुअल रैम, फिजिकल रैम की तरह फास्ट नहीं होती और गूगल ने भी यह बात अपने डेवलपर पेज पर कही है कि वर्चुअल रैम फोन के इंटरनल स्टोरेज की लाइफ कम कर सकती है क्योंकि यह रीड एंड राइट के लिए नहीं बना है. कुल मिलाकर कह सकते हैं कि वर्चुअल रैम बजट फोन के लिए ठीक है, लेकिन ज्यादा फिजिकल रैम वाला फोन लेना ही बेहतर है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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