कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
Trinamool crisis: तृणमूल की बागी सांसद डॉ काकोली घोष दस्तीदार ने बड़ा दावा कर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया. कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में श्रीमती दस्तीदार ने कहा कि “हमारे साथ आने वालों की संख्या अब 22 हो चुके हैं. हमारी कोई व्यक्तिगत मांग नहीं है. हम (बागी तृणमूल सांसद) जनता और देश के लिए काम करना चाहते हैं.”
तृणमूल के कुल 28 सांसद हैं
डॉ काकोली घोष दस्तीदार के इस टिप्पणी यह स्पष्ट है कि उन्होंने बागी सांसदों की संख्या बढ़ाकर 22 कर दी है. पहले 28 तृणमूल सांसदों में से 20 सांसदों के बागी खेमे में शामिल होने की चर्चा थी. अब दस्तीदार के दावे के बाद संख्या 22 तक पहुंचने की बात सामने आयी है. इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि शेष सांसदों में से कौन दो सांसद अब बागी खेमे में शामिल हुए हैं.
बागी सूचर से बाहर हैं ये सांसद
लोकसभा में बागी सूची से बाहर तृणमूल सांसदों में अभिषेक बनर्जी, सजदा अहमद, प्रतिमा मंडल, कल्याण बनर्जी, सौगत राय, शत्रुघ्न सिन्हा, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद हैं. अब दस्तीदार के दावे से सवाल है कि आखिर वे दो सांसद कौन हैं, जो बागी खेमे में शामिल हुए. पिछले शनिवार को ही पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी तृणमूल के बागी सांसदों के खेमे में शामिल हो चुके हैं.
बागी खेमे को लेकर होगा बड़ा फैसला
दिल्ली में होने वाली आज की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में तृणमूल संसदीय दल के नये नेता या बागी खेमे के नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है. साथ ही आगे की राजनीतिक रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा होगी. सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सोमवार को सामने आ सकता है. राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर सकते हैं. इस दौरान संसद में अलग ब्लॉक या अलग संसदीय समूह बनाने की मांग रखी जा सकती है.
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24 घंटे तृणमूल कांग्रेस के लिए भारी
यदि बागी सांसद अलग संसदीय समूह बनाने में सफल होते हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा. पार्टी पहले ही विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन, संगठनात्मक असंतोष और बढ़ती अंदरूनी कलह से जूझ रही है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि सांसदों का अलग गुट बनना सीधे तौर पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देगा. आने वाले 24 घंटे तृणमूल कांग्रेस की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं. अब सबकी नजर दिल्ली की बैठक और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी है.
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