क्या आप भी Immersion Rod से पानी गर्म कर के नहाते हैं? तो इसे खरीदते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान

Immersion Rod: सर्दियों में कई लोग पानी गर्म करने के लिए अक्सर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल करते वक्त थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो यह खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि इमर्शन रॉड खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखें. आइए आपको बताते हैं वो बातें.

Immersion Rod: अक्टूबर का आधा महीना बीत चुका है और अब सर्दियों ने भी दस्तक दे दी है. कुछ ही दिनों में मौसम पूरी तरह बदल जाएगा और लोग पंखे और AC की जगह गीजर और इमर्शन रॉड का यूज करने लगेंगे. गीजर थोड़े महंगे आते है इसलिए ये सबकी बजट में फिट नहीं बैठ पाते. वहीं बात करें इमर्शन रॉड की तो ये सस्ते आते हैं और इसमें किसी भी तरह का इंस्टालेशन का झंझट नहीं होता.

अगर आप भी इस सर्दियां एक बढ़िया इमर्शन रॉड (Immersion Rod) खरीदने वाले हैं तो कुछ बातों का आपको ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अगर इन बातों का ध्यान न रखा जाए तो कई बार ये खतरनाक साबित भी हो सकते हैं.

Immersion Rod खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

ब्रांड और क्वालिटी 

इमर्शन रॉड भी मार्केट में कई तरह के आते हैं. तो कोशिश करें कि हमेशा किसी भरोसेमंद और नामी ब्रांड की रॉड ही खरीदें. अच्छे ब्रांड आमतौर पर सेफ्टी का अच्छे से ध्यान रखते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट जैसी दिक्कतों का खतरा बहुत कम रहता है.

पावर कैपेसिटी 

इमर्शन रॉड लेते समय अपनी जरूरत के हिसाब से वॉटर हीटिंग रॉड की पावर कैपेसिटी चुनें. आम तौर पर 1000 से 2000 वॉट तक की रॉड घर में पानी गर्म करने के लिए बिल्कुल ठीक रहती है.

ISI मार्क

इमर्शन रॉड खरीदते समय यह जरूर चेक करें कि उसमें ISI मार्क हो और वही खरीदें, क्योंकि यह अच्छे क्वालिटी और सेफ्टी की गारंटी देते हैं.

मटेरियल और कोटिंग 

रॉड ऐसा मटेरियल का होना चाहिए जिस पर पानी का असर न पड़े और जंग न लगे. इसके लिए स्टेनलेस स्टील या कॉपर की रॉड बढ़िया रहती है. रॉड (Immersion Rod) का ऊपरी हिस्सा मजबूत प्लास्टिक का होना चाहिए, जो ज्यादा गर्म होने पर भी पिघले नहीं.

FAQ

क्या इमर्शन रॉड से पानी गर्म करना सेफ है?

हां, अगर आप इमर्शन रॉड को सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं और सेफ्टी के नियमों का ध्यान रखते हैं, तो यह बिल्कुल सेफ है.

इमर्शन रॉड खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

इमर्शन रॉड लेते समय यह देखें कि उसमें ISI मार्क हो, ब्रांड भरोसेमंद हो, और रॉड का मटेरियल स्टेनलेस स्टील या कॉपर का हो. साथ ही, अपनी जरूरत के हिसाब से 1000 से 2000 वॉट की पावर कैपेसिटी वाली रॉड चुनें.

इमर्शन रॉड और गीजर में क्या फर्क है?

गीजर थोड़े महंगे होते हैं और इनका इंस्टॉलेशन जरूरी होता है, जबकि इमर्शन रॉड सस्ती, पोर्टेबल और आसान ऑप्शन है.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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