फर्जी कॉल और स्पैम पर चुप्पी टेलीकॉम कंपनियों पर पड़ी भारी, TRAI ने ठोकी 150 करोड़ की पेनल्टी
TRAI Penalty: ट्राई ने फर्जी कॉल और स्पैम संदेशों पर सख्त कार्रवाई करते हुए दूरसंचार कंपनियों पर 150 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. जानें जुर्माने की वजह, नियम और ट्राई की सख्त रणनीति
TRAI Penalty: भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं को लगातार परेशान करने वाले फर्जी कॉल और स्पैम संदेशों पर अब कड़ा प्रहार हुआ है. दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई (TRAI) ने नियमों का पालन न करने और शिकायतों को सही तरीके से निपटाने में विफल रहने पर दूरसंचार कंपनियों पर 150 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना ठोका है. यह कार्रवाई उन कंपनियों पर की गई है जो स्पैमर्स के खिलाफ आवश्यक कदम उठाने में नाकाम रही हैं.
जुर्माने की वजह
ट्राई ने पाया कि कई कंपनियों ने ग्राहकों की शिकायतों को बिना उचित जांच के बंद कर दिया. साथ ही, फर्जी कॉल करने वाले कनेक्शनों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई नहीं की गई. यही वजह रही कि नियामक ने वित्तीय दंड लगाया.
नियमों का प्रावधान
ट्राई के नियमों के अनुसार, किसी भी दूरसंचार कंपनी पर प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में प्रति माह 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. यह दंड सीधे स्पैम भेजने पर नहीं, बल्कि स्पैमर्स के खिलाफ कार्रवाई न करने पर लगाया जाता है.
स्पैमर्स पर ट्राई की सख्ती
पिछले एक साल में ट्राई ने 21 लाख से अधिक स्पैमर्स के कनेक्शन काट दिए और एक लाख से ज्यादा संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. यह कदम उपभोक्ताओं को राहत देने और स्पैम नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उठाया गया.
डीएनडी ऐप से आसान शिकायत
नियामक ने एक डीएनडी (Do Not Disturb) ऐप भी लॉन्च किया है. इस ऐप के जरिए उपभोक्ता केवल 4-6 क्लिक में शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इससे शिकायत प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो गई है.
कंपनियों की चुनौती
हालांकि दूरसंचार कंपनियों ने इस जुर्माने को चुनौती दी है. उनका कहना है कि वे नियमों का पालन कर रही हैं, लेकिन ट्राई का मानना है कि उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है.
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