Airbus A320 Flight : A320 विमान अचानक हवा में झुका, तो क्यों मचा हड़कंप; समझें पूरी बात

Airbus A320 Flight : एयरबस के एयरक्राफ्ट A320 में जो तकनीकी समस्या सामने आई और जिस तरह तत्काल प्रभाव से उसे दुरुस्त किया गया, उससे यह तो कहा जा सकता है कि आज के समय में एविशन इंडस्ट्री काफी मुस्तैद है.साथ ही यह पूरी इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी भी है कि तकनीक कितना भी उन्नत हो जाए, उसमें खराबी आ सकती है और उसपर ध्यान देना जरूरी है.

Airbus A320 Flight : एविएशन इंडस्ट्री में उस वक्त हड़कंप मच गया जब यह जानकारी सामने आई कि एयरक्राफ्ट A320 में कुछ तकनीकी समस्या है और उसे उड़ान पर भेजना खतरनाक हो सकता है. इस विमान को बनाने वाली कंपनी ने जैसे ही विमानों को वापस बुलाया, पूरी इंडस्ट्री यह जानने के लिए बेचैन हो गई कि आखिर इस विमान में समस्या क्या है और कैसे उसका समाधान होगा. चूंकि आज के समय में A320 विमान दुनिया में सबसे ज्यादा उपयोग में लाए जाने वाले विमानों में से एक है और इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता था. समस्या को लेकर अबतक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार भारत में जितनी विमानें हैं उनमें से अधिकतर में जरूरी सुधार हो चुका है और जिनमें नहीं हुआ है, उनका काम भी रविवार 30 नवंबर को पूरा कर लिया जाएगा.

A320 में क्या है तकनीकी समस्या?

A320 विमान में जो तकनीकी समस्या आई थी उसके बारे में जानकारी देते हुए उसकी निर्माता कंपनी एयरबस ने बताया है कि तेज सोलर रेडिएशन, फ्लाइट कंट्रोल के काम करने के लिए जरूरी डेटा को खराब कर सकता है. यह डेटा विमान के परिचालन के लिए बहुत जरूरी होता है. इस कारण एयरबस ने सर्विस में मौजूद कई A320 फैमिली एयरक्राफ्ट की पहचान की है जिन पर असर पड़ सकता है. एयरबस ने एविएशन अधिकारियों के साथ मिलकर अविलंब सावधानी बरतते हुए समस्या के समाधान के लिए जरूरी उपाय करना शुरू कर दिया. जांच के दौरान यह पता चला कि ELAC(Electronic Lateral Control) यूनिट की खराबी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है. इस यूनिट की मदद से विमान को हवा में स्थिर रखा जाता है, इसकी खराबी विमान की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है. जानकारी सामने आते ही एयरबस ने जरूरी बदलाव के लिए विमानों को वापस बुला लिया.

A320 फ्लाइट की समस्या कैसे आई सामने?

A320 विमान में जो समस्या आई उसकी वजह से एक विमान में उड़ान के दौरान अचानक नीचे कीओर झुक गया, जबकि पायलट ने इस तरह का कोई कमांड नहीं दिया था. इस संबंध मे यूरोपियन एविएशन रेगुलेटर ने जानकारी दी इससे कोई बड़ा नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन यह खतरनाक था क्योंकि पायलट के आदेश के बिना अगर फ्लाइट का परिचालन हो तो वह खतरनाक हो सकता है. जिस वक्त यह जानकारी सामने आई वह अनियंत्रित नहीं थी, इसलिए कुछ यात्रियों को हल्की चोट आई क्योंकि विमान अचानक नीचे आ गया था, पर इसे नियंत्रित कर लिया गया.

सुरक्षा के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाया?

A320 विमान

समस्या की जानकारी मिलते ही एयरबस ने AOT (Alert Operators Transmission)जारी किया, जिसके तहत अविलंब समस्या के समाधान के लिए प्रयास शुरू हुए.समस्या का समाधान दो तरह से किया जा रहा है, जिसमें से एक सॉफ्टवेयर अपडेट का काम है. इस अपडेट में लगभग 2 घंटे का समय लगता है. जिन विमानों में हार्डवेयर रिप्लेसमेंट का काम था उनमें थोड़ा समय लग रहा है क्योंकि ELAC यूनिट बदलनी पड़ रही है. हार्डवेयर की उपलब्धता से इसका सीधा संबंध है.

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भारत में क्या हुआ असर?

भारत में इंडिगो, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस, A320 विमानों का परिचालन करते हैं. DGCA के अनुसार इन तीन इंडियन एयरलाइंस के कुल 338 एयरक्राफ्ट में सुधार की जरूरत थी. शनिवार शाम 5:30 बजे तक उनमें से 270 एयरक्राफ्ट में सुधार कर लिया गया था. रविवार तक बाकी काम पूरा हो जाएगा. DGCA का कहना है कि यात्रियों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, विमान सेवा पर इस सुधार कार्य का कोई खास असर नहीं होगा. शनिवार शाम 5:30 बजे तक, इंडिगो के 200 में से 184 एयरक्राफ्ट में जरूरी बदलाव किए जा चुके थे, एयर इंडिया के 113 प्रभावित एयरक्राफ्ट में से 69 में सुधार किया गया, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस के 25 प्रभावित प्लेन में से 17 में जरूरी बदलाव किए गए थे.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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