ऑनलाइन कुछ सर्च करते ही आपके पीछे क्यों पड़ जाती हैं Ads? वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

Online Ads Tracking: क्या आपने कभी सोचा है कि ऑनलाइन कुछ सर्च करने के बाद वही ऐड्स बार-बार आपके पीछे क्यों पड़ जाते हैं? ये ऐड्स आपको उसी चीज की याद दिलाती हैं जिसे आप खरीदने की सोच रहे थे। कभी-कभी बिल्कुल अनजान ऐड्स भी सामने आ जाती हैं. ऐसा होने के पीछे कई कारण होते हैं. आइए आपको बताते हैं.

Online Ads Tracking: जब भी आप इंटरनेट पर कुछ भी चीजें सर्च करते हैं या इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे ऐप्स स्क्रॉल करते हैं, अक्सर आपको वही-वही ऐड्स बार-बार दिखने लगती हैं. कई बार ये ऐड्स आपको उसी चीज की याद दिलाती हैं जिसे आप खरीदने की सोच रहे थे. कभी-कभी बिल्कुल अनजान ऐड्स भी सामने आ जाती हैं और दिमाग में सवाल उठता है कि आखिर मुझे ये ऐड्स दिख क्यों रही हैं? आइए आपको बताते हैं ऐसा क्यों होता है.

मार्केटिंग की चालें

जब आप इंस्टाग्राम या फेसबुक स्क्रॉल करते हैं, तो जो Ads बार-बार दिखते हैं, वो वही चीजें होती हैं जिन्हें आप खरीदने के बारे में सोच रहे थे. ये कंपनियों की एक सोची-समझी ट्रिक होती है ताकि प्रोडक्ट का नाम आपके दिमाग में लगातार बना रहे. उनका डेटा इस तरह बनाया जाता है कि वो आपके दिमाग पर असर डालें और महसूस कराए कि ये चीज आपकी लाइफ में जरूरी है. ऐसे Ads आपका ध्यान काम से हटाकर मजेदार और रंग-बिरंगे Ads से आपको अपनी तरफ खींच लेते हैं.

कुकीज (Cookies)

जब भी आप किसी नई चीज में दिलचस्पी दिखाते हैं या गूगल पर कुछ सर्च करते हैं, आपकी यह इनफार्मेशन इंटरनेट पर सेव हो जाती है. इससे यह पता चलता रहता है कि आप किस समय क्या ढूंढ रहे थे या आपकी पसंद क्या है. नई टेक्नोलॉजी की मदद से, उसी सर्च से जुड़े Ads बार-बार आपके सामने आते रहते हैं, क्योंकि आपका डेटा इंटरनेट के क्लाउड में पहले से सेव होता है.

नेटवर्क शेयरिंग

Google, Meta, Instagram और बाकी जितने भी ऐप्स आप यूज करते हैं, ये सब एक ही नेटवर्क से कनेक्ट होते हैं. कई बार आपका डेटा इसी नेटवर्क में शेयर हो जाता है, जिसकी वजह से आप कुछ ऑनलाइन सर्च या शेयर करने के बाद बार-बार उससे जुड़े Ads देखने लगते हैं.

ऐप्स का आपस में कनेक्शन

आजकल ज्यादातर ऐप्स आपस में जुड़े होते हैं और ये बैकग्राउंड में आपकी पसंद-नापसंद तक रिकॉर्ड करते रहते हैं. ये ऐप्स देखते हैं कि आपको किस तरह के प्रोडक्ट पसंद आते हैं और आप किसी सामान पर कितना खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं. इसी के आधार पर ये आपके खरीदने के तरीके को समझकर डेटा सेव करते रहते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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