हर महीने गढ़वा में एक करोड़ का राशन घोटाला, लाभुक तक पहुंचने से पहले गायब हो जाता है 5 हजार क्विंटल अनाज

गढ़वा : गढ़वा जिले में गरीबों को मिलनेवाले राशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. हर माह यहां गरीबों के राशन में एक करोड़ का घोटाला किया जा रहा है. गढ़वा उपायुक्त हर्ष मंगला द्वारा करायी गयी जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. आपको बता दें कि जब देश में इस समय कोरोना वायरस से सुरक्षा को लेकर लॉकडाउन है. इसमें सरकार गरीबों तक राशन पहुंचाने का काम कर रही है, ताकि कोई भूखा नहीं रहे. इसके बावजूद राशन की हेराफेरी की जा रही है. लाभुक तक पहुंचने से पहले ही पांच हजार क्विंटल अनाज गायब हो जाता है. पढ़िए विनोद पाठक की रिपोर्ट.

गढ़वा : गढ़वा जिले में गरीबों को मिलनेवाले राशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. हर माह यहां गरीबों के राशन में एक करोड़ का घोटाला किया जा रहा है. गढ़वा उपायुक्त हर्ष मंगला द्वारा करायी गयी जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. आपको बता दें कि जब देश में इस समय कोरोना वायरस से सुरक्षा को लेकर लॉकडाउन है. इसमें सरकार गरीबों तक राशन पहुंचाने का काम कर रही है, ताकि कोई भूखा नहीं रहे. इसके बावजूद राशन की हेराफेरी की जा रही है. लाभुक तक पहुंचने से पहले ही पांच हजार क्विंटल अनाज गायब हो जाता है. पढ़िए विनोद पाठक की रिपोर्ट.

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प्रति क्विंटल चार किलो अनाज कम

लाभुकों को पर्याप्त मात्रा में राशन नहीं मिलने की शिकायत पर गढ़वा के उपायुक्त हर्ष मंगला ने इसे गंभीरता से लिया. इसके लिए एक जांच टीम का गठन किया. इसके साथ ही नगरऊंटारी एसडीओ को जांच का जिम्मा सौंपा गया. इसके आलोक में नगरऊंटारी एसडीओ कमलेश्वर नारायण द्वारा जांच कर जो जांच रिपोर्ट का प्रतिवेदन सौंपा गया, वो बेहद चौंकाने वाला था.

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गोदाम से लेकर डीलर तक हेराफेरी

एसडीओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार गोदाम से डीलर के पास आने वाले अनाज में प्रति क्विंटल चार किलो कम अनाज पाया गया, जबकि डीलर इस चार किलो कम मिले अनाज की भरपाई करने के लिए गरीबों के अनाज में से साढ़े सात किलो तक अनाज प्रति क्विंटल कम देते हैं.. इस रिपोर्ट के बादे उपायुक्त काफी गंभीर हो गये हैं. जिला प्रशासन ने इसकी रोकथाम के लिए रणनीति बनायी है.

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कैसे होता है राशन का घोटाला

गरीबों तक पहुंचाने के लिए सबसे पहले अनाज का उठाव एफसीआइ मिल से करता है. उसके बाद एफसीआइ इस अनाज को अपने द्वारा एसएफसी को देता है. एसएफसी इसे जिला तक पहुंचाता है, जहां से डोर टू डोर स्टेप देनेवाले ठेकेदार के माध्यम से इसे गोदाम तक पहुंचाया जाता है. रिपोर्ट है कि गोदाम में यह अनाज प्रति बोरा 49 किलो मिलता है. इसे डीलर को 51 किलो मान कर दे दिया जाता है.

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एक करोड़ का घोटाला हर माह

राशन डीलर के पास प्रति क्विंटल चार किलो कम राशन पहुंचता है. अब राशन डीलर इस कमी की भरपाई करने के लिए चार से पांच किलो की कटौती प्रति क्विंटल उन गरीबों को दिये जाने वाले अनाज में से कर लेता है. इस तरह से गरीबों के हक के अनाज से लगभग आठ किलो अनाज प्रति क्विंटल गायब हो जाता है. गढ़वा जिले को गरीबों को देने के लिए प्रति महीने कुल 63 हजार क्विंटल राशन मिलता है, तो इस तरह से 63 हजार क्विंटल में से 5000 क्विंटल अनाज गायब हो जाता है, जिसकी बाजार में कीमत 2000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एक करोड़ होता है. अर्थात जिले में प्रति माह एक करोड़ का घोटाला प्रतिमाह किया जा रहा है.

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हमेशा कम मिलता है अनाज

इस राशन वितरण की अनियमितता को लेकर राशन लाभुकों द्वारा अक्सर राशन कम मिलने की शिकायत की जाती है. इसके साथ ही लाभुकों की ये भी शिकायत रहती है कि हर माह सही तरीके उन्हें राशन नहीं मिल पाता है. इसके बारे में पूछे जाने पर संवेदक ने कहा कि उनको कांटा पर तौल कर अनाज मिलता है और वे यहां तौल कर अनाज पहुंचा देते हैं. हर किसी को भोजन मिल सके, इसलिए सरकार की ओर से डीलर के माध्यम से इस समय अग्रिम तीन-तीन माह का राशन वितरण किया जा रहा है, लेकिन राशन डीलर प्रति लाभुकों को डेढ़ से दो किलो तक राशन कम देकर बड़े पैमाने पर राशन की हेराफेरी कर रहे हैं.

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जांच कर दोषी पर कार्रवाई होगी : उपायुक्त

उपायुक्त हर्ष मंगला ने कहा कि उन्होंने इसकी नगरऊंटारी एसडीओ से जांच करायी है. इसमें गोदाम से डीलर तक पहुंचने में जहां दो किलो का अंतर आ रहा है, वहीं डीलर से लाभुक तक पहुंचने में और अंतर बढ़ जा रहा है. उन्होंने इसके लिए एफसीआइ गोदाम व राज्य सरकार को इसकी जानकारी दी है. जो भी दोषी होंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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