केंद्र ने जल जीवन मिशन का फंड रोका!

तृणमूल कांग्रेस की ओर से केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के प्रति वित्तीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल को एक पत्र भेजा है. तृणमूल ने अपने बयान में कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर लगभग 58 हजार करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिससे 1.75 करोड़ ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके.

कोलकाता.

तृणमूल कांग्रेस की ओर से केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के प्रति वित्तीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल को एक पत्र भेजा है. तृणमूल ने अपने बयान में कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर लगभग 58 हजार करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिससे 1.75 करोड़ ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके. इन परियोजनाओं की लागत में राज्य सरकार 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ-साथ भूमि, रखरखाव, पर्यवेक्षण और अन्य खर्च भी वहन करती है. पार्टी के अनुसार : पिछले वर्ष अगस्त से अब तक केंद्र सरकार ने पूरा फंड जारी नहीं किया. वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आंकड़े इस प्रकार हैं : कुल आवंटन करीब 10 हजार करोड़, जिसमें से केंद्र सरकार को करीब 5,050 करोड़ रुपये देने थे. वास्तव में जारी लगभग 2,525 करोड़ रुपये (सिर्फ आधा) की राशि जारी की गयी. यानी करीब 2,525 करोड़ रुपये का फंड नहीं दिया गया. तृणमूल ने दावा किया कि राज्य सरकार ने केंद्र से अधिक योगदान दिया है. जहां केंद्र ने करीब 2,525 करोड़ जारी किये, वहीं राज्य सरकार ने करीब 4,926 करोड़ रुपये खर्च किये, जो केंद्र द्वारा जारी की गयी राशि से 2,401 करोड़ रुपये अधिक है. पार्टी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025-26 में केंद्र ने उक्त योजना को लेकर एक रुपये का भी फंड जारी नहीं किया है.

यह रवैया राजनीतिक प्रतिशोध और ‘वित्तीय नाकेबंदी’ का उदाहरण है. अगर भाजपा को बंगाल के विकास पर चर्चा करना ही है, तो उसे अपने अधूरे वादों और रोके गये फंड से शुरुआत करनी चाहिए. जब तक केंद्र अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता, तब तक उसकी झूठी नाराजगी केवल दिखावा है.

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Published by: Bijay kumar

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