West Bengal : शुभेंदु अधिकारी को हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका, DG के खिलाफ दायर अवमानना का मामला खारिज

पश्चिम बंगाल में राजनीति हलचल जारी है. सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने राज्य पुलिस के डीजी मनोज मालवीय के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​का मामला खारिज कर दिया है.

पश्चिम बंगाल में राजनीति हलचल जारी है. सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने राज्य पुलिस के डीजी मनोज मालवीय के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​का मामला खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने सोमवार को इस मामले को खारिज कर दिया है. गौरतलब है कि 7 जनवरी को शुभेंदु अधिकारी ने लालगढ़ के नेताई गांव में शहीद समारोह में शामिल होने के लिए एक कार्यक्रम की घोषणा की थी, लेकिन उन्हें वहां जाने से पुलिस ने रोक दिया था. जिसके बाद से शुभेंदु अधिकारी कोर्ट की शरण में पहुंचे थे.

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पुलिस ने शुभेंदु को कोर्ट की अनुमित के बावजूद गांव में जाने से था रोका

गौरतलब है कि नेताई गांव में पुलिस के द्वारा भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी को रोका गया था. जबकि कोर्ट की ओर से अनुमित दी गई थी कि नेताई गांव में शुभेंदु के जाने के दौरान पुलिस उन्हें आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराएगी. इसके बावजूद शुभेंदु ने आरोप लगाया कि उन्हें नेताई में प्रवेश करने से रोक दिया गया. इसके बाद शुभेंदु ने हाईकोर्ट में राज्य के पुलिस डीजी मनोज मालवीय, झाड़ग्राम के पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के खिलाफ शिकयात दर्ज कराई थी. कोर्ट की अनुमति के बावजूदशुभेंदु को नेताई में प्रवेश करने से क्यों रोका गया ? डीजी को सवाल-जवाब के लिए कई बार कोर्ट में तलब किया गया था. लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया है . ऐसे में राज्य सरकार ने राहत की सांस ली है.

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क्या था मामला

वर्ष 2011 में नेताई हत्याकांड के बाद हर साल 7 जनवरी को शुभेंदु शहीद की वेदी पर माल्यार्पण करते रहे हैं. इस साल भी उनका यह कार्यक्रम था. उन्हें शहीद के परिवार से मिलना था. शुभेंदु उस दिन दोपहर करीब 3 बजे नेताई गांव पहुंचे थे लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को पहले से सूचित करने के बावजूद उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने दिया गया. पुलिस से भाजपा नेता की काफी बहस भी हुई थी जिसके बाद यह मामला कोर्ट में पहुंच गया था जिसे आज खारिज कर दिया गया.

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