दीघा मंदिर में पुरी के जगन्नाथ धाम की लकड़ी का नहीं हुआ इस्तेमाल : सीएम

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ओडिशा सरकार के इस आरोप का खंडन किया है कि दीघा के जगन्नाथ मंदिर में देवताओं की नक्काशी के लिए पुरी के जगन्नाथ धाम मंदिर की बची हुई लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है.

मुख्यमंत्री ने ओडिशा सरकार के आरोपों का किया खंडन

संवाददाता, कोलकाता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ओडिशा सरकार के इस आरोप का खंडन किया है कि दीघा के जगन्नाथ मंदिर में देवताओं की नक्काशी के लिए पुरी के जगन्नाथ धाम मंदिर की बची हुई लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है. मुर्शिदाबाद में मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि ओडिशा सरकार ने दावा किया है कि उन्होंने पुरी से नीम के पेड़ चुराये हैं. उन्होंने कहा कि उनके घर पर भी नीम के चार पेड़ हैं और भगवान जगन्नाथ की मूर्तियां तो लोग अपने घरों में भी रखते हैं.

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस नीम की लकड़ी को लेकर विवाद है, उसे पुरी जगन्नाथ मंदिर के सेवायत रामकृष्ण दास महापात्रा (राजेश दैतापति) लाये थे, जो 30 अप्रैल को मंदिर के उद्घाटन के समय मौजूद थे. उन्होंने कहा कि महापात्रा वह लकड़ी कहीं और से लाये थे और उन्होंने सुना है कि इस मामले में उनसे ओडिशा में पूछताछ भी की गयी है. ममता बनर्जी ने कहा कि सभी लोग पुरी जाते हैं, लेकिन इस तरह के सवाल नहीं उठाते. उन्होंने ओडिशा सरकार से पूछा कि वे इतनी ईर्ष्यालु क्यों हैं, क्योंकि ईर्ष्या की कोई दवा नहीं है. मुख्यमंत्री ने ओडिशा सरकार को यह भी याद दिलाया कि कई मामलों में ओडिशा पश्चिम बंगाल पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि जब ओडिशा में आलू की कमी होती है, तो पश्चिम बंगाल उसकी आपूर्ति करता है. चक्रवातों के कारण ओडिशा में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने पर पश्चिम बंगाल अपने राज्य से इंजीनियर भेजता है. उन्होंने यह भी कहा कि पुरी में सबसे ज्यादा पर्यटक पश्चिम बंगाल से ही आते हैं.

दीघा मंदिर को लेकर इतना गुस्सा क्यों? : ममता बनर्जी ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर और दीघा के जगन्नाथ मंदिर सहित सभी धार्मिक संस्थानों का सम्मान करने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिस तरह पुरी के मंदिर का सम्मान किया जाता है, उसी तरह दीघा के जगन्नाथ मंदिर का भी सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि अगर पूरे देश में काली मंदिर और गुरुद्वारे मौजूद हैं, तो दीघा में जगन्नाथ मंदिर बनने पर इतना गुस्सा क्यों है? बता दें कि दीघा मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम’ कहे जाने पर ओडिशा सरकार ने आपत्ति जतायी है, क्योंकि यह शब्द पारंपरिक रूप से पुरी के 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर के लिए इस्तेमाल होता है. पुरी जगन्नाथ मंदिर के मुख्य सेवादार ने इसे पश्चिम बंगाल सरकार का ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया है.

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