Smart TV Refresh Rate: आज के समय में TV टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि कब क्या नया आ जाए, पता ही नहीं चलता. कभी CRT और Plasma TV हुआ करते थे, फिर उनकी जगह LCD TVs ने ली. उसके बाद Mini-LED और QLED TVs आए, और अब OLED, QD-OLED जैसे एडवांस ऑप्शन भी मार्केट में मौजूद हैं. इतना ही नहीं, अब तो Micro RGB TVs की भी एंट्री हो चुकी है.
लेकिन बदलाव सिर्फ स्क्रीन (पैनल) तक ही सीमित नहीं है. TV के रिफ्रेश रेट में भी काफी अपग्रेड देखने को मिला है. पहले 60Hz नॉर्मल था, फिर 120Hz TVs आए और अब 144Hz TVs भी तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये 120Hz और 144Hz का मतलब क्या होता है? और क्या इन दोनों के बीच वाकई कोई बड़ा फर्क है, या ये सिर्फ मार्केटिंग का खेल है? आइए समझते हैं इससे
60Hz, 120Hz, और 144Hz क्या हैं?
अगर आप TV या मॉनिटर खरीदते समय 60Hz, 120Hz या 144Hz जैसे नंबर देखते हैं, तो ये दरअसल रिफ्रेश रेट (refresh rate) को दिखाते हैं. आसान शब्दों में समझें तो, स्क्रीन एक सेकंड में कितनी बार अपने आप को अपडेट करती है बस उसी को रिफ्रेश रेट कहते हैं. इसे आप सीधे आंखों से नहीं देख पाते, लेकिन फर्क जरूर महसूस होता है. जितना ज्यादा रिफ्रेश रेट, उतनी स्मूथ और फ्लूइड विजुअल्स.
क्या हैं इसके फायदे?
अब बात करते हैं इसके फायदों की. जब आप कोई फास्ट एक्शन सीन या स्पोर्ट्स देख रहे होते हैं, तब हाई रिफ्रेश रेट वाला टीवी आपको ज्यादा क्लियर और शार्प मोशन दिखाता है. इसके अलावा, ये जडर (judder) नाम की समस्या को भी कम करता है. जडर तब होता है जब वीडियो के फ्रेम्स और टीवी के रिफ्रेश रेट में तालमेल नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए टीवी एक ही फ्रेम को कई बार दिखाता है. जैसे 24 FPS की मूवी को 120Hz स्क्रीन पर स्मूथ बनाने के लिए हर फ्रेम को 5 बार दिखाया जा सकता है.
आपके लिए कौन सा सही?
बता दें कि असली मजा हाई रिफ्रेश रेट का तब आता है जब आप गेमिंग करते हैं. अगर आपका कंसोल या PC ज्यादा फ्रेम्स निकाल सकता है, तो 120Hz या 144Hz टीवी उन फ्रेम्स का पूरा फायदा उठाता है. इससे गेमिंग एक्सपीरियंस और भी स्मूथ हो जाता है.
हर किसी के लिए 144Hz जरूरी नहीं होता है. अगर आप सिर्फ मूवीज और नॉर्मल टीवी देखते हैं, तो 120Hz भी काफी है. लेकिन अगर आप गेमिंग के शौकीन हैं, तो 144Hz आपके लिए एक बेहतर अपग्रेड रहेगा.
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