बंगाल में गिरफ्तार शीर्ष भाकपा माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश का सरेंडर करने का नहीं था इरादा

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के केंद्रीय कमेटी के सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश ने सुरक्षा एजेंसियों को लगातार चकमा दिया. गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ है कि उसका सरेंडर करने का कोई इरादा नहीं था. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के केंद्रीय कमेटी के सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश का सरेंडर करने का कोई इरादा नहीं था. वह वर्ष 2011 मुठभेड़ में मारे गये माओवादी नेता व भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य एम कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का करीबी था. आकाश लगातार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे रहा था. गुरुवार को गिरफ्तारी के बाद कोलकाता पुलिस के एसटीएफ ने बताया कि उसका आत्मसमर्पण करने का कोई इरादा नहीं था.

कई नामों से जाना जाता रहा है आकाश

64 वर्षीय आकाश पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के फूलचक गांव का रहने वाला है. उसका वास्तविक नाम असीम मंडल है. वह आकाश के अलावा तिमिर, मनोज, दीपक और राकेश जैसे नामों से भी जाना जाता रहा है. 1980 के दशक में नक्सली गतिविधियों से जुड़ा और बाद में पीपुल्स वार ग्रुप में शामिल हुआ. संगठन में उसे बंगाल के सारेंगा और ग्वालतोड़ के साथ झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा इलाके की जिम्मेदारी मिली थी.

भाकपा (माओवादी) के गठन के बाद और सक्रिय हुआ

21 सितंबर 2004 को भाकपा (माओवादी) के गठन के बाद आकाश संगठन में और सक्रिय रूप से काम करने लगा. पुलिस के अनुसार, झारखंड के सारंडा और कोल्हान इलाके में भी उसने लंबे समय तक संगठन का काम संभाला. बंगाल के जंगलमहल में माओवादी गतिविधियों के विस्तार के दौर में उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. लालगढ़ आंदोलन के दौरान भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण बतायी जाती है. वर्ष 2010 में सुदीप चोंगदार उर्फ कंचन की गिरफ्तारी के बाद उसे भाकपा (माओवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी का सचिव बनाया गया था.

असीम मंडल उर्फ आकाश के प्रमुख कारनामे.

इतना ही नहीं, बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय कमेटी में भी उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी. माओवादी नेता किशनजी की मौत के बाद आकाश को संगठन की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनाया गया. बाद के वर्षों में पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियां कम होने लगी, तो वह मुख्य रूप से बंगाल से सटे झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और बाद में सारंडा इलाके में सक्रिय रहा. पुलिस के अनुसार, एक समय उसके साथ 50 से अधिक सदस्यों का दस्ता सारंडा के जंगल में था.

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बंगाल-झारखंड सीमा पर लगातार चला अभियान

आकाश को पकड़ने के लिए वर्ष की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल-झारखंड अंतरराज्यीय सीमा से लगे जंगलों में व्यापक तलाश अभियान चलाया गया. लेकिन वह सुरक्षा बलों को चकमा देकर फरार होने में सफल हो रहा था. इस अभियान के दौरान झारखंड के रोलाहातू से 2 इंसास राइफल, 103 कारतूस और 6 मैगजीन बरामद की गयी थीं.

22 जनवरी को मारे गये आकाश के दस्ते के कई सदस्य

इसी वर्ष 22 जनवरी को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में आकाश के दस्ते के कुछ सदस्यों के मारे जाने का दावा पुलिस ने किया था. इसके बाद उसने अपना ठिकाना बदलकर दलमा के जंगल का रुख किया और वहां अपना नाम बदलकर ‘मनोज’ रख लिया.

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मिसिर बेसरा के पास सारंडा में ली शरण

पिछले कुछ वर्षों में उसके इलाके के कई एरिया कमांडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया. इसके बाद कुछ समय तक उसने माओवादी संगठन के एक अन्य शीर्ष नेता मिसिर बेसरा के पास सारंडा में शरण ली. हाल में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद आकाश अपने छोटे दस्ते के साथ पश्चिम बंगाल आने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान उसके 3 साथी पकड़े गये.

बीमारी और आर्थिक तंगी बन गयी थी मुसीबत

आकाश की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि उसके लिए बीमारी व आर्थिक तंगी परेशानी का सबब बन गया था. वह उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ी समस्याओं से पीड़ित है. उम्र अधिक होने के कारण सुरक्षा बलों से बचते हुए कई किलोमीटर तक पहाड़ी इलाकों में पैदल चलते हुए भी वह काफी थक गया था. हालांकि, विपरीत हालात में भी वह सरेंडर करने के लिए तैयार नहीं था. पैसों का इंतजाम करने पटाशपुर स्थित अपने ससुराल गया था. पुलिस उसकी गतिविधियों का लगातार पता लगाने की कोशिश में थी और मौका मिलते ही गुरुवार को उसे दबोच लिया गया.

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आकाश को राजनीतिक बंदी माना जाये : एपीडीआर

बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से पहले पश्चिम बंगाल और कोलकाता पुलिस के कुछ अधिकारियों ने आकाश को आत्मसमर्पण करने के विकल्प पर विचार करने को कहा था, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ. मानवाधिकार संगठन एपीडीआर की ओर से रंजीत सूर ने आकाश को तत्काल अदालत में पेश करने की मांग की है. साथ ही कहा है कि उसे राजनीतिक बंदी माना जाये.

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