ओडिशा के 11 जिलों में 6.24 लाख लोग बाढ़ की चपेट में, सड़कें डूबीं, पेयजल की किल्लत

ओडिशा के 11 जिलों के साथ-साथ 26 शहरी इलाके बाढ़ की चपेट में हैं. सवा छह लाख लोग बाढ़ में घिर गये हैं. सड़कें जलमग्न हो गयीं हैं, जिसकी वजह से पेयजल की किल्लत हो गयी है. कुछ लोग बाढ़ का पानी उबालकर पी रहे हैं.

ओडिशा में पिछले दिनों हुई भारी बारिश और महानदी में बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर पेयजल की किल्लत साफ देखी जा रही है. सड़कें जलमग्न हो गयीं हैं, जिसकी वजह से टैंकर से उन तक पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. 11 जिलों में करीब 6.24 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. ये सभी किसी न किसी मुश्किल का सामना कर रहे हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है.

बाढ़ के पानी को उबालकर पी रहे हैं लोग

स्थिति इतनी गंभीर हो गयी है कि कुछ लोग बाढ़ के पानी को उबाल कर पी रहे हैं. इसकी वजह लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. राहत की बात यह है कि प्रमुख नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है. बावजूद इसके 75 नये गांव बाढ़ की चपेट में आ गये हैं. उधर, सरकार का कहना है कि वह बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी के टैंकर भेज रही है, लेकिन प्रभावित लोगों ने बताया कि सड़कें जलमग्न होने के कारण टैंकर उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.

घर और ट्यूबवेल बाढ़ में डूबे

बाढ़ से प्रभावित लोगों ने पास के स्कूलों में शरण ले रखी है. केंद्रपाड़ा जिले के राजनगर ब्लॉक में संथापाड़ा गांव के 68 वर्षीय कालिंदी बारिक ने कहा कि हमारे इलाके में मेरा घर और ट्यूबवेल बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. हमारे पास पीने का पानी नहीं है. हम बाढ़ के पानी को ही उबालकर पी रहे हैं. बारिक की तरह केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, पुरी और खुर्दा जिलों वाले महानदी डेल्टा क्षेत्र में कई अन्य प्रभावित लोगों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

Also Read: Odisha Weather Update: IMD ने ओडिशा के 7 जिलों में जारी किया रेड अलर्ट, महानदी के इलाकों में बाढ़ का खतरा

कांग्रेस नेता गणेश्वर बेहरा ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश्वर बेहरा ने बाढ़ से प्रभावित कई क्षेत्रों का दौरा किया और कहा कि प्रभावित लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. पीने के पानी की कमी उनमें से सबसे बड़ी दिक्कत है. उन्होंने बताया कि लोग जल-जनित बीमारियों के फैलने के डर से बाढ़ का पानी पीने से डरते हैं. एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने यहां बताया कि ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता (आरडब्ल्यूएसएस) विभाग को बाढ़ प्रभावित लोगों तक दवाओं की आपूर्ति करने का निर्देश दिया गया है.

केंद्रपाड़ा के डिप्टी कलेक्टर बोले – बाढ़ प्रभावित इलाके में भेजे गये पानी के टैंकर

केंद्रपाड़ा के उप जिला कलेक्टर निरंजन बेहेरा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीने के पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं. दूसरी तरफ, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों का कहना है कि सड़कें पानी में डूब गयीं हैं. इसकी वजह से टैंकर उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय ने कहा कि 75 और गांव बाढ़ की चपेट में आ गये हैं, जिससे रविवार को प्रभावित गांवों की कुल संख्या 1,973 हो गयी है. बाढ़ से प्रभावित शहरी क्षेत्रों की संख्या 26 में अब तक कोई वृद्धि नहीं हुई है.

हीराकुद बांध के 20 गेट खोले गये, महानदी में छोड़ा गया पानी

एसआरसी कार्यालय ने एक रिपोर्ट में बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या शनिवार को 5.73 लाख थी, जो बढ़कर रविवार को 6.24 लाख हो गयी है. एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने शनिवार से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकाले गये 912 अन्य लोगों के लिए सात और मुफ्त रसोई की व्यवस्था की है. इस बीच, हीराकुद बांध के अधिकारियों ने 20 गेट खोलकर महानदी के निचले हिस्से में अतिरिक्त पानी छोड़ दिया है.

Also Read: ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश, मलकानगिरि में बाढ़ में बहने से एक की मौत

तीन दिन तक कोई खतरा नहीं

हीराकुद बांध के जलाशय में जलस्तर सोमवार को जलाशय के पूर्ण जलस्तर 630 फुट के मुकाबले 621 फुट रहा. जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता रंजन मोहंती ने कहा कि चूंकि पानी का प्रवाह कम हो गया है, हमें उम्मीद है कि हम अपना लक्ष्य स्तर बनाये रखेंगे. महानदी के ऊपरी हिस्से में कोई भारी बारिश नहीं हुई है. इसलिए, बाढ़ की स्थिति स्थिर है और अगले तीन दिनों तक कोई खतरा नहीं है. कटक के पास मुंडाली में अब लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी बह रहा है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >