Novak Djokovic: नोवाक जोकोविच फ्रेंच ओपन और विंबलडन भी छोड़ने को तैयार, वैक्सीन विवाद पर दिया बड़ा बयान

नोवाक जोकोविच ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि अगर कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अनिवार्य हुआ तो वह फ्रेंच ओपन और विम्बलडन टेनिस टूर्नामेंट से बाहर रहने के लिए तैयार हैं.

दुनिया के नंबर वन टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) पर फ्रेंच ओपन (French Open) और विंबलडन (Wimbledon) से भी बाहर होने का खतरा बढ़ने लगा है. उन्होंने वैक्सीन विवाद (novak djokovic vaccination issue) पर धमकी देते हुए कहा कि अगर वैक्सीन को अनिवार्य किया गया, तो वो फ्रेंच ओपन और विंबलडन से भी बाहर होने के लिए तैयार हैं.

वैक्सीन विवाद पर जोकोविच ने दिया बयान

नोवाक जोकोविच ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि अगर कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अनिवार्य हुआ तो वह फ्रेंच ओपन और विम्बलडन टेनिस टूर्नामेंट से बाहर रहने के लिए तैयार हैं.

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जोकोविच अब भी वैक्सीन नहीं लेने की जिद्द पर अड़े

बीबीसी से बात करते हुए 20 बार के ग्रैंडस्लैम चैंपियन जोकोविच ने कहा कि उनका टीकाकरण नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि वह अगले दो ग्रैंडस्लैम और कई अन्य टूर्नामेंट में नहीं खेलकर इसकी कीमत चुकाने को तैयार हैं. जोकोविच ने कहा, मैं अपने फैसले के नतीजों को समझता हूं. उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि अगर मेरा टीकाकरण नहीं हुआ है तो मुझे पता है कि मैं अभी अधिकतर टूर्नामेंट के लिए यात्रा नहीं कर पाऊंगा.

कोरोना वैक्सीन के खिलाफ नहीं : जोकोविच

नोवाक जोकोविच ने साक्षात्कार में बताया कि वो कोरोना वैक्सीन के खिलाफ नहीं हैं. उन्होंने कहा, अगर बच्चा होते, तो कब का वैक्सीन लगवा चुके होते. जोकोविच ने कहा, कोरोना वैक्सीन के खिलाफ अभियान में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि हर इंसान को आजादी मिलनी चाहिए, वह खुद तय करे कि उसे वैक्सीन लेना है या नहीं.

क्या है विवाद

दरअसल सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच ने अबतक कोरोना का टीका नहीं लिया है. जिस कारण उन्हें ऑस्ट्रेलियाई ओपन से बाहर कर दिया गया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में हिरासत में लिया गया था और केस हारने के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया से निर्वासित भी कर दिया गया था.

जोकोविच ने ऑस्ट्रेलिया की घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलिया की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा, मैं हिरासत में अकेला था और मैंने कई समस्याओं और चुनौतियों का सामना किया लेकिन मैं अकेला महसूस नहीं कर रहा था. मुझे अपने परिवार, करीबी लोगों और पूरे सर्बियाई देश का पूरा समर्थन मिल रहा था.

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