राज्य में मेडिकल एजुकेशन की स्थिति बदहाल

बंगाल में संजीवन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को एनएमसी से आवश्यक अनुमोदन के बिना संचालित करने के लिए दोषी ठहराया गया है, जिसके तहत गत वर्ष मई महीने में एक चेतावनी जारी की गयी थी

राज्यसभा में मंत्री ने दी जानकारी कोलकाता. लोकसभा में इन दिनों मॉनसून सत्र चल रहा है. मंगलवार को संसद में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल के मेडिकल शिक्षण संस्थानों से संबंधित कई सवाल पूछे. उन्होंने पूछा कि क्या सरकार को पश्चिम बंगाल में निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के दिशानिर्देशों के उल्लंघन की जानकारी है? पिछले तीन वर्षों में ऐसे उल्लंघनों का ब्यौरा क्या है, जिसमें बिना अनुमोदन के संचालित कोई संस्थान भी शामिल है. क्या हावड़ा स्थित संजीवन अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज, एनएमसी की मंजूरी के बिना संचालित पाया गया है और इस संबंध में क्या कानूनी कार्रवाई शुरू की गयी है? पश्चिम बंगाल में कितने निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों को बुनियादी ढांचे, संकाय, डेटा जमा करने के मानदंडों का पालन न करने पर जुर्माना, कारण बताओ नोटिस या सीट कटौती की धमकी मिली है और ऐसे संस्थानों में नामांकित छात्रों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये गये हैं?इसके जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल के शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में 34 मेडिकल कॉलेज (सरकारी और निजी) और शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 37 मेडिकल कॉलेज (सरकारी और निजी) फैकल्टी /बुनियादी ढांचे/ अन्य नैदानिक मापदंडों के संबंध में कमियां पायी गयीं और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किये गये हैं. वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कमियों की प्रकृति के अनुसार, इन कॉलेजों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इन कॉलेजों द्वारा प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्टों के आधार पर, एमबीबीएस सीटों का सशर्त नवीनीकरण प्रदान किया गया है. इधर, बंगाल में संजीवन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को एनएमसी से आवश्यक अनुमोदन के बिना संचालित करने के लिए दोषी ठहराया गया है, जिसके तहत गत वर्ष मई महीने में एक चेतावनी जारी की गयी थी. इसके अलावा, एनएमसी के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (पीजीएमईबी) ने भी वर्ष 2022 के लिए नवीनीकरण आवेदनों की जांच करते समय मुख्य रूप से फैकल्टी/बुनियादी ढांचे से संबंधित कमियां पायीं और कुछ कॉलेजों को दंडित किया. केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि चिकित्सा शिक्षा मानकों के रखरखाव विनियम, 2023 और पूर्ववर्ती स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियम, (पीजीएमईआर-2000) के प्रावधानों के तहत मूल्यांकन वर्ष 2024-25 के लिए सीटों की संख्या कम किया गया है. इनमें बांकुड़ा मेडिकल कॉलेज, मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज, बर्दवान मेडिकल कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एडुकेशन एंड रिसर्च (एसएसकेएम), एनआरएस, आरजी कर और कोलकाता मेडिकल कॉलेज. इन अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी यानी शिक्षक डॉक्टरों की कमी थी.

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Published by: Ganesh mahto

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