भारत अब सिर्फ आईटी सर्विस का हब नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से ग्लोबल एआई पावर बनने की तरफ बढ़ रहा है. माइक्रोसॉफ्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के हालिया बयान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है. कंपनी का कहना है कि भारत के पास विशाल डेवलपर बेस, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ते एआई एडॉप्शन की वजह से दुनिया में एआई तैनाती के अगले दौर का नेतृत्व करने की क्षमता है. खास बात यह है कि अब भारतीय डेवलपर्स सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि ग्लोबल लेवल पर एआई और ओपन-सोर्स इनोवेशन को दिशा भी दे रहे हैं.
भारत के डेवलपर्स बना रहे ग्लोबल पहचान
माइक्रोसॉफ्ट के कोर-एआई डिविजन के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट जय पारेख के मुताबिक, भारत दुनिया में ओपन-सोर्स योगदान देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो चुका है. उन्होंने बताया कि भारतीय डेवलपर्स ने एआई प्रोजेक्ट्स में 75 लाख से ज्यादा योगदान दिए हैं. यही वजह है कि भारत में तैयार हुई कई ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी अब दुनियाभर में इस्तेमाल हो रही हैं.
हाइपरस्विच, ईआरपीनेक्स्ट, टूलजेट और ब्रूनो जैसे भारतीय प्रोजेक्ट्स अब इंटरनेशनल डेवलपर कम्युनिटी में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. इससे साफ है कि भारत केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता की भूमिका में भी मजबूत तरीके से उभर रहा है.
एआई के अगले दौर में भारत क्यों खास?
माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि आने वाले समय में एआई की असली ताकत सिर्फ बड़े मॉडल बनाने में नहीं होगी, बल्कि उन्हें बड़े स्तर पर भरोसे और स्पीड के साथ लागू करने में होगी. भारत इस मामले में काफी आगे दिखाई दे रहा है.
देश में डिजिटल पेमेंट, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सरकारी डिजिटल पहल ने टेक्नोलॉजी अपनाने की रफ्तार को काफी बढ़ाया है. यही वजह है कि एंटरप्राइज सेक्टर भी तेजी से एआई टूल्स और ऑटोमेशन की तरफ बढ़ रहा है.
कंपनियां तेजी से अपना रही हैं एआई
डेलॉयट के 2026 एंटरप्राइज एआई सर्वे के मुताबिक, बड़े स्तर पर एआई अपनाने के मामले में भारत 15 देशों में पहले स्थान पर है. इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियां अब एआई को सिर्फ एक्सपेरिमेंट के तौर पर नहीं, बल्कि बिजनेस ऑपरेशन का अहम हिस्सा बना रही हैं.
बैंकिंग, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स, एजुकेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इससे नए रोजगार, बेहतर ऑटोमेशन और स्मार्ट सर्विसेज को बढ़ावा मिल रहा है.
भारत के लिए क्या हो सकता है फायदा?
अगर भारत इसी रफ्तार से एआई इकोसिस्टम को मजबूत करता रहा, तो आने वाले वर्षों में देश ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में और बड़ी भूमिका निभा सकता है. इससे स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और टेक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही, भारत एआई आधारित सेवाओं और प्रोडक्ट्स का बड़ा निर्यातक भी बन सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता इंटरनेट उपयोग और टेक्निकल टैलेंट इस बदलाव में सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं.
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