कोलकाता, हावड़ा, हुगली समेत देश के 300 जिलों में आज बजेंगे जंगी सायरन

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उभरे नये और जटिल खतरों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार की शाम सात बजे देश के सभी राज्यों में एक साथ मॉक ड्रिल होगी.

पहलगाम हमले के बाद : पहले बजेगा सायरन, फिर होगा ब्लैकअाउट और सुरक्षा में जुट जायेंगे लोग

केंद्रीय गृह सचिव ने की बैठक, परमाणु संयंत्र, रिफाइनरी और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान मॉक ड्रिल का अहम हिस्सा

एजेंसियां, नयी दिल्लीपहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उभरे नये और जटिल खतरों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार की शाम सात बजे देश के सभी राज्यों में एक साथ मॉक ड्रिल होगी. मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद बताया गया कि यह मॉक ड्रिल करीब 300 नागरिक सुरक्षा जिलों में होगी. पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में 31 स्थानों पर यह मॉक ड्रिल की जायेगी. इसमें परमाणु संयंत्रों, सैन्य ठिकानों, रिफाइनरी और जलविद्युत बांधों जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठान वाले जिले भी हैं. बैठक में मॉक ड्रिल में नागरिकों को सहभागी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा की गयी. मॉक ड्रिल में प्रशासनिक, पुलिस और सैन्य अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी, सरकारी और निजी संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे और मेट्रो के कर्मचारी और अधिकारी, अर्द्धसैनिक और रक्षा बलों के वर्दीधारी कर्मी शामिल होंगे.

ऐसे चिह्नित किये जाते हैं ‘नागरिक सुरक्षा जिले’:

‘नागरिक सुरक्षा जिले’ और सामान्य प्रशासनिक जिले अलग होते हैं. किसी भौगोलिक क्षेत्र में छावनी, रिफाइनरी या परमाणु संयंत्र होने पर उसे आवश्यकता और तात्कालिकता के आधार पर ‘नागरिक सुरक्षा जिले’ के रूप में चिह्नित किया जा सकता है. ऐसे जिलों को संबंधित राज्य प्राधिकारियों द्वारा नामित किया जाता है.

क्या-क्या होगा मॉक ड्रिल के दौरान :

‘मॉक ड्रिल’ में हवाई हमले की चेतावनी देनेवाले सायरन बजाना, लोगों को शत्रु के हमले की स्थिति में खुद को बचाने के लिए सुरक्षा पहलुओं पर प्रशिक्षण देना और बंकरों व खंदकों की सफाई करना शामिल है. इसके अजलावा दुर्घटना की स्थिति में ‘ब्लैकआउट’ के उपाय, महत्वपूर्ण संयंत्रों और प्रतिष्ठानों की रक्षा व निकासी योजनाओं को अपडेट करना एवं उनका पूर्वाभ्यास करना शामिल है. ‘मॉक ड्रिल’ में वायुसेना के साथ हॉटलाइन और रेडियो-संचार लिंक का संचालन, नियंत्रण कक्षों और छाया नियंत्रण कक्षों की कार्यक्षमता का परीक्षण भी शामिल होता है.

गांवों में भी होगी ड्रिल :

मॉक ड्रिल में संबंधित जिलों के शहरों और गांवों, दोनों को शामिल किया गया है. इन दोनों ही क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारी का आकलन कर उसे मजबूत किया जाना है.

क्या है युद्ध सायरन

यह एक खास अलार्म सिस्टम है, जिससे खतरे की स्थिति में लोगों को सचेत किया जाता है.

इस सायरन की तीव्रता 120 से 140 डेसिबल तक होती है, जो पांच किमी दूर तक सुनाई देती है.

इस सायरन की ध्वनि लगातार ऊपर-नीचे होती रहती है, जो आम गाड़ियों या एंबुलेंस की आवाज से बिल्कुल अलग होती है.

युद्ध, एयर स्ट्राइक या किसी बड़ी आपदा के समय लोगों को सचेत करने के लिए इसे बजाया जाता है.

सायरन बजे, तो क्या करें

5-10 मिनट के अंदर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जायें.

टीवी, रेडियो और सरकारी अलर्ट्स पर ध्यान बनाये रखें.अफवाहों से बचें, आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें.

घबराएं नहीं, शांत रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें.

जंगी सायरन का मकसद

संभावित हवाई हमले, मिसाइल हमले या अन्य सैन्य खतरे के बारे में नागरिकों और सैन्य बलों को पूर्व सूचना देना.

लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए प्रेरित करना.

सायरन बजते ही सुरक्षा बल, बचाव दल और आपातकालीन सेवाएं तुरंत सक्रिय हो जाती हैं.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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