खास बातें
Amit Shah Kurseong Rally: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के निर्णायक मोड़ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों से मास्टरस्ट्रोक खेला है. बंगाल में पहले चरण की वोटिंग का प्रचार समाप्त होने से पहलेमंगलवार को कर्सियोंग में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने दशकों पुराने ‘गोरखा मुद्दे’ को सुलझाने की समय सीमा तय कर दी.
गोरखा की भावनाओं के साथ कोई और नहीं कर सकता न्याय
उन्होंने ऐलान किया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के मात्र 6 महीने के भीतर इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान निकाल लिया जायेगा. शाह ने कहा कि भाजपा के अलावा कोई दूसरा दल गोरखा की भावनाओं के साथ न्याय नहीं कर सकता.
गोरखा की शर्तों पर होगा समाधान
गृह मंत्री ने पहाड़ियों के लोगों की आकांक्षाओं को समझते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं. उन्होंने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने के बाद 180 दिनों के भीतर गोरखा मुद्दे का ऐसा हल निकलेगा, जिससे हर गोरखा के चेहरे पर मुस्कान होगी. यह समाधान उनकी अपनी शर्तों और इच्छा के अनुसार होगा, ताकि वे शांति और सम्मान के साथ रह सकें.
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ममता बनर्जी सरकार पर लगाया सहयोग न करने का आरोप
अमित शाह ने गोरखा समस्या के अब तक न सुलझने का ठीकरा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर फोड़ा. उन्होंने खुलासा किया कि गृह मंत्री के तौर पर उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए 3 बार बैठकें बुलायीं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य का एक भी प्रतिनिधि नहीं भेजा.
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कांग्रेस-टीएमसी ने गोरखा भाइयों के साथ किया अन्याय : शाह
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने हमेशा देशभक्त गोरखा भाइयों के साथ अन्याय किया है. राज्य सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ही इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त करना पड़ा.
Amit Shah Kurseong Rally: मतदाता सूची और नागरिकता पर बड़ी घोषणा
पहाड़ी क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम कटने को लेकर व्याप्त डर पर गृह मंत्री शाह ने मरहम लगाया. कहगा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन गोरखा भाइयों के नाम मतदाता सूची से हटाये गये थे, भाजपा सरकार बनते ही उन सभी नामों को सम्मान के साथ वापस जोड़ा जायेगा. शाह ने गोरखाओं को देश का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी नागरिकता और पहचान पर आंच नहीं आने दी जायेगी.
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पृथक राज्य और क्षेत्रीय राजनीति का भविष्य
दार्जिलिंग, कर्सियोंग और कलिम्पोंग के पहाड़ी जिलों में पृथक राज्य (गोरखालैंड) की मांग हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है. अमित शाह के इस ‘6 महीने’ वाले वादे ने उत्तर बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है. स्थानीय राजनीतिक दल और आम नागरिक अब इस वादे को भाजपा की प्रतिबद्धता के रूप में देख रहे हैं.
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