हमने कुछ जब्त नहीं किया, सभी दस्तावेज मुख्यमंत्री ले गयीं : इडी

इडी ने बुधवार को कोर्ट में कहा कि राजनीतिक परामर्श फर्म आइ-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के कार्यालय तथा आवास पर छापेमारी के दौरान उसने कोई दस्तावेज जब्त नहीं किया.

हाइकोर्ट ने आइ-पैक मामले में तृणमूल की याचिका का किया निस्तारण

इडी की सीबीआइ जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित

संवाददाता, कोलकाताकलकत्ता हाइकोर्ट की न्यायाधीश शुभ्रा घोष की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने बुधवार को कहा कि राजनीतिक परामर्श फर्म आइ-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के कार्यालय तथा आवास पर छापेमारी के दौरान उसने कोई दस्तावेज जब्त नहीं किया. छापेमारी के दौरान जो दस्तावेज एकत्रित किये गये थे, वह मुख्यमंत्री छीन कर ले गयीं. इडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने अदालत के समक्ष कहा कि जांच एजेंसी ने इन दोनों परिसरों से कुछ भी जब्त नहीं किया है. एजेंसी ने जो कुछ भी एकत्रित किया था, उसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा वापस ले लिया गया था. इडी के इस बयान पर न्यायाधीश शुभ्रा घोष ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने उसे अवगत कराया है कि उसने (जांच एजेंसी ने) पिछले सप्ताह की छापेमारी के दौरान आइ-पैक निदेशक के कार्यालय और आवास से कुछ भी जब्त नहीं किया है. इसके बाद न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका का निस्तारण कर दिया, जिसमें उसने अपने डाटा की सुरक्षा का अनुरोध किया था. न्यायमूतर्ति घोष ने कहा कि इडी और केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत दलीलों पर गौर करते हुए, पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी की इस याचिका पर विचार करने के लिए और कुछ भी नहीं बचा है. गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने अदालत में याचिका दायर कर आठ जनवरी को इन दोनों परिसरों पर इडी की छापेमारी के दौरान जब्त किये गये व्यक्तिगत और राजनीतिक डाटा के संरक्षण का आदेश देने का अनुरोध किया था.

इसके साथ ही न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने इडी की उस याचिका की सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें आठ जनवरी की घटनाओं की सीबीआइ जांच का अनुरोध किया गया था, जब छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सॉल्टलेक स्थित आइ-पैक कार्यालय और निदेशक के दक्षिण कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर गयी थीं. उच्च न्यायालय ने केंद्रीय एजेंसी की याचिका की सुनवाई इस आधार पर स्थगित कर दी कि इडी ने उच्चतम न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, जो फिलहाल, इसके समक्ष प्रस्तुत आवेदन के लगभग समान हैं. एएसजी राजू ने दलील दी कि जब इसी तरह का कोई मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित हो, तो उच्च न्यायालय को उसी विषय पर मामले की सुनवाई करने से बचना चाहिए. वहीं, तृणमूल की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि राजनीतिक दलों को निजता का अधिकार है, जैसा कि उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने भी व्यवस्था दी है.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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