Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि आज, जानें कैसे करें शिव की आराधना, यहां है पूजा विधि,शुभ मुहूर्त और आरती

Mahashivratri 2022 Date : फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि व्रत रखते हैं. इस वर्ष महाशिवरात्रि कल यानी 01 मार्च दिन मंगलवार को है.महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा और व्रत रखने का विशेष महत्व होता है. यहां जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व

Live Updates
5:47 PM. 1 Mar 22 5:47 PM. 1 Mar

महाशिवरात्रि के व्रत में क्या खाएं

महाशिवरात्रि के व्रत में व्रती अनार या संतरे का जूस पी सकते हैं, फल खा सकते हैं. इस दिन बेर भी खाए जा सकते हैं. जूस पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और एनर्जी भी बनी रहती है.

5:26 PM. 1 Mar 22 5:26 PM. 1 Mar

महामृत्युंजय मंत्र जाप करने का सही तरीका

महामृत्‍युंजय जाप से पहले भगवान शिव के सामने धूप-दीप जलाएं. मंत्र को हमेशा कुश के आसान पर करें और जाप करते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखें. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय ध्‍यान रखें कि उच्चारण शुद्ध रहे. साथ ही इसका जाप माला से ही करें. इस महामंत्र का जाप जोर से बोलकर नहीं करें, बल्कि ऐसे करें कि स्‍वर होंठों से बाहर न निकलें. कोशिश करें कि नियमित तौर पर जाप कर रहे हों तो एक स्‍थान नियत कर लें, हर दिन जगह न बदलें. तामसिक भोजन का सेवन न करें.

5:06 PM. 1 Mar 22 5:06 PM. 1 Mar

किस दिशा में स्थापित करें भोलेनाथ की मूर्ति

भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत पर है, जो कि उत्तर दिशा में है.इसलिए ध्यान रखें कि भोलेनाथ की मूर्ति उत्तर दिशा में स्थापित करें. साथ ही भगवान शिव की क्रोध मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे विनाश का प्रतीक माना जाता है.

5:06 PM. 1 Mar 22 5:06 PM. 1 Mar

महाशिवरात्रि का महत्व

महाशिवरात्रि को भक्त माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह को याद करने के साथ-साथ इसलिए भी मनाते हैं क्योंकि महादेव को मन पर विजय पाने वाले देवता के रूप में देखा जाता है. भक्त शिव के प्रतिरूप खुदको ढालने का प्रयास करते हैं. वे ध्यान और चिंतन के गुण खुद में लाना चाहते हैं. वहीं, कहते हैं कि कन्याएं इस दिन शिव जी का व्रत (Mahashivratri Fast) रख मनोकामना मांगती हैं कि उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति हो. इन्हीं कारणों के चलते महाशिवरात्रि को भक्त पूरे भक्तिभाव के साथ मनाते हैं.

5:06 PM. 1 Mar 22 5:06 PM. 1 Mar

बेलपत्र की महिमा

महाशिवरात्रि की कथा में एक प्रसंग यह भी आता है कि शिवरात्रि की अंधेरी रात की वजह से एक भील घर नहीं जा सका. उस रात उसने एक बेलपत्र के वृक्ष पर गुजारी. नींद आने के कारण वृक्ष से नीचे गिर ना जाए इसलिए वह रात भर बेल के पत्तों के तोड़कर नीचे फेंकता रहा. संयोग से उस वृक्ष के नीचे शिवलिंग था. बेलपत्र शिवलिंग पर गिरने से भगवान शिव प्रसन्न हो गए. जिसके बाद भगवान शिव उस भील के समक्ष प्रकट हुए और उसे मुक्ति का वरदान दिया. कहते हैं कि बेलपत्र की महिमा से उस भील को शिवलोग की प्राप्ति हुई.

4:36 PM. 1 Mar 22 4:36 PM. 1 Mar

क्यों चढ़ाते हैं शिवलिंग पर जल और बेलपत्र?

शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के समय कालकूट नाम का विष निकला था. जिसके प्रभाव से सभी देवता और जीव-जंतु व्याकुल होने लगे. सृष्टि में हहाकार मच गया. सृष्टि की रक्षा के लिए देवताओं और असुरों ने मिलकर भगवान शिव के प्रार्थना की. जिसके बाद भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होनें विष को हथेली पर रखकर पी लिया. भगवान शिव विष के प्रभाव से खुद को सुरक्षित रखने के लिए इसे अपने कंठ में धारण कर लिया. जिसकी वजह से भोलेनाथ का कंठ नीला पड़ गया, इसलिए शिवजी नीलकंठ कहलाए. विष की ज्वाला इतनी तेज थी कि भोलेनाथ का मस्तिष्क गर्म हो गया. ऐसे में देवताओं ने भगवान शिव पर जल अर्पण करना शुरू कर दिया. साथ ही बेलपत्र के गुणों के कारण उसे भगवान शिव पर चढ़ाने लगे. इसके बाद से ही भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है. यही कारण है कि जल और बेलपत्र से शिव की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही दरिद्रता दूर होती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है.

4:16 PM. 1 Mar 22 4:16 PM. 1 Mar

शिव पूजा सामग्री और विधि

शिवरात्रि के दिन शिव जी का पंचामृत से अभिषेक करें. चंदन का तिलक लगाएं. बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र और वस्‍त्र आदि अर्पित करें. शिव जी के समुख दीप जलाएं और केसर युक्त खीर का भोग लगाएं.

3:58 PM. 1 Mar 22 3:58 PM. 1 Mar

महाशिवरात्रि पर पूजा शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि 2022 पर पूजा करने के लिए बेहद शुभ मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा. यह अभिजीत मुहूर्त है. इसके बाद दोपहर 02: 07 बजे से 02:53 बजे तक विजय मुहूर्त है. इसके बाद शाम को 05:48 बजे से 06:12 बजे तक गोधूलि बेला का मुहूर्त रहेगा.

3:42 PM. 1 Mar 22 3:42 PM. 1 Mar

महाशिवरात्रि पर बन रह 6 शुभ योग

इस साल की महाशिवरात्रि ज्‍योतिष की नजर से भी बेहद महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि आज इस खास मौके पर 6 बेहद शुभ योग बन रहे हैं. महाशिवरात्रि पर शिव योग के अलावा शंख, पर्वत, हर्ष, दीर्घायु और भाग्य नाम के राजयोग भी बन रहे हैं. इसके अलावा शनि की राशि मकर में पंचग्रही योग भी बना हुआ है. मकर में इस समय शनि, मंगल, बुध, शुक्र और चंद्रमा एकसाथ मौजूद रहेंगे. ज्‍योतिष के मुताबिक पंचग्रही योग में भगवान शिव की पूजा करना कई गुना ज्‍यादा फल देता है. कुल मिलाकर आज कई मामलों में बेहद खास ग्रह योग बने हुए हैं.

3:23 PM. 1 Mar 22 3:23 PM. 1 Mar

महाशिवरात्रि के दिन क्या खाएं

इस दिन अनार, मौसमी या संतरे का जूस पी सकते हैं. व्रत के दिन ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं. व्रत के दिन मखाने और मूंगफली घी में फ्राई कर लें और फिर खाएं. इस दिन गाजर या लौकी की खीर भी खाई जा सकती है.

3:08 PM. 1 Mar 22 3:08 PM. 1 Mar

रोग ग्रस्त है तो महाशिवरात्रि के दिन रुद्र गायत्री मंत्र का जाप करें

यदि घर में कोई रोग ग्रस्त है तो महाशिवरात्रि के दिन रुद्र गायत्री मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से रोग से मुक्ति मिलेगी।

क्रोध पर नियंत्रण पाने का मंत्र

देवदेव महादेव नीलकंठ नमोस्तु ते।

कुर्तमिच्छाम्यहं देव शिवरात्रिव्रतं तव।।

तव प्रभावाद्धेवेश निर्विघ्नेन भवेदिति।

कामाद्या: शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।

3:08 PM. 1 Mar 22 3:08 PM. 1 Mar

इस कारण मनाई जाती है महाशिवरात्रि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही देशभर में द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए थे. ये 12 ज्योतिर्लिंग हैं: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, रामेश्वर ज्योतिर्लिंग और घृष्‍णेश्‍वर ज्योतिर्लिंग हैं. इन 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रकट होने के उत्सव के रुप में भी महाशिवरात्रि मनाई जाती है और भगवान शिव की पूजा की जाती है.

2:13 PM. 1 Mar 22 2:13 PM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: चार पहर की पूजा का समय

महाशिवरात्रि पहले पहर की पूजा: 1 मार्च 2022 को 6:21 pm से 9:27 pm तक

महाशिवरात्रि दूसरे पहर की पूजा: 1 मार्च को रात्रि 9:27 pm से 12:33 am तक

महाशिवरात्रि तीसरे पहर की पूजा: 2 मार्च को रात्रि 12:33 am से सुबह 3:39 am तक

महाशिवरात्रि चौथे पहर की पूजा: 2 मार्च 2022 को 3:39 am से 6:45 am तक

व्रत का पारण: 2 मार्च 2022, बुधवार को 6:45 am

1:49 PM. 1 Mar 22 1:49 PM. 1 Mar

शिवरात्रि पर करें महामृत्युंजय मंत्र

ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

1:11 PM. 1 Mar 22 1:11 PM. 1 Mar

महाशिवरात्रि मनाने के कारण

शिवपुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान सदाशिव सबसे पहले शिवलिंग स्वरुप में प्रकट हुए थे. माना जाता है कि इस दिन ही भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग प्रकाट्य हुआ था. उस दिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी. इस वजह से हर साल फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाते हैं.

1:11 PM. 1 Mar 22 1:11 PM. 1 Mar

शिव स्तुति मंत्र

शिव जी की पूजा के लिए कई मंत्र हैं, लेकिन सबसे आसान और प्रभावी मंत्र ओम नम: शिवाय है. आप इस मंत्र से ही पूजा करें क्योंकि इसका उच्चारण शुद्धता के साथ करने में आसानी होती है. आप अपनी राशि के अनुसार शिव मंत्र का भी उपयोग कर सकते हैं.

ओम नम: श्म्भ्वायच मयोंभवायच नम: शंकरायच मयस्करायच नम: शिवायच शिवतरायच।।

12:41 PM. 1 Mar 22 12:41 PM. 1 Mar

ये है पंचाक्षर स्तोत्र (Panchakshar Stotra)

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय, नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै ‘न’ काराय नम: शिवाय.

मन्दाकिनी सलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय, मन्दारपुष्पबहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै ‘म’ काराय नम: शिवाय.

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय, श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै ‘शि’ काराय नम: शिवाय.

वशिष्ठकुम्भोद्भव गौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चित शेखराय, चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय तस्मै ‘व’ काराय नम: शिवाय.

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय, दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै ‘य’ काराय नम: शिवाय.

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ, शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते.

12:27 PM. 1 Mar 22 12:27 PM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: करें पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिव के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से हर असंभव काम संभव हो जाता है. पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नम: शिवाय’ की महिमा भक्तों में खूब प्रचलित है. ये बहुत ही सरल और प्रभावी मंत्र है. कहते हैं कि इस मंत्र के जाप से भक्तों का कल्याण होता है. शिव जी के पंचाक्षर मंत्र जाप से पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु पांचों तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है. मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

12:27 PM. 1 Mar 22 12:27 PM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: क्या होता है निशित काल

पौराणिक धार्मिक मान्यता के अनुसार निशित रात्रि के एक कल्पित पुत्र का नाम है, जिसका अर्थ होता है तीक्ष्ण रात्रि. शिवरात्रि पर रात्रि के समय महादेव की पूजा करने के लिए निशित काल सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. पौराणिक मान्यताएं कहती हैं कि जब भगवान शिव शिवलिंग के रूप में पृथ्वी पर प्रकट हुए तब वह निशित काल ही समय था. यही कारण है कि शिव जी के मंदिरों में लिंगोद्भव पूजा का अनुष्ठान इसी समय में किया जाता है। इसके अलावा यह दिन भगवान शिव के विवाह का दिन है इसलिए रात्रि में जागकर चारों प्रहर पूजा करने का विधान है.

12:27 PM. 1 Mar 22 12:27 PM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: भगवान शिव को प्रणाम करना चाहिए

शिवपुराण के अनुसार व्रत करने वाले को महाशिवरात्रि के दिन प्रातः काल स्नान व नित्यकर्म से निवृत्त होकर ललाट पर भस्म या चंदन का त्रिपुंड तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला धारण कर शिवालय में जाना चाहिए और शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं भगवान शिव को प्रणाम करना चाहिए. फिर उसे श्रद्धापूर्वक महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प करना चाहिए.

12:27 PM. 1 Mar 22 12:27 PM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: मनोरथ पूर्ण करेंगे अभिषेक

शिवपुराण में बताया गया है कि शिव को अर्पित किए जाने वाले द्रव्यों के लाभ भी अलग-अलग होते हैं. विवाह की इच्छा रखने वालों को दूध, बेलपत्र, गंगाजल, शमीपत्र, नारियल पानी, भांग, खोये की मिठाई तथा गुलाबी रंग के गुलाल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.

11:18 AM. 1 Mar 22 11:18 AM. 1 Mar

महाशिवरात्रि की रात्रि पर्व का क्या होता है महत्व

महाशिवरात्रि में रात्रि में खास आयोजन किए जाते है. ऐसी मान्यता है कि हिन्दू धर्म में रात में विवाह का मुहूर्त शादी के लिए उत्तम होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का भी माता पार्वती के रात्रि में ही विवाह संपन्न हुआ था. हिंदू पंचांग की मानें तो जिस दिन फाल्गुन माह की मध्य रात्रि अर्थात निशीथ काल में होती है उसी दिन शिवरात्रि मानाई जाती है.

11:18 AM. 1 Mar 22 11:18 AM. 1 Mar

शिवरात्रि पर इस मंत्री का प्रयोग करने से मिलेगा लाभ

शादी विवाह हेतु : अगर विवाह नहीं हुआ है या होने में अड़चनें आ रही हैं या फिर शादी के बाद घर गृहस्थी तनावपूर्ण वातावरण में है तो ऐसे लोग भगवान शिव को कुमकुम हल्दी अबीर गुलाल चढ़ाएं और ” ॐ गौरी शंकराए नमः ” का जाप 108 बार रुद्राक्ष की माला पर करें उन्हें

11:18 AM. 1 Mar 22 11:18 AM. 1 Mar

रात्रि प्रथम प्रहर से चतुर्थ प्रहर तक का मुहूर्त

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा: 06:27 PM से 09:29 PM तक

  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा: 09:29 PM से 12:31 AM, मार्च 12

  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा: 12:31 AM से 03:32 AM, मार्च 12

  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा: 03:32 AM से 06:34 AM, मार्च 12

11:18 AM. 1 Mar 22 11:18 AM. 1 Mar

शिवरात्रि व्रत में क्या खाएं

शिवरात्रि के व्रत में आप अनार या संतरे का जूस पी सकते हैं. ऐसा करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और एनर्जी भी बनी रहती है.

11:18 AM. 1 Mar 22 11:18 AM. 1 Mar

क्या है शिवलिंग

शिव पुराण में वर्णित है कि शिवजी के निराकार स्वरुप का प्रतीक ‘लिंग’ शिवरात्रि की पावन तिथि की महानिशा में प्रकट होकर सर्वप्रथम ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पूजित हुआ था। वातावरण सहित घूमती धरती या अनंत ब्रह्माण्ड का अक्स ही लिंग है. इसलिए इसका आदि व अंत भी देवताओं तक के लिए अज्ञात है. सौरमंडल के ग्रहों के घूमने की कक्षा ही शिव के तन पर लिपटे सर्प हैं. मुण्डकोपनिषद के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि ही उनके तीन नेत्र हैं.

11:18 AM. 1 Mar 22 11:18 AM. 1 Mar

नंदी कैसे बनें शिव की सवारी (How Did Nandi Become Shiva’s Vehicle)

पौराण‍िक कथाओं की मानें तो एकबार यमराज ने भगवान शिव को बिना किसी वाहन के विचरण करते देखा. दरअसल, पहले भोले बाबा बिना किसी सवारी के ही पूरा संसार घूमा करते थे. ऐसे में यम को इच्छा हुई कि भगवान भोलेनाथ के सवारी बनने की. उन्होंने कठिन तप कर शिवजी को प्रसन्न करने का पूरा प्रयत्न किया. आखिरकार, शिव शंभू उनकी अराधना से प्रसन्न हुए और वर के रूप में सवारी बनाना स्वीकार किया. लेकिन, इसके लिए उन्होंने यम को बैल रूप में स्वीकार किया.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: शिव जी की पूजा के दौरान पढ़ें ये मंत्र

1. शिव मोला मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

2. महा मृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

3. रूद्र गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Shivling Sanan Vidhi: प्रहर अनुसार शिवलिंग स्नान विधि जानें

सनातन धर्म के अनुसार शिवलिंग स्नान के लिये रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घृत और चौथे प्रहर में मधु, यानी शहद से स्नान कराने का विधान है.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri Jagran: महाशिवरात्रि पर क्यों करते हैं उपवासऔर जागरण ?

ऋषि महर्षियों ने समस्त आध्यात्मिक अनुष्ठानों में उपवास को महत्त्वपूर्ण माना है. गीता के अनुसार उपवास विषय निवृत्ति का अचूक साधन है. आध्यात्मिक साधना के लिये उपवास करना परमावश्यक है. उपवास के साथ रात्रि जागरण का महत्व है. उपवास से इन्द्रियों और मन पर नियंत्रण करने वाला संयमी व्यक्ति ही रात्रि में जागकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील हो सकता है. इन्हीं सब कारणों से इस महारात्रि में उपवास के साथ रात्रि में जागकर शिव पूजा करते हैं .

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri Puja Shubh Muhurat: महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त

महाशिवरात्रि 1 मार्च को सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 2 मार्च को सुबह 10 तक रहेगी.

  1. पहला प्रहर का मुहूर्त-:1 मार्च शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात्रि 9 बजकर 27 मिनट तक है.

  2. दूसरे प्रहर का मुहूर्त-: 1 मार्च रात्रि 9 बजकर 27 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक है.

  3. तीसरे प्रहर का मुहूर्त-: 1 मार्च रात्रि 12 बजकर 33 मिनट से सुबह 3 बजकर 39 मिनट तक है.

  4. चौथे प्रहर का मुहूर्त-: 2 मार्च सुबह 3 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक है.

  5. पारण समय-: 2 मार्च को सुबह 6 बजकर 45 मिनट के बाद है.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Shiv Aarti: श्री शिवजी की आरती

॥ श्री शिवशंकरजी की आरती ॥

हर हर हर महादेव!

सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी।

अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥

हर हर हर महादेव!

आदि, अनन्त, अनामय, अकल, कलाधारी।

अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघहारी॥

हर हर हर महादेव!

ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर तुम त्रिमूर्तिधारी।

कर्ता, भर्ता, धर्ता, तुम ही संहारी॥

हर हर हर महादेव!

रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय औढरदानी।

साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता अभिमानी॥

हर हर हर महादेव!

मणिमय-भवन निवासी, अति भोगी रागी।

सदा श्मशान विहारी, योगी वैरागी॥

हर हर हर महादेव!

छाल-कपाल, गरल-गल, मुण्डमाल व्याली।

चिता भस्मतन त्रिनयन, अयनमहाकाली॥

हर हर हर महादेव!

प्रेत-पिशाच-सुसेवित, पीत जटाधारी।

विवसन विकट रूपधर, रुद्र प्रलयकारी॥

हर हर हर महादेव!

शुभ्र-सौम्य, सुरसरिधर, शशिधर, सुखकारी।

अतिकमनीय, शान्तिकर, शिवमुनि मन-हारी॥

हर हर हर महादेव!

निर्गुण, सगुण, निरञ्जन, जगमय नित्य प्रभो।

कालरूप केवल हर! कालातीत विभो॥

हर हर हर महादेव!

सत्‌, चित्‌, आनन्द, रसमय, करुणामय धाता।

प्रेम-सुधा-निधि प्रियतम, अखिल विश्व त्राता॥

हर हर हर महादेव!

हम अतिदीन, दयामय! चरण-शरण दीजै।

सब विधि निर्मल मति कर, अपना कर लीजै॥

हर हर हर महादेव!

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Shiv Aarti: श्री शिवजी की आरती

॥ शिवजी की आरती ॥

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।

हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।

पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है,गल मुण्डन माला।

शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri 2022: जानें क्यों चढ़ाए जाते हैं शिव को बेलपत्र ?

पौराणिक कथा के अनुसार मां पार्वती (Maa Parvati) ने भगवान शिव (Bhagwan Shiv) को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. साथ ही उन्होंने कई व्रत रखे थे. एक बार भगवान शिव बेलपत्र वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या कर रहे थे. माता पार्वती (Mata Parvati) जब शिव जी की पूजा (Shiv Ji Puja) के लिए सामग्री लाना भूल गईं तो उन्होंने भगवान शिव को बेलपत्र से ढक दिया. इससे भोलेनाथ बहुत अधिक प्रसन्न हुए, और तब से ही भोलेशंकर को बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

महामृत्युजंय मंत्र

वैसे तो भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्रों का जाप किया जाता है, लेकिन सभी में महामृत्युजंय मंत्र का विशेष महत्व है. ये मंत्र इस प्रकार है…

ऊं हौं जूं सः ऊं भूर्भुवः स्वः ऊं त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ऊं स्वः भुवः भूः ऊं सः जूं हौं ऊं

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri Vrat Puja: ऐसे पूजा करें व्रती

  • व्रती दिनभर शिव मंत्र (ऊं नम: शिवाय) का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहें. (रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं.)

  • शिवपुराण में रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विधान है. शाम को स्नान करके किसी शिव मंदिर में जाकर अथवा घर पर ही पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके त्रिपुंड एवं रुद्राक्ष धारण करके पूजा का संकल्प इस प्रकार लें-

  • ममाखिलपापक्षयपूर्वकसलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये

  • व्रती को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए.

  • दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें.

  • चारों प्रहर के पूजन में शिवपंचाक्षर (नम: शिवाय) मंत्र का जाप करें. भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती व परिक्रमा करें.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri: पूजा मुहूर्त जानें

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय: शाम 06:27 से रात 09:29 तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय: रात 09:29 से 12:31 तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: रात 12:31 से 03:32 तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: रात 03:32 से सुबह 06:34 तक

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri: शिव शक्ति के मिलन का दिन

महाशिवरात्रि को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी. जिसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को माता पार्वती का विवाह भगवान शिव से हुआ. इसी कारण इस दिन को अत्यन्त ही महत्वपूर्ण माना जाता है.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri Puja: भगवान शिव को ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र

कहते हैं कि शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए. बेल पत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

Mahashivratri पूजा सामग्री

महाशिवरात्रि 1 मार्च को मनाई जाएगी बेल के पत्ते महाशिवरात्रि पूजा सामग्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो पूजा के दिन ही नहीं तोड़े जाने चाहिए.

पूजा के लिए निम्नलिखित चीजें आवश्यक हैं:

1 शिव लिंग या भगवान शिव की एक तस्वीर

2 बैठने के लिए ऊन से बनी चटाई

3 कम से कम एक दीपक

4 कपास की बत्ती

5 पवित्र बेल

6 कलश या तांबे का बर्तन

7 थाली

8 शिव लिंग रखने के लिए सफेद कपड़ा

9 माचिस

10 अगरबत्तियां

11 चंदन का पेस्ट

12 घी

13 कपूर

14 रोली

15 बेल के पत्ते (बेलपत्र)

16 विभूति- पवित्र आशु

17 अर्का फूल

निम्नलिखित वैकल्पिक आइटम हैं

18 छोटी कटोरी

19 गुलाब जल

20 जैफली

21 गुलाल

22 भंग

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

महाशिवरात्रि पूजा विधि

महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का पंचामृत से अभिषेक करें. चंदन का तिलक लगाएं. बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र और वस्‍त्र आदि अर्पित करें. शिव जी के सामने दीप जलाएं और खीर का भोग लगाएं.

10:33 AM. 1 Mar 22 10:33 AM. 1 Mar

महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त (Mahashivratri Puja Muhurat)

फाल्गुल मास के कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली महाशिवारात्रि का पूजा मुहूर्त

1 मार्च सुबह 11:47 से दोपहर 12:34 तक अभिजीत मुहूर्त

दोपहर 02:07 से 02:53 तक विजय मुहूर्त

शाम 05:48 से 06:12 तक गोधूलि मुहूर्त होगा

पूजा या शुभ कार्य करने के लिए अभिजीत और विजय मुहूर्त को श्रेष्‍ठ माना गया है.

6:07 PM. 28 Feb 22 6:07 PM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि पर बन रहा पंचग्रही योग

महाशिवरात्रि पर मकर राशि में पंचग्रही योग बन रहा है. इस दिन मंगल, शनि, बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे. लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति रहेगी. राहु वृषभ राशि, जबकि केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में रहेगा. यह ग्रहों की दुर्लभ स्थिति है और विशेष लाभकारी हैं.

6:07 PM. 28 Feb 22 6:07 PM. 28 Feb

Mahashivratri Puja Vidhi: ऐसे करें शिव पूजा

  • महाशिवरात्रि के दिन सबसे पहले शिवलिंग में चन्दन के लेप लगाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराएं.

  • दीप और कर्पूर जलाएं.

  • पूजा करते समय ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.

  • शिव को बिल्व पत्र और फूल अर्पित करें.

  • शिव पूजा के बाद गोबर के उपलों की अग्नि जलाकर तिल, चावल और घी की मिश्रित आहुति दें.

  • होम के बाद किसी भी एक साबुत फल की आहुति दें.

  • सामान्यतया लोग सूखे नारियल की आहुति देते हैं.

6:07 PM. 28 Feb 22 6:07 PM. 28 Feb

Mahashivratri: महाशिवरात्रि के दिन पढ़ें ये शिव मंत्र

1. शिव मोला मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

2. महा मृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

3. रूद्र गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

6:07 PM. 28 Feb 22 6:07 PM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि व्रत के नियम

  • शिवरात्रि के दिन भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान करने के पश्चात् ही पूजा करनी चाहिए या मंदिर जाना चाहिए.

  • शिव भगवान की पूजा रात्रि के समय करना चाहिए एवं अगले दिन स्नानादि के पश्चात् अपना व्रत का पारण करना चाहिए.

  • व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए भक्तों को सूर्योदय व चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य के समय में ही व्रत का समापन करना चाहिए.

  • लेकिन, एक अन्य धारणा के अनुसार, व्रत के समापन का सही समय चतुर्दशी तिथि के पश्चात् का बताया गया है.

  • दोनों ही अवधारणा परस्पर विरोधी हैं. लेकिन, ऐसा माना जाता है की, शिव पूजा और पारण (व्रत का समापन), दोनों ही चतुर्दशी तिथि अस्त होने से पहले करना चाहिए.

  • रात्रि के चारों प्रहर में की जा सकती है शिव पूजा

  • शिवरात्रि पूजा रात्रि के समय एक बार या चार बार की जा सकती है. रात्रि के चार प्रहर होते हैं, और हर प्रहर में शिव पूजा की जा सकती है.

6:07 PM. 28 Feb 22 6:07 PM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: 108 names of Lord Shiva

पौराणिक ग्रंथों में भगवान शिव के 108 नामों का उल्लेख किया गया है. माना जाता है कि जो भक्त भगवान शिव के इन 108 नामों का नियमित रूप से जाप करता है भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

1:42 PM. 28 Feb 22 1:42 PM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: शिवजी को ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र

कहते हैं कि शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए. बेल पत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

1:42 PM. 28 Feb 22 1:42 PM. 28 Feb

Mahashivratri मान्यताएं

मान्यता है कि इस दिन महादेव का व्रत रखने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के लिंग स्वरूप का पूजन किया जाता है. यह भगवान शिव का प्रतीक है. शिव का अर्थ है- कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन.

1:42 PM. 28 Feb 22 1:42 PM. 28 Feb

Mahashivratri Puja: पूजा विधि

महाशिवरात्रि के दिन सबसे पहले शिवलिंग में चन्दन के लेप लगाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराएं.

दीप और कर्पूर जलाएं.

पूजा करते समय ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.

शिव को बिल्व पत्र और फूल अर्पित करें.

शिव पूजा के बाद गोबर के उपलों की अग्नि जलाकर तिल, चावल और घी की मिश्रित आहुति दें.

होम के बाद किसी भी एक साबुत फल की आहुति दें.

सामान्यतया लोग सूखे नारियल की आहुति देते हैं.

1:42 PM. 28 Feb 22 1:42 PM. 28 Feb

Mahashivratri Puja Samagri: महाशिवरात्रि पूजा सामग्री

महाशिवरात्रि 1 मार्च को मनाई जाएगी बेल के पत्ते महाशिवरात्रि पूजा सामग्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो पूजा के दिन ही नहीं तोड़े जाने चाहिए.

पूजा के लिए निम्नलिखित चीजें आवश्यक हैं:

1 शिव लिंग या भगवान शिव की एक तस्वीर

2 बैठने के लिए ऊन से बनी चटाई

3 कम से कम एक दीपक

4 कपास की बत्ती

5 पवित्र बेल

6 कलश या तांबे का बर्तन

7 थाली

8 शिव लिंग रखने के लिए सफेद कपड़ा

9 माचिस

10 अगरबत्तियां

11 चंदन का पेस्ट

12 घी

13 कपूर

14 रोली

15 बेल के पत्ते (बेलपत्र)

16 विभूति- पवित्र आशु

17 अर्का फूल

निम्नलिखित वैकल्पिक आइटम हैं

18 छोटी कटोरी

19 गुलाब जल

20 जैफली

21 गुलाल

22 भंग

8:40 AM. 28 Feb 22 8:40 AM. 28 Feb

शिव और शक्ति का हुआ था मिलन

महाशिवरात्रि को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी. जिसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को माता पार्वती का विवाह भगवान शिव से हुआ. इसी कारण इस दिन को अत्यन्त ही महत्वपूर्ण माना जाता है.

8:04 AM. 28 Feb 22 8:04 AM. 28 Feb

Mahashivratri Puja Significance: महाशिवरात्रि पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि पर्व के यदि धार्मिक महत्व की बात की जाए तो महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के विवाह की रात्रि मानी जाती है. मान्यता है इस दिन भगवान शिव ने सन्यासी जीवन से ग्रहस्थ जीवन की ओर रुख किया था. महाशिवरात्रि की रात्रि को भक्त जागरण करके माता-पार्वती और भगवान शिव की आराधना करते हैं. मान्यता है जो भक्त ऐसा करते हैं उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है.

8:04 AM. 28 Feb 22 8:04 AM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि तिथि 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 01 मार्च, मंगलवार को है. चतुर्दशी तिथि मंगलवार की सुबह 03 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 02 मार्च, बुधवार को सुबह करीब 10 बजे तक रहेगी.

8:04 AM. 28 Feb 22 8:04 AM. 28 Feb

Mahashivratri 2022 Date: इस दिन पूजा करना का विशेष फलदायी

वैसे तो इस दिन मंदिर जाकर पूजन करना विशेष फलदायी होता है, लेकिन यदि आप नहीं जा पाते हैं तब भी घर पर ही पूजन करें.

8:04 AM. 28 Feb 22 8:04 AM. 28 Feb

महाशिवरात्रि का उपवास व जागरण क्यों ?

ऋषि महर्षियों ने समस्त आध्यात्मिक अनुष्ठानों में उपवास को महत्त्वपूर्ण माना है. गीता के अनुसार उपवास विषय निवृत्ति का अचूक साधन है. आध्यात्मिक साधना के लिये उपवास करना परमावश्यक है. उपवास के साथ रात्रि जागरण का महत्व है. उपवास से इन्द्रियों और मन पर नियंत्रण करने वाला संयमी व्यक्ति ही रात्रि में जागकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील हो सकता है. इन्हीं सब कारणों से इस महारात्रि में उपवास के साथ रात्रि में जागकर शिव पूजा करते हैं .

8:04 AM. 28 Feb 22 8:04 AM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: पूजा सामग्री

भगवान शिव पर अक्षत, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, लौंग, इलायची, दूध, दही, शहद, घी, धतूरा, बेलपत्र, कमलगट्टा आदि भगवान को अर्पित करें. पजून करें और अंत में आरती करें.

8:04 AM. 28 Feb 22 8:04 AM. 28 Feb

Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि पूजा मान्यताएं

मान्यता है कि इस दिन महादेव का व्रत रखने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के लिंग स्वरूप का पूजन किया जाता है. यह भगवान शिव का प्रतीक है. शिव का अर्थ है- कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन.

5:43 AM. 28 Feb 22 5:43 AM. 28 Feb

महाशिवरात्रि पूजा विधि

महाशिवरात्रि के दिन सबसे पहले शिवलिंग में चन्दन के लेप लगाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराएं.

दीप और कर्पूर जलाएं.

पूजा करते समय ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.

शिव को बिल्व पत्र और फूल अर्पित करें.

शिव पूजा के बाद गोबर के उपलों की अग्नि जलाकर तिल, चावल और घी की मिश्रित आहुति दें.

होम के बाद किसी भी एक साबुत फल की आहुति दें.

सामान्यतया लोग सूखे नारियल की आहुति देते हैं.

5:27 AM. 28 Feb 22 5:27 AM. 28 Feb

इस कारण से शिव को नहीं चढ़ाते हैं तुलसी

शिव पुराण के अनुसार, जालंधर नाम का असुर भगवान शिव के हाथों मारा गया था. जालंधर को एक वरदान मिला हुआ था कि उसे अपनी पत्नी की पवित्रता की वजह से उसे कोई भी अपराजित नहीं कर सकता है. लेकिन जालंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु को जालंधर की पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना पड़ा. अपने पति की मौत से नाराज़ तुलसी ने भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था.इसी वजह से तुलसी का प्रयोग शिव पूजा करने की मनाही है

5:27 AM. 28 Feb 22 5:27 AM. 28 Feb

प्रहर के अनुसार शिवलिंग स्नान विधि

सनातन धर्म के अनुसार शिवलिंग स्नान के लिये रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घृत और चौथे प्रहर में मधु, यानी शहद से स्नान कराने का विधान है. इतना ही नहीं चारों प्रहर में शिवलिंग स्नान के लिये मंत्र भी अलग हैं जानें…

10:43 PM. 27 Feb 22 10:43 PM. 27 Feb

Mahashivratri Puja: भगवान शिव को ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र

कहते हैं कि शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए. बेल पत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

10:43 PM. 27 Feb 22 10:43 PM. 27 Feb

Mahashivratri Puja में कमल, शंखपुष्प और बेलपत्र का है अत्यंत महत्व

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर कमल, शंखपुष्प और बेलपत्र अर्पित करने से आर्थिक तंगी या धन की कमी के निजात मिलती है। इसके अलावा कहा जाता है कि अगर एक लाख की संख्या में इन पुष्पों को शिवजी को अर्पित किया जाए, तो सभी पापों का नाश होता है।

10:43 PM. 27 Feb 22 10:43 PM. 27 Feb

Maha Shivratri 2022 Date: यह है शिव मंत्र

‘ओम अघोराय नम:।।

ओम तत्पुरूषाय नम:।।

ओम ईशानाय नम:।।

ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय’

10:43 PM. 27 Feb 22 10:43 PM. 27 Feb

Maha Shivratri 2022 Puja Muhurat: पूजन मुहूर्त

आइए जानते हैं इस दिन चार पहर की पूजा का समय

महाशिवरात्रि पहले पहर की पूजा: 1 मार्च 2022 को 6:21 pm से 9:27 pm तक

महाशिवरात्रि दूसरे पहर की पूजा: 1 मार्च को रात्रि 9:27 pm से 12:33 am तक

महाशिवरात्रि तीसरे पहर की पूजा: 2 मार्च को रात्रि 12:33 am से सुबह 3:39 am तक

महाशिवरात्रि चौथे पहर की पूजा: 2 मार्च 2022 को 3:39 am से 6:45 am तक

व्रत का पारण: 2 मार्च 2022, बुधवार को 6:45 am

10:43 PM. 27 Feb 22 10:43 PM. 27 Feb

Mahashivratri Puja Significance: महाशिवरात्रि पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि पर्व के यदि धार्मिक महत्व की बात की जाए तो महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के विवाह की रात्रि मानी जाती है. मान्यता है इस दिन भगवान शिव ने सन्यासी जीवन से ग्रहस्थ जीवन की ओर रुख किया था. महाशिवरात्रि की रात्रि को भक्त जागरण करके माता-पार्वती और भगवान शिव की आराधना करते हैं. मान्यता है जो भक्त ऐसा करते हैं उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है.

10:43 PM. 27 Feb 22 10:43 PM. 27 Feb

Maha Shivratri 2022 Date: ये है मान्यता

मान्यता है कि इस दिन महादेव का व्रत रखने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के लिंग स्वरूप का पूजन किया जाता है. यह भगवान शिव का प्रतीक है. शिव का अर्थ है- कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन.

मुख्य बातें

Mahashivratri 2022 Date : फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि व्रत रखते हैं. इस वर्ष महाशिवरात्रि कल यानी 01 मार्च दिन मंगलवार को है.महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा और व्रत रखने का विशेष महत्व होता है. यहां जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >