हाइकोर्ट के निर्देश पर दो माह बाद युवक लौटा बंगाल

मालदा के कलियाचक का निवासी 22 वर्षीय प्रवासी मजदूर आमिर शेख को बांग्लादेशी होने के संदेह में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर बांग्लादेश भेज दिया था.

राजस्थान पुलिस ने बांग्लादेशी होने के संदेह में भेज दिया था बांग्लादेश

संवाददाता, बशीरहाट.

मालदा के कलियाचक का निवासी 22 वर्षीय प्रवासी मजदूर आमिर शेख को बांग्लादेशी होने के संदेह में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर बांग्लादेश भेज दिया था. अंतत: कोर्ट के निर्देश पर 50 दिनों बाद वह बुधवार को अपने घर वापस लौटा. बीएसएफ ने बुधवार रात आमिर को बशीरहाट थाने के हवाले कर दिया. पुलिस ने उसे दस्तावेजों के साथ उसके परिवार को सौंपा. बुधवार को कलकत्ता हाइकोर्ट में उसका मामला उठा. वहीं, उनके वकील रघुनाथ चक्रवर्ती ने बताया कि आमिर शेख के दस्तावेज राजस्थान में जब्त कर लिये गये थे. उन्हें दो महीने तक हिरासत में रखा गया था. बाद में उन्हें बीएसएफ को सौंप दिया गया. इसके बाद बीएसएफ ने उन्हें बांग्लादेश भेज दिया था. अदालत में बीएसएफ ने दावा किया कि आमिर गलती से सीमा पार कर बांग्लादेश चले गये थे और वापसी के दौरान पकड़े गये थे. वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाये थे. फिर उन्हें स्थानीय पुलिस को सौंपा गया था. आमिर शेख ने कहा कि वह काम के सिलसिले में राजस्थान गया था. उसे बांग्लादेशी होने के संदेह में पकड़ कर बीएसएफ को सौंपा गया था. फिर राजस्थान की जेल में उन्होंने दो महीने बिताये. फिर बीएसएफ ने वापस बांग्लादेश भेज दिया था.

जानकारी के अनुसार, आमिर 25 जून से बांग्लादेश में फंसा हुआ था. उसके पिता जियेम शेख ने कलकत्ता हाइकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि राजस्थान पुलिस ने उनके बेटे को गैरकानूनी रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी बताकर गिरफ्तार किया. इसके बाद उसे जेल में रखा गया और फिर बीएसएफ की मदद से बांग्लादेश भेज दिया. बशीरहाट पुलिस के मुताबिक, बीएसएफ ने आमिर को घोजाडांगा बॉर्डर पर उनके हवाले किया, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर उसे उसके परिवार को सौंपा गया.

आमिर का मामला तब सामने आया था, जब दो जुलाई को बांग्लादेश के खुलना से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह रोते हुए कह रहे था कि वह राजस्थान में काम कर रहे थे, पुलिस ने उसे बांग्लादेशी कहकर पकड़ लिया था. कई हफ्ते जेल में रखा. फिर बांग्लादेश भेज दिया. आमिर के पिता ने बताया कि उनका परिवार 400 साल से मालदा के जलालपुर में रह रहा है. उनके पास 1950 के दशक से जमीन के कागजात हैं. बेटे को पाकर पिता समेत परिवार वाले खुश हैं.

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