Jharkhand News: झारखंड में सरकार से पैसे लिए बिना भी बालू खनन करने को कंपनियां तैयार, DC ने किया शो कॉज

झारखंड राज्य खनिज निगम लिमिटेड की ओर से गढ़वा जिले के केतार प्रखंड स्थित पाचाडुमर सोन नदी बालू घाट से स्टॉक यार्ड तक बालू पहुंचाने के लिए पिछले महीने ऑनलाइन निविदा आमंत्रित की गयी थी. इसकी दर 83 रुपये रखी गयी थी. इसके बावजूद बिना पैसा लिए काम करने को कंपनियां तैयार हैं.

Jharkhand News: झारखंड, यूपी व बिहार की सीमा पर स्थित गढ़वा जिले में बालू से कमाई इतनी ज्यादा है कि संवेदक बिना सरकार से पैसा लिए भी बालू का खनन एवं डंप करने के लिए तैयार हैं. कंपनियां सवा रुपये से लेकर 19 रुपये तक में कार्य करने के लिए तैयार हैं. बिहार के पटना की नर्सिंग सिंह नामक एक कंपनी ने जीरो कॉस्ट पर यह काम करने की इच्छा जतायी है. इस मामले में उपायुक्त ने नर्सिंग सिंह नामक कंपनी को शो कॉज करते हुए पूछा है कि आखिर वह बिना एक रुपये लिए यह काम कैसे करेगी.

ऑनलाइन आमंत्रित की गयी थी निविदा

झारखंड राज्य खनिज निगम लिमिटेड की ओर से गढ़वा जिले के केतार प्रखंड स्थित पाचाडुमर सोन नदी बालू घाट से स्टॉक यार्ड तक बालू पहुंचाने के लिए पिछले महीने ऑनलाइन निविदा आमंत्रित की गयी थी. इसकी दर 83 रुपये रखी गयी थी, लेकिन जेएसएमडीसी की ओर से 27 अक्टूबर को उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने जब यह टेंडर खोला गया, तो अधिकारी आश्चर्यचकित रह गये क्योंकि इसमें बिहार के पटना की नर्सिंग सिंह नामक एक कंपनी ने जीरो कॉस्ट पर यह काम करने की इच्छा जतायी है.

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डीसी ने किया शो कॉज

कुल 16 टेंडर में से एक संवेदक ने 1.24 रुपये में ही यह काम करने की इच्छा जतायी है़ 3.65 रुपये, 11 रुपये, 19 रुपये में भी काम करने के लिए संवेदक तैयार हैं. इस मामले में उपायुक्त ने नर्सिंग सिंह नामक कंपनी को शो कॉज करते हुए पूछा है कि आखिर वह बिना एक रुपये लिए यह काम कैसे करेगी. नदी में जहां से बालू निकाले जाते हैं, वहां से डंपिंग यार्ड की दूरी करीब 500 मीटर है.

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जिला खनन पदाधिकारी से कुछ कहने से किया परहेज

उल्लेखनीय है कि पाचाडुमर सोन नदी बालू घाट बिहार एवं उत्तरप्रदेश दोनों राज्यों की सीमा से सटा हुआ है. यहां से निकाला गया बालू यूपी के बनारस, लखनऊ, कानपुर जैसे बड़े शहरों से लेकर दिल्ली की मंडियों तक वैध एवं अवैध दोनों तरीकों से भेजे जाते हैं. जेएसएमडीसी द्वारा एकमात्र यही बालू घाट संचालित है. इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि यह गोपनीय मामला है. इस पर वे अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कह सकेंगे.

रिपोर्ट : पीयूष तिवारी, गढ़वा

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लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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