एक आधार कार्ड पर कितने SIM Card खरीदे जा सकते हैं? जान लीजिए नियम वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

SIM Card: आज के समय में लगभग हर किसी के पास मोबाइल फोन है, जिसके लिए सिम कार्ड जरूरी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक आधार कार्ड पर अधिकतम कितने सिम कार्ड लिए जा सकते हैं? और अगर ज्यादा ले लिए तो उसके क्या अंजाम हो सकते हैं? आइए जानते हैं…

SIM Card: अगर आप भी आधार कार्ड धारक हैं तो यह खबर आपके लिए है. यह कार्ड आज के समय में सबसे जरूरी दस्तावेजों में से एक माना जाता है. यह न केवल हमारी पहचान का प्रमाण देता है, बल्कि सिम कार्ड लेने जैसे जरूरी कामों में भी काम आता है. हालांकि, अब आधार कार्ड पर सिम कार्ड जारी करने की एक तय लिमिट सेट कर दी गई है.

अगर कोई व्यक्ति तय सीमा से अधिक सिम कार्ड लेता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में यह पता होना चाहिए की आखिर कितनी लिमिट सेट की गयी है, और अगर आपने भी कई दफा आधार कार्ड से सिम कार्ड जारी करवाई है तो आप यह कैसे पता करें आइए जानते हैं. 

एक आधार कार्ड पर कितने SIM Card खरीद सकते हैं?

भारत सरकार के नियमों के मुताबिक, एक आधार कार्ड पर आप अधिकतम 9 सिम कार्ड सकते हैं. वहीं, मशीन-टू-मशीन (M2M) सेवाओं के लिए यह लिमिट बढ़कर 18 तक हो जाती है. M2M सर्विसों का इस्तेमाल खास तौर पर डिवाइस कनेक्टिविटी के लिए किया जाता है, जैसे स्मार्ट होम गैजेट्स और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले IoT सिस्टम.

अगर आप 9 से ज्यादा SIM Card खरीदते हैं तो क्या होगा?

ब्लॉक हो सकता है सिम कार्ड: TRAI और दूरसंचार विभाग ने चेतावनी दी है कि पहचान की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सिम कार्ड ब्लॉक की जा सकती हैं.

धोखाधड़ी के हो सकते हैं शिकार: कई सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी या अन्य अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है, जिससे आप जिम्मेदार हो सकते हैं.

कानूनी कार्रवाई: अगर आपके नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी कामों के लिए किया जाता है, तो आपको कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

कस्‍टमर वेर‍िफ‍िकेशन: TRAI और दूरसंचार विभाग समय-समय पर सिम कार्ड कस्टमर वेरिफिकेशन की जांच करते हैं. अगर आपके आधार कार्ड पर सिम कार्ड की संख्या तय सीमा से ज्यादा पाई गयी तो आपको नोटिस मिल सकता है.

कैसे चेक करें आपके नाम पर कितने SIM Card रजिस्टर्ड हैं?

  • TAFCOP वेबसाइट पर जाएं.
  • अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें.
  • OTP वेरिफिकेशन के बाद, आपके नाम पर रजिस्टर्ड सभी सिम कार्ड (SIM Card) की लिस्ट दिखाई दे देगी.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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