विधानसभा. अग्निमित्रा के बयान पर बवाल, स्पीकर ने टिप्पणी हटाने के दिये निर्देश, सिद्दिकुल्ला व फिरहाद का पलटवार
संवाददाता, कोलकाताविधानसभा में राज्य के अंतरिम बजट पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को मदरसा और अल्पसंख्यक मामलों के विभाग को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला. भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और शोर-शराबे के चलते सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई. दरअसल बजट चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने मदरसा और अल्पसंख्यक विभाग को मिले आवंटन पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि इस बार बजट में इस विभाग का आवंटन बढ़ाया गया है. उल्लेखनीय है कि चालू बजट में अल्पसंख्यक मामलों के विभाग को 5,713.61 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इसी दौरान अग्निमित्रा पॉल ने मदरसा व्यवस्था को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि मदरसा से पढ़ने वाले छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस, आइपीएस या आइएफएस नहीं बनते. यहां से अपराधी निकलते हैं. उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया. सत्ता पक्ष के विधायक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और सदन में नारेबाजी शुरू हो गयी. हंगामे के बीच अग्निमित्रा पॉल अपने बयान पर अडिग रहीं और कहा कि वह अपने शब्दों से पीछे नहीं हटेंगी तथा सरकार को इस पर जवाब देना होगा. इससे सदन का माहौल और अधिक गरमा गया. स्थिति बिगड़ती देख विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी को हस्तक्षेप करना पड़ा. स्पीकर ने अग्निमित्रा पॉल की टिप्पणी को तत्काल सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश देते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाये रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और किसी भी समुदाय या संस्था के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है. इसके बावजूद कुछ देर तक शोर-शराबा जारी रहा. इस विवाद पर राज्य के शहरी विकास मंत्री और वरिष्ठ तृणमूल नेता फिरहाद हकीम ने कड़ा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि मदरसा से पढ़े छात्र केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे आइएएस, आइपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनकर देश और समाज की सेवा कर रहे हैं. फिरहाद हकीम ने दावा किया कि मदरसा शिक्षा से निकले सफल लोगों की एक लंबी सूची है और विपक्ष के आरोप पूरी तरह निराधार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में मुस्लिम समुदाय का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. फिरहाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्निमित्रा पॉल ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके दावे सही हैं, तो पिछले 15 वर्षों में मदरसा से पढ़कर आइएएस और आइपीएस बने छात्रों के नाम सार्वजनिक किये जायें. उन्होंने कहा कि केवल दावे करने से सच्चाई साबित नहीं होती, इसके लिए आंकड़ों और तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए.विवाद में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी भी शामिल हो गये. उन्होंने अग्निमित्रा पॉल के बयान को अपमानजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कड़ी निंदा की. सिद्दिकुल्ला चौधरी ने कहा कि मदरसा से पढ़ने वाला कोई भी व्यक्ति अपराधी नहीं होता और इस तरह की टिप्पणी समाज में नफरत फैलाने का प्रयास है. उन्होंने अग्निमित्रा पॉल को शिक्षा के मुद्दे पर खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है, तो वह उनसे शास्त्रार्थ करें. साथ ही उन्होंने दावा किया कि मदरसा शिक्षा प्रणाली धार्मिक के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी प्रदान करती है और अग्निमित्रा पॉल से अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की.
सदन के भीतर पूरे घटनाक्रम के दौरान लगातार आरोप-प्रत्यारोप और टोका-टोकी का दौर चलता रहा. कई बार ऐसा लगा कि विधानसभा की कार्यवाही पूरी तरह ठप हो जायेगी. सत्ता पक्ष ने भाजपा पर अल्पसंख्यक समुदाय को बदनाम करने और समाज को बांटने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा विधायकों ने सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया.विधानसभा के बाहर भी इस मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गयी है. तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाया. वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि वे केवल बजट आवंटन में कथित असंतुलन पर सवाल उठा रहे हैं. कुल मिलाकर, बजट चर्चा के दौरान मदरसा और अल्पसंख्यक विभाग को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और गरमाने के संकेत दे रहा है.
