मॉनसून में प्यारा AC कहीं लगा न दे आपकी क्लास, सेहत के साथ खेलवाड़ करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

AC Mistakes during Monsoon: भारत में मानसून की दस्तक के साथ ही कई इलाकों में लोगों को गर्मी से जरूर मिली है लेकिन इसकी वजह से हवा में नमी बढ़ जाती है। उमस को दूर करने के लिए और कमरे में ठंडक को बनाए रखने के लिए लोग AC का सहारा लेते हैं। मगर सवाल यह है कि क्या बरसात के मौसम में AC का इस्तेमाल वाकई फायदेमंद होता है?

AC Mistakes during Monsoon: जून का महीना खत्म होने को आया है और देश के कई हिस्सों में मॉनसून की एंट्री भी हो चुकी है. बाकी जगहों पर भी इसकी झलक जल्द देखने को मिल जाएगी. इस मौसम में गर्मी से काफी हद तक राहत तो मिल जाती है लेकिन हवा में नमी आ जाने जाने के कारण उमस बढ़ जाती है. हालांकि तमाम लोग ऐसे हैं जिन्‍हें बहुत गर्मी लगती है और वो बारिश के मौसम में उमस को दूर करने के लिए एयरकंडीशनर का इस्‍तेमाल करते हैं.

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो मॉनसून में एसी चलाते हैं तो कुछ बातों को अच्‍छे से समझ लेना जरूरी है क्यूंकि यह आपके सेहत को नुक्सान पंहुचा सकता है. आज हम आपको बताने जा रहे है AC से जुडी कुछ ऐसे टिप्स जिसको आप बरसात के मौसम में फॉलो कर सकते हैं. आइए जानते हैं.

सही टेम्परेचर सेट करें 

मानसून में AC को 18 डिग्री पर सेट करना सेहत के साथ खेलवाड़ करना होगा. बाहर की नमी और हल्की ठंडक के बीच अत्यधिक ठंडा माहौल कई लोगों को नाक बंद, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं दे सकता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में AC का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें.

यह भी पढ़ें: कमरे में फैली उमस की हेकड़ी निकाल देगा यह डिवाइस, मिनटों में चिपचिपी गर्मी से दिलाएगा छुटकारा

मॉनसून में AC को ‘Dry Mode’ पर चलाएं 

मानसून के मौसम में परेशानी की असली वजह गर्मी नहीं बल्कि हवा में बढ़ी हुई नमी होती है. ऐसे में कमरे की नमी को हटाने के लिए एयर कंडीशनर को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर AC को ‘ड्राई मोड’ पर चलाना चाहिए क्यूंकि इससे कमरा अत्यधिक ठंडा हुए बिना नमी को नियंत्रित करता है और साथ ही बिजली की खपत भी कम करता है.

AC को साफ रखें  

एसी के रखरखाव में लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. दरअसल, हवा में मौजूद नमी धीरे-धीरे एसी के फिल्टर्स और डक्ट्स में जमने लगती है. यदि लंबे समय तक इनकी सफाई न की जाए तो एसी से बदबू आने लगती है और साथ ही छींकने व खांसी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो हर दो हफ्ते में फिल्टर्स की सफाई जरूर करनी चाहिए.

यह भी पढ़ें: दिन-रात धकाधक चलाएं AC, फूटी कौड़ी भी नहीं आएगा बिल, बस जान लें यह सीक्रेट फॉर्मूला

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >