हमारी कमियां-समस्याएं बहुत हैं, इनसे मुक्ति में ही निहित है आजादी : फिरहाद

विशेष श्रेणी के खास लोगों के सम्मान में आयोजित 'असली आजादी' का मंत्री मलय घटक व फिरहाद हकीम ने किया उद्घाटन

यौनकर्मियों, ट्रांसजेंडरों, फ्रीडम फाइटर्स और एसिड अटैक पीड़िताें का हुआ सम्मान

चेतला के अहींद्र मंच में हुआ सम्मान समारोहकोलकाता. हमारी कमियां-समस्याएं बहुत हैं. आये दिन हमें इनसे दो चार होना पड़ता है. जब तक हम इनसे जूझते-लड़ते रहने को विवश हैं, आजादी का असली स्वाद नहीं मिलने वाला. इन कमियों व समस्याओं से मुक्ति में ही हमारी असली आजादी निहित है. हम आजाद देश के नागरिक हैं. पर, इतना ही काफी नहीं है. असली आजादी का मतलब है भुखमरी से आजादी, पिछड़ेपन से आजादी, संकीर्ण सोच से आजादी. हमें सोचना होगा कि सही मायने में हमें आजादी मिली है या नहीं. यह आज भी एक बड़ा सवाल है.

ये बातें कोलकाता के मेयर और राज्य के शहरी विकास मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम ने कहीं. रविवार को वह दक्षिण कोलकाता के चेतला स्थित अहिंद्र मंच ऑडिटोरियम में प्रभात खबर के सहयोग से ‘लक्ष्य’ व ‘उन्नति’ नामक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘असली आजादी’ का उद्घाटन करने के पश्चात कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में राज्य के कानून व श्रम मामलों के मंत्री मलय घटक व दमकल मामलों के मंत्री सुजीत बोस भी उपस्थित हुए थे. श्री हकीम ने अपनी बातें आगे बढ़ाते हुए कहा कि इन दिनों हमारे इस आजाद देश में एक प्रांत के लोगों को दूसरे प्रांत (राज्य) में अत्याचार-उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है. हम सभी भारतवासी हैं. यहां के लोग किसी भी राज्य में रह सकते हैं, पर देश के कई ऐसे राज्य हैं, जहां पिछड़े वर्ग के लोगों को अपमानित किया जा रहा है. उन्हें अत्याचार का शिकार होना पड़ रहा है. यह तो गलत है. हमारे सामने आज भी ऐसे कई मुद्दे-मसले हैं, पर जिन पर काफी काम करने की जरूरत है, इन्हें ठीक करने की आवश्यकता है. कोलकाता के मेयर श्री हकीम ने कहा कि आजादी एक ऐसी सोच है, जो हमारे मन को आजाद रखे. जब ऐसा हो सके, तो मान लें कि वही असली आजादी है. कार्यक्रम के मंच पर उपस्थित राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक ने कहा कि हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद डॉ आंबेडकर ने हमारे लिए एक संविधान को मूर्त रूप दिया. इसमें सभी लोगों को समान अधिकार दिये गये हैं, पर क्या सभी को ये समान अधिकार मिल रहे हैं? श्री घटक ने कहा कि देश में कुछ ऐसे सरकारी इंस्टीट्यूशन हैं, जिनके कार्य संविधान द्वारा तय हैं, पर वे कई तरह से प्रभावित किये जा रहे हैं. चुनाव आयोग का उदाहरण देते हुए श्री घटक ने कहा कि कभी देश में मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया करते थे, पर अब इसे बदल दिया गया है. अब पीएम, केंद्रीय कैबिनेट के एक मंत्री व विपक्ष के नेता कमेटी चुनती है. इससे इसका संतुलन बिगड़ गया है. श्रम मंत्री ने बताया कि देश के संविधान को बदलने की कोशिश हो रही है. जुडिशियल अधिकारियों की नियुक्त में केंद्र हस्तक्षेप कर रहा है. उन्होंने भी दोहराया कि देश की आजादी के बावजूद नागरिकों को कितनी आजादी है, यह सोचने का विषय है. कार्यक्रम के मंच पर कोमल गांधार व श्रृष्टि-सुखेर उल्लास द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किये गये. कार्यक्रम में सिटी सिविल कोर्ट, कोलकाता की डिस्ट्रिक्ट सेशन जज चंद्राणी मुखर्जी बनर्जी, प्रभात खबर के बिजनेस हेड सुशील कुमार सिंह, प्रभात खबर के पूर्व यूनिट हेड राकेश सिन्हा, भारतीय क्षत्रिय समाज के संरक्षक अरविंद सिंह समेत अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे.

चार विशेष श्रेणियों के खास लोग किये गये सम्मानित

कार्यक्रम में चार श्रेणियों से आने वाले कुल 18 लोगों को सम्मानित किया गया. इनमें एसिड अटैक पीड़ित, यौनकर्मी, ट्रांसजेंडर्स व फ्रीडम फाइटरों के परिजन शामिल थे. पांच ऐसे एसिड अटैक पीड़ितों को सम्मानित किया गया, जिन लोगों ने समाज सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. इन्होंने अपने कार्य, योगदान, साहस और धैर्य के बूते समाज हित में अपने जुझारू होने का प्रमाण दिया है. इसी प्रकार समाज में बदलाव की मुहिम चलानेवाली पांच यौनकर्मियों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

जिन खास लोगों का हुआ सम्मान

फ्रीडम फाइटर

ऊपरोक्त कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के चार सदस्यों को सम्मानित किया गया. स्वतंत्रता सेनानियों में प्रमुख रहे जतिंद्र नाथ मुखोपाध्याय, जिन्हें बाघा जतिन के नाम से भी जाना जाता है. बाघा जतिन के पौत्र इंद्र ज्योति मुखोपाध्याय को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी सुनील घोष के परिजन सुब्रत घोष, आशुतोष मुखोपाध्याय के पुत्र शैवाल मुखोपाध्याय और विधुभूषण मजूमदार के पुत्र सुकमल मजूमदार को सम्मानित किया गया. विधुभूषण मजूमदार ने स्वदेशी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी.

यौनकर्मी

काकोली चौधरी, शेफाली घोष, सीमा विश्वास और शिखा दास जैसी यौनकर्मियों को भी ‘असली आजादी’ के मंच पर सम्मानित किया गया. इस मौके पर दुर्वार महिला समन्वय कमेटी की सचिव विशाखा लश्कर ने सरकार से यौनकर्मियों को श्रमिक के तौर पर मान्यता देने की मांग की, ताकि इन्हें भी ईएसआइसी और श्रमिकों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके. उन्होंने बताया कि कोलकाता के रेड लाइट एरिया सोनागाछी की यौनकर्मी इन दिनों सर्वाइकल कैंसर की शिकार हो रही हैं. कई की मौत भी हो चुकी है. यह घोर चिंता का विषय है. ऐसे में सरकारी सुविधाएं मिलने से इन्हें इलाज में सहूलियत मिलेगी. श्रीमती लश्कर के मुताबिक दुर्वार महिला समन्वय कमेटी यौनकर्मियों के लिए कार्य करनेवाली एक समर्पित संस्था है.

ट्रांसजेंडर

राजकुमारी दास, मणि, सन्नी मुखोपाध्याय, बबली प्रमाणिक और अविक घोष को सम्मानित किया गया. इन ट्रांसजेंडरों ने समाज की रुढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ कर जीवन में नया मुकाम हासिल करने की कोशिश की है.

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Author: GANESH MAHTO

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