खास बातें
TMC Bleeds: पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार ‘भूकंप’ के झटके आ रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपनी ही पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ ऐसा धमाका किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. सांसद ने अत्यंत कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर मौजूदा हालात नहीं बदले, तो तृणमूल कांग्रेस अगले कुछ ही दिनों में इतिहास बन जायेगी. इसका अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जायेगा.
सांसद के तीखे बाणों से टीएमसी छलनी
हार के बाद शुरू हुई इस आंतरिक खींचतान ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा किया है, जहां से वापसी की राह कठिन दिख रही है. पार्टी के भीतर से उठ रही आवाज ने नेतृत्व के होश उड़ा दिये हैं. सांसद सुखेंदु शेखर ने अपने दावे के समर्थन में जो तर्क दिये हैं, उसे समझना जरूरी है.
- नेतृत्व की विफलता : सांसद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पार्टी का नेतृत्व जमीनी हकीकत से कट चुका है. चाटुकारों की फौज ने शीर्ष नेताओं को घेर लिया है, जिससे ईमानदार कार्यकर्ताओं की आवाज दब गयी है.
- भ्रष्टाचार का दीमक : सांसद ने कहा है कि भ्रष्टाचार ने पार्टी की जड़ों को इतना खोखला कर दिया है कि अब मरम्मत की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जनता के बीच टीएमसी की छवि ‘चोर’ की बन चुकी है, जिसे बदलना नामुमकिन है.
- विनाश की भविष्यवाणी : सांसद ने साफ कहा- मैं जो देख रहा हूं, वह डरावना है. यह पार्टी अब कुछ ही दिनों की मेहमान है. संगठन ताश के पत्तों की तरह ढहने वाला है.
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पार्टी के भीतर ‘गृहयुद्ध’ जैसी स्थिति
यह बयान महज एक व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि टीएमसी के भीतर मचे उस महासंग्राम का हिस्सा है, जो अब खुलेआम सड़क पर आ गया है. सांसद का इशारा पार्टी के ‘अभिषेक ब्रिगेड’ और ‘ममता के वफादारों’ के बीच चल रही सत्ता की लड़ाई की ओर भी था. उनका मानना है कि इस गुटबाजी ने संगठन को लकवा मार दिया है.
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आरजी कर कांड का गहरा असर
माना जा रहा है कि आरजी कर मामले के बाद जिस तरह से पार्टी की किरकिरी हुई, उसने शांतनु सेन जैसे कई बौद्धिक नेताओं और सांसदों को बगावत के लिए मजबूर किया है. सांसद के इस बयान को इस संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है कि टीएमसी के कई बड़े चेहरे अब ‘डूबते जहाज’ से निकलकर सुरक्षित किनारा ढूंढ़ रहे हैं.
TMC Bleeds: नेतृत्व से चुप्पी तोड़ने की मांग
सांसद ने नेतृत्व को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल कविताओं या सोशल मीडिया पोस्ट से पार्टी नहीं बचेगी. उन्होंने मांग की है कि नेतृत्व अपनी गलतियों को स्वीकार करे और उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाये, जिन्होंने पार्टी को इस हाल में पहुंचाया है. हालांकि, टीएमसी के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी के भीतर इस बयान ने डर का माहौल पैदा कर दिया है.
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क्या ढह जायेगा ममता बनर्जी का किला?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जब राज्यसभा स्तर का कोई नेता इतनी कड़ी बात कहता है, तो इसका मतलब है कि पार्टी के भीतर दरारें बहुत गहरी हो चुकी हैं. यदि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद या विधायक इसी तरह के बयान देते हैं, तो पार्टी में बड़ी टूट से इनकार नहीं किया जा सकता.
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