लगाया गया 20 हजार रुपये का जुर्माना भी
प्रतिनिधि, बारासात.
आश्रम में दो नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के मामले में अपराध प्रमाणित होने के बाद आश्रम के संन्यासी को अब जेल की सजा काटनी होगी. शुक्रवार को बारासात अदालत ने गोबरडांगा स्थित एक आश्रम के प्रमुख स्वामी सत्यरूपानंद को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी. न्यायाधीश ने पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियमों के तहत सजा का ऐलान किया. इस सजा से पीड़ित नाबालिगों के करीबी लोगों को राहत मिली है.
क्या है मामला : अदालत और पुलिस सूत्रों के अनुसार गोबरडांगा थाना क्षेत्र के सरकारपाड़ा इलाके में स्थित सेवा आश्रम में दोनों नाबालिग पढ़तीं थीं. अगस्त 2022 के मध्य में आश्रम के प्रमुख स्वामी सत्यरूपानंद पर 13 और 14 साल की दो नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था. घटना सामने आने पर भारी हंगामा हुआ था. स्थानीय लोगों ने आश्रम के आसपास विरोध प्रदर्शन किया था. आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग भी जोरशोर से उठी थी. बाद में जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने स्वामी सत्यरूपानंद के खिलाफ गोबरडांगा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करायी. इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया.
बारासात कोर्ट की विशेष पॉक्सो अदालत में मामला शुरू हुआ. आरोपी के खिलाफ 15 अक्तूबर को आरोप पत्र दाखिल किया गया. आरोपी के खिलाफ 11 लोगों की गवाही और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने गुरुवार को स्वामी सत्यरूपानंद को दोषी पाया. शुक्रवार को सजा का ऐलान किया गया. मामले में विशेष सरकारी वकील देवरंजन बनर्जी ने कहा, ‘पॉक्सो अधिनियम के तहत पांच साल और किशोर न्याय अधिनियम के तहत एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी है. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.’
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