West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने एक नया राजनीतिक आयाम जोड़ दिया है. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या में मामूली कमी आयी है. विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव करीबी मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्रों में परिणामों को प्रभावित कर सकता है.
बंगाल में पुरुष से ज्यादा महिलाएं करतीं हैं वोट
पश्चिम बंगाल में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा वोट करतीं हैं. पिछले एक दशक में महिलाएं चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं. मतदान के पैटर्न, मतदान में लगातार वृद्धि और कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित राजनीतिक लामबंदी के साथ, महिला मतदाता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाती रही हैं. भाजपा भी महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है.
3.77 करोड़ से घकर 3.44 करोड़ रह गयी महिला वोटर
एसआईआर के बाद जारी वोटर लिस्ट के आंकड़ों को देखेंगे, तो पता चलेगा कि पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं की संख्या लगभग 3.44 करोड़ है, जो नवंबर में प्रक्रिया शुरू होने पर 3.77 करोड़ थी. पुरुष मतदाताओं की संख्या 3.89 करोड़ से घटकर 3.60 करोड़ रह गयी है. कुल मिलाकर राज्य के 7.04 करोड़ मतदाताओं में से लगभग आधी महिलाएं हैं. महिला और पुरुष वोटर का अंतर 12 हजार से बढ़कर 16 हजार हो गया है.
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बंगाल में 8.7 प्रतिशत कम हुई महिला मतदाता
पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं की संख्या में 8.7 प्रतिशत की कमी आयी है. पुरुष मतदाताओं की संख्या में लगभग 7.5 प्रतिशत की गिरावट से अधिक है. महिलाओं के मतदान का प्रतिशत पिछले 2 दशक में तेजी से ब़ा. वर्ष 2006 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 80.75 था, जो 2011 में बढ़कर 84.45 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2016 में 94.42 प्रतिशत पहुंच गया. वर्ष 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं ने वोटिंग के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया. महिलाओं का मतदान प्रतिशत 81.75 था, जबकि पुरुषों का 81.37 प्रतिशत.
50 प्रतिशत महिला वोट पर है तृणमूल का कब्जा
बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के सर्वेक्षण आधारित अनुमानों से पता चलता है कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने महिलाओं के 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किये, जबकि भाजपा ने लगभग 37 प्रतिशत वोट प्राप्त किये.
West Bengal Election 2026: क्या है ‘दीदी इफेक्ट’
राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि महिला मतदाताओं की संख्या में किसी भी प्रकार की कमी, भले ही वह मामूली हो, उन सीटों पर असर डाल सकती है, जहां कड़ा मुकाबला होता है. अर्थशास्त्रियों ने इस प्रवृत्ति को ‘दीदी इफेक्ट’ बताया है, जिसमें ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता और महिला केंद्रित कल्याणकारी कार्यक्रमों की साझा भूमिका है.
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