Uttarakhand: कमरा नहीं दिया तो 'दबंग' बना थाना प्रभारी, रिजॉर्ट मालिक को किया गिरफ्तार

एक रिजॉर्ट के मालिक को गिरफ्तार करने वाले थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है और पुलिस विभाग की तरफ से जांच भी शुरू कर दी गई है. यह मामला है उत्तराखंड के नैनीताल जिले का, जहां कॉर्बेट टाइगर में एक आलीशान रिजॉर्ट पर कथित रूप से छापा मारा और रिज़ॉर्ट मालिक को गिरफ्तार कर लिया.

Uttarakhand: एक रिजॉर्ट के मालिक को गिरफ्तार करने वाले थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है और पुलिस विभाग की तरफ से जांच भी शुरू कर दी गई है. यह मामला है उत्तराखंड के नैनीताल जिले का, जहां कॉर्बेट टाइगर में एक आलीशान रिजॉर्ट पर कथित रूप से छापा मारा और बिना किसी पूर्व नोटिस या चालान के उन्हें गिरफ्तार कर लिया. आइए जानते है पूरा मामला कि आखिर क्यों हुई रिजॉर्ट के मालिक की गिरफ्तारी और क्या है थाना प्रभारी को निलंबित करने और विभागीय जांच करने के पीछे का कारण?

थाना प्रभारी अरुण सैनी निलंबित

कुमाऊं रेंज के पुलिस महानिरीक्षक योगेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को नैनीताल जिले के रामनगर थाना प्रभारी अरुण सैनी को निलंबित कर दिया और कॉर्बेट टाइगर में एक आलीशान रिजॉर्ट पर कथित रूप से छापा मारने के लिए पुलिस अधिकारी के खिलाफ एक अवमानना याचिका उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. थाना प्रभारी द्वारा उत्पाद अधिनियम का उल्लंघन कर शादी में मेहमानों को शराब परोसने के आरोप में रिजॉर्ट के मालिक को गिरफ्तार किया गया था.

डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह) को पेश होने का निर्देश

अवमानना याचिका की जानकारी दें तो इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह) को मंगलवार को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया है. जानकारी हो कि रिजॉर्ट मालिक ने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी के खिलाफ ‘अवमानना ​​मामला’ दायर किया है. साथ ही रिजॉर्ट मालिक का यह भी कहना है कि टाइगर कैंप रिजॉर्ट में छापेमारी प्रतिशोध के रूप में की गई थी.

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बदले की भावना से हुई कार्रवाई!

उन्होंने कहा है कि रिजॉर्ट के मालिक राजीव साह ने पुलिस थाना प्रभारी को मुफ्त कमरे देने से मना कर दिया था इसीलिए ऐसी कार्रवाई की गई है. जानकारी यह भी हो कि 29 नवंबर को यह छापेमारी की गई और राजीव शाह को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद उसने पूरी रात लॉकअप में ही गुजारी फिर अगले दिन उनकी जमानत हुई. राजीव साह ने कहा कि वह अधिकारियों को कमरे उपलब्ध कराने में असमर्थ थे क्योंकि पूरा रिजॉर्ट एक शादी के लिए बुक था. शादी खत्म होने के तुरंत बाद, पुलिस ने रिजॉर्ट पर छापा मारा और 10 खाली और एक आधी भरी शराब की बोतलें मिलीं.

प्रोटोकॉल में नोटिस या चालान जारी करना शामिल

इसके बाद पुलिस के द्वारा रिज़ॉर्ट के मालिक को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और स्थानीय थाने ले जाया गया. राजीव साह के वकील ने इसपर तर्क दिया कि सामान्य प्रोटोकॉल में नोटिस या चालान जारी करना शामिल है, लेकिन पुलिस ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार करने का विकल्प चुना. रिहा होने के बाद, राजीव साह ने SHO इंस्पेक्टर अरुण सैनी, वरिष्ठ उप-निरीक्षक प्रकाश पोखरियाल और उप-निरीक्षक दीपक बिष्ट सहित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला दायर किया.

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अरुण सैनी ने कथित तौर पर मुफ्त कमरे मांगे

थाना प्रभारी अरुण सैनी ने कथित तौर पर मुफ्त कमरे मांगे थे, जो राजीव साह नहीं दे सके. राजीव साह ने अदालत के समक्ष सबूत के तौर पर टेक्स्ट संदेश पेश करते हुए कहा कि अधिकारियों ने पहले भी मुफ्त कमरे की मांग की थी. यह पूछे जाने पर कि क्या ऐसे अपराध में किसी आरोपी को बिना नोटिस जारी किए गिरफ्तार किया जा सकता है, SSI पोखरियाल ने कहा, “आबकारी अधिनियम गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाता है, लेकिन ऐसे मामलों में पुलिस स्टेशन से जमानत दी जा सकती है.”

संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी पुलिस

इस विशेष मामले में, गिरफ्तारी के बाद पुलिस स्टेशन से कोई जमानत नहीं मांगी गई थी. राजीव साह के वकील दुष्यंत मैनाली ने कहा, ‘ऐसे मामलों में, यदि गिरफ्तारी आवश्यक है, तो पुलिस को यह उल्लेख करना होगा कि उल्लंघनकर्ता को नोटिस या चालान क्यों नहीं दिया गया. लेकिन पुलिस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी. मेरे मुवक्किल को गिरफ्तार करना सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन था, जो उचित औचित्य के बिना छोटे अपराधों के लिए व्यक्तियों को हिरासत में लेने पर रोक लगाता है.’

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By Aditya kumar

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